हिंदी माध्यम नोट्स
नर्मदा बचाओ अभियान किसने चलाया था | नर्मदा बचाओ आंदोलन किसके नेतृत्व में हुआ narmada bachao andolan in hindi
narmada bachao andolan in hindi नर्मदा बचाओ अभियान किसने चलाया था | नर्मदा बचाओ आंदोलन किसके नेतृत्व में हुआ ?
नर्मदा बचाओ अभियान
नर्मदा नदी पर चलाई जा रही दो महाकाय परियोजनाओं के विरुद्ध होने वाले अभियान ने जनता का बहुत अधिक ध्यान आकर्षित किया है। इनमें से एक परियोजना मध्य प्रदेश में है और दूसरी गुजरात में। हरसूद (मध्यप्रदेश) में हुई एक प्रसिद्ध बैठक में देश के हरभाग से आए हजारों कार्यकर्ताओं ने इस अभियान के उद्देश्य के प्रति एकात्मता व्यक्त की है।
सरदार सरोवर तथा नर्मदा सागर परियोजनाओं की रूपरेखा गुजरात में कच्छ प्रदेश तक पानी पहुँचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस परियोजना का संबंध चार राज्यों – मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात तथा राजस्थान से हैं जिनमें से गुजरात को सबसे अधिक लाभ पहुंचेगा। पर्यावरण की स्थिति से संबंद्ध प्रतिवेदन में आए विषयों पर अनिवार्य रूप से ध्यान दिए जाने की सिफारिश की गई थी जो इस प्रकार थे – जल ग्रहण क्षेत्र, अभिक्रिया, क्षतिपूरक वन रोपण, उपयोग क्षेत्र का विकास, पुनर्वास, वनस्पतिध्प्राणिजात, पुरातत्व, मूंकपनीयता तथा स्वास्थ्य विषयक पक्ष ।
इस प्रतिवेदन में कहा गया कि निर्माण कार्य और पर्यावरण एवं पुनर्वास संबंधी कार्य साथ-साथ चलने चाहिए थे किन्तु जहाँ निर्माण कार्य की प्रगति चार वर्ष आगे चल रही थी वहीं अन्य सभी विषय पिछड़ गए थे। सबसे बुरी हालत विस्थापित लोगों के पुनर्वास की थी। यहाँ पर यह प्रमुख मुद्दा था जिसको लेकर सुश्री मेघा पाटकर ने इस ऐतिहासिक आन्दोलन को प्रारंभ किया था। इसी बीच में बाँध की ऊँचाई बढ़ाने की चेष्टा की गई। हर प्रकार के चालाकी भरे प्रयासों का डटकर मुकाबला किया गया जब तक कि विश्व बैंक ने अपनी शर्तों में संशोधन न कर लिया और मध्यप्रदेश सरकार थोड़ी सी झुक न गई। आन्दोलन अब भी चल रहा है।
विज्ञान एवं पर्यावरण संघ
यह केन्द्र गत दो दशकों से अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में पर्यावरण के पक्ष में महत्वपूर्ण सेवा कर रहा है। यद्यपि इस केन्द्र ने प्रत्यक्ष रूप से कोई आन्दोलन नहीं चलाया किन्तु उन्होंने अपने उद्देश्यों को भली भाँति समझाया हैय सूचना, समर्थन तथा पृष्ठभूमि – सामग्री जुटाई हैय नीति-परिवर्तन संबंधी परामर्श दिए हैंय राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों से लेकर जनसाधारण तक नीतिगत दृष्टिकोण तथा मनोवृत्ति में परिवर्तन के लिए अत्यन्त सकारात्मक रूप से लॉबियाँ तैयार की हैं। विज्ञान एवं पर्यावरण संघ तथा उसके यथार्थवादी सामयिक प्रतिवेदनों के बिना भारत में हुए अनेक आन्दोलनों के विषय में संबद्ध नागरिकों को सूचना भी प्राप्त नहीं हो सकती थी।
छत्तीसगढ़ आन्दोलन
शंकर गुहानियोगी ने छत्तीसगढ़ आदिवासियों को हर प्रकार के शोषण के विरुद्ध संगठित किया था। ऐसे शोषणों में वन्य उत्पादों से होने वाला लाभ प्रमुख था। हालांकि उन्होंने पर्यावरण के मुद्दे को श्रमिक संघ तथा प्रतिनिधिपरक राजनीति से जोड़ लिया किन्तु उनका विशेष बल सदैव स्थानीय लोगों एवं आदिवासियों के लिए परिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने पर ही रहा। उनकी सफलताओं को न सह सकने वाले अत्याचारी तत्वों द्वारा की गई उनकी हत्या हैरानी की बात नहीं थी।
महाराष्ट्र, पालामऊ तथा सुखमोजोरी के जल संकरण आन्दोलन
ये छोटे-छोटे आन्दोलन किसी अत्याचार के विरोध में जाग्रत नहीं हुए थे। इनका लक्ष्य यह है कि संसाधनों में सबसे अधिक पवित्र, श्जलश् का वितरण जरूरतमंद लोगों में न्यायोचित ढंग से हो सके। महाराष्ट्र के कुछ भागों में पानी-पंचायतें बहुत सफल रही हैं। पानी को उपयोग में लाने के आधार पर सुखमोजोरी नामक पूरे गाँव के पुनरुद्भवन तथा इसी प्रयोग को पालामऊ में पुनरावृत्ति को आदर्श के रूप में माना गया है। कुछ न कुछ कमियाँ एक अलग बात है।
भारतीय परिदृश्य: एक परिप्रेक्ष्य
सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए (भारत में) जल, मृदा, भूमि, पौधों, पशुओं, वायु, ऊर्जा, वन आदि संसाधनों की अपर्याप्तता है। सबकी साझा संपत्तियों पर व्यक्तिगत अधिकार कर लिए जाते हैं। विकास परियोजनाएँ न्यायपूर्ण ढंग से विस्तृत नहीं की जाती हैं। उनके उप-उत्पादों तथा संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से साझी विरासत, पारिस्थितिक तंत्रोंय का बहुत ह्रास हुआ है। परिणामस्वरूप अधिक से अधिक लोगों के लिए निर्वाह, मुश्किल होता जा रहा है और वे गरीबी रेखा से नीचे पहुँचते जा रहे हैं। शीघ्र ही भारत की आधी जनसंख्या इस वर्ग में आ जाएगी।
सिंचाई या उद्योग से संबंधित बड़ी परियोजनाओं से बहुत थोड़े समय के लिए राहत प्राप्त होती है। समय के साथ हर परियोजना उस क्षेत्र की पारिस्थितिकी को इतना अस्त व्यस्त कर देती है कि स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, स्वस्थ आहार तथा जैव संसाधन सहज लम्य नहीं रह जाते। सभी असमानताओं के स्वाभाविक परिणाम संघर्ष, हिंसा या बोस्निया जैसे हालात के रूप में फूट पड़ते हैं क्योंकि अन्याय को सभी लोग अनंतकाल तक स्वीकार नहीं कर पाते। विकास संलक्षण का विस्तारवाद भविष्य में हमारे संसाधनों, पारिस्थितिकी और पर्यावरण का, और भी विनाश कर डालेगा। मानव जाति की प्रगति के लिए जितनी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है उसे भुगतना अकल्पनीय हो जाएगा।
प्रगति एवं विकास के लिए सरकार जिम्मेदार है। उसके पास पर्यावरण रक्षा के सभी साधन, ज्ञान के सभी अंतर्वेश, निर्णयात्मक क्षमता, वित्तीय साधन, नौकरशाही, दलीय कार्यकर्ता, बाहरी निवेश तथा विशेषज्ञों की सलाहें आदि, सभी कुछ उपलब्ध है। फिर भी स्वयंसेवी संस्थाओं को पसंद किया जाता है, उनका समर्थन किया जाता है, उन्हें प्रोत्साहन दिया जाता है और उन पर निर्भर रहा जाता है। क्या शासनतंत्र सर्वथा निकम्मा हो गया है?
कोई स्वैच्छिक कार्य कब तक अपने आपको संभाले रह सकता है? गैर सरकारी संगठनों के किसी परिसंघ का बनाया जाना अनिवार्य है जिससे मनःपोषित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए लॉबिंग करने की शक्ति में वृद्धि हो सके। यदि राजनीतिक बलों, दलों और क्रियाविधियों का पर्यावरणीकरण नहीं हो पाता तो पर्यावरण सक्रियतावादियों को स्वयं राजनीतिक बलों के रूप में ढलना पड़ेगा। अन्यथा पारिस्थितिक अराजकता कालान्तर में सामाजिक एवं राजनैतिक अराजकताओं के बीज बो देती है।
इस बीच में न्यायिक सक्रियता एक स्वागत योग्य परिवर्तन आया है। जनहित याचिका तथा ग्रीन बैंचों के कारण पर्यावरण पर विशेषकर प्रदूषणकारी उद्योगों द्वारा होने वाले हमलों का निवारण सुनिश्चित हुआ है और पर्यावरण संरक्षण आन्दोलनों को जीवित रहने के लिए आवश्यक प्राणवायु प्राप्त हुई है।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…