हिंदी माध्यम नोट्स
pair production in hindi formula definition युग्म उत्पादन किसे कहते हैं परिभाषा सूत्र क्या है लिखिए
युग्म उत्पादन किसे कहते हैं परिभाषा सूत्र क्या है लिखिए pair production in hindi formula definition
युग्म उत्पादन (PAIR PRODUCTION) जब एक इलेक्ट्रॉन (electron) कण किसी पॉजीट्रॉन (positron) कण (जिसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के समान परन्तु विपरीत आवेश का होता है) से टक्कर करता है तो वे विलोपित होकर फोटॉन ऊर्जा (photon energy) उत्पन्न करते हैं जबकि इसके विपरीतं प्रक्रिया मुक्त आकाश में सम्भव नहीं है अर्थात् एक फोटॉन मुक्त आकाश में इलेक्ट्रॉन-पॉजीट्रॉन युग्म उत्पन्न नहीं कर सकता है। परन्तु यदि फोटॉन की ऊर्जा देहली ऊर्जा से अधिक हो और इसे अत्यधिक शक्तिशाली क्षेत्र जैसे नाभिक के विभव क्षेत्र में से गुजारें तो फोटॉन से इलेक्ट्रॉन पॉजीट्रॉन युग्म उत्पन्न किया जा सकता है।
इसे सिद्ध करने के लिए, माना प्रबल विद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में एक फोटॉन अचानक एक इलेक्ट्रॉन-पॉजीट्रॉन युग्म उत्पन्न करता है। इन कणों का विराम द्रव्यमान m0 है। माना इन कणों के चतुर्विम संवेगों के घटक निम्न हैं-
जहाँ in फोटॉन के संवेग की दिशा में एकांक सदिश है तथा इलेक्ट्रॉन व पॉजीट्रॉन के ऊर्जा एवं संवेग क्रमशः (E2, E3 ) तथा ( P2, P3 ) हैं। चतुर्विम संवेग के संरक्षण के नियम का उपयोग करने पर,
P1u = P2u + P3u ……….. (1)
इस समीकरण का स्वयं के साथ अदिश गुणनफल लेने पर,
चतुर्विम संवेग के घटकों के वर्ग के योग के निश्चरता सिद्धान्त से,
चूँकि cos0 का मान 1 से अधिक नहीं हो सकता है इसलिये यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है। अर्थात् फोटॉन मुक्ताकाश में इलेक्ट्रॉन पॉजीट्रॉन युग्म को उत्पन्न नहीं कर सकता।
यदि उच्च ऊर्जा का फोटॉन (जिसकी कुल ऊर्जा 2moc2 से अधिक है) किसी शक्तिशाली विद्युत क्षेत्र में से गुजारें तो इलेक्ट्रॉन-पॉजीट्रॉन युग्म को उत्पन्न किया जा सकता है। यदि अभिक्रिया के पूर्व व उसके पश्चात् प्रबल विद्युत क्षेत्र द्वारा प्रदान किया गया चतुर्विम संवेग A तथा A’ हों तो चतुर्विम संवेग के संरक्षण के नियमानुसार,
यह समीकरण सभी परिस्थितियों में वैध है बशर्ते फोटॉन की ऊर्जा 2moc2 से अधिक हो। अतः 2moc2 से अधिक ऊर्जा वाले फोटॉन को प्रबल विद्युत क्षेत्र में से गुजारें तो इससे इलेक्ट्रॉन पॉजीट्रॉन युग्म को उत्पन्न किया जा सकता है।
कॉम्पटन प्रभाव (COMPTON EFFECT)
कॉम्पटन ने 1921 ग्रेफाइट परिदर्श द्वारा प्रकीर्णित X – किरण के वर्णक्रमी अध्ययन के दौरान यह ज्ञात किया कि प्रकीर्णित X – किरण में दो घटक होते हैं। एक घटक में आपतित X – किरण के समान आवृत्ति की X- किरण होती है तथा दूसरा घटक में आपतित X – किरण की आवृत्ति से थोड़ा कम (तरंगदैर्घ्य थोड़ा सा अधिक) आवृत्ति की X- किरण होती है। प्रायोगिक तौर पर प्रकीर्णित X – किरण के दोनों घटकों के तरंगदैघ्यों का अंतर जिसे कॉम्पटन विस्थापन कहते हैं, आपतित X – किरण की ऊर्जा पर निर्भर नहीं करता है परन्तु प्रकीर्णन कोण पर निर्भर करता है। इस प्रभाव को कॉम्पटन प्रभाव कहते हैं।
कॉम्पटन प्रभाव का सिद्धान्त
कॉम्पटन प्रभाव को सैद्धान्तिक रूप से सिद्ध करने के लिए 1923 में कॉम्पटन एवं डिबाई ने प्लांक के क्वांटम सिद्धान्त को स्वीकार करते हुए यह सिद्ध किया कि कॉम्पटन प्रभाव आपतित X. किरण (ऊर्जा पैकेट या फोटॉन के रूप में) तथा प्रकीर्णक या लक्ष्य ( target) परमाणु के शिथिल-बद्ध (loosely bound) इलेक्ट्रॉन (मुक्त इलेक्ट्रॉन मानते हुए) के प्रत्यास्थ टक्कर के कारण होता है। इस प्रकार कॉम्पटन ने प्लांक क्वांटम सिद्धान्त को प्रायोगिक प्रमाण प्रदान किया।
कॉम्पटन प्रभाव को सिद्ध करने के लिए माना ऊर्जा E1 = ht तथा संवेग p1 = hu/c का एक फोटॉन विराम द्रव्यमान mo के शिथिल – बद्ध इलेक्ट्रॉन जिसका संवेग शून्य (P2 = 0) तथा ऊर्जा moc2 हैं, से प्रत्यास्थ टक्कर करता है। इसके परिणामस्वरूप आपतित फोटॉन की ऊर्जा में कमी होती है और इलेक्ट्रॉन के संवेग P2 = mv की वृद्धि होती है तथा ऊर्जा E’2 = mc2 हो जाती है तथा यह फोटॉन की आपतित दिशा से 8 कोण बनाते हुए प्रतिक्षिप्त हो जाता है। इसी क्षण संवेग = p1 = hu/ c तथा ऊर्जा E1 = hu’ का एक द्वितीयक फोटॉन आपतित फोटॉन की दिशा से $ कोण बनाते हुए प्रकीर्णित होता है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि कॉम्पटन प्रभाव में आपतित फोटॉन इलेक्ट्रॉन को संवेग तथा ऊर्जा निरंतर नहीं देता है बल्कि पहले फोटॉन की ऊर्जा का इलेक्ट्रॉन द्वारा अवशोषण होता है तथा उसी क्षण इलेक्ट्रॉन (लक्ष्य) द्वितीयक फोटॉन का उत्सर्जन करता है जिसकी ऊर्जा आपतित फोटॉन की ऊर्जा से कुछ कम होती है इसलिये इस अभिक्रिया में संवेग तथा ऊर्जा के संरक्षण के नियम वैध रहते हैं। टक्कर से पूर्व :
(i) आपतित फोटॉन की ऊर्जा E = hu
(ii) आपतित फोटॉन का संवेग P1 = hu/c
यह तरंगदैर्ध्य में कॉम्पटन विस्थापन (compton shift ) का सूत्र है। कॉम्पटन विस्थापन अर्थात् तरंगदैर्ध्य में अंतर आपतित X – किरण के तरंगदैर्घ्य पर निर्भर नहीं करता है बल्कि प्रकीर्णन कोण पर निर्भर करता है। कॉम्पटन विस्थापन के सैद्धान्तिक तथा प्रायोगिक परिणाम में उत्तम समानता होने के कारण यह प्रमाणित होता है कि एक फोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन की टक्कर दो सूक्ष्म कणों की प्रत्यास्थ टक्कर के समतुल्य होती है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि X- किरण ऊर्जा पैकेट या क्वांटा की भाति व्यवहार करती है जब यह ठोस लक्ष्य से टकराती है। अतः कॉम्पटन प्रभाव विकिरण के प्लांक के क्वांटम सिद्धान्त का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करता है।
(a) कॉम्पटन तरंगदैर्ध्य समीकरण (5) में नियतॉक (h/moc) की विमा तरंगदैर्ध्य के तुल्य होती है इसलिये इसे कॉम्पटन तरंगदैर्घ्य (compton wavelength ) कहते हैं।
इस प्रकार कॉम्पटन समीकरण को निम्न रूप में भी लिख सकते हैं।
समीकरण ( 6 ) से यह प्रेक्षित होता है कि
(i) फोटॉन के अग्र प्रकीर्णन के लिए अर्थात्
(ii) आपतित तरंग की दिशा के लम्बवत् दिशा में फोटॉन के प्रकीर्णन के लिए अर्थात्
इस स्थिति में कॉम्पटन विस्थापन, कॉम्पटन तरंगदैर्घ्य का बराबर होता है।
(iii) फोटॉन के पश्च प्रकीर्णन के लिये अर्थात्
अतः इस स्थिति में कॉम्पटन विस्थापन अधिकतम
(b) प्रतिक्षिप्त इलेक्ट्रॉन की दिशा समीकरण (1) से संवेग के आकाशीय घटक लेने पर,
समीकरण ( 10 ) से u/u का मान रखने पर,
गतिज ऊर्जा के रूप में इलेक्ट्रॉन को दी गई आपतित ऊर्जा का अंश
जब प्रकीर्णन कोण 0= 180° होता है तब इलेक्ट्रॉन को महत्तम पश्च प्रकीर्णन की स्थिति ऊर्जा प्रदान की जाती है।
समीकरण ( 13 ) से,
(i) अग्र प्रकीर्णन के लिए 0 = 0 है तो K = 0
(ii) आपतित X – किरण की दिशा के लम्बवत् दिशा में प्रकीर्णन के लिये
यह स्पष्ट है कि प्रकीर्णित फोटॉन की आवृत्ति तथा ऊर्जा अग्र प्रकीर्णन के अतिरिक्त सभी प्रकीर्णन कोणों पर आपतित फोटॉन के आवृत्ति तथा ऊर्जा से कम होती है।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…