मिचियो त्सुजिमुरा कौन थे ? Michiyo Tsujimura in hindi

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Michiyo Tsujimura in hindi मिचियो त्सुजिमुरा कौन थे ?

आज मिचियो त्सुजिमुरा कौन थी जिनका डूडल आज गूगल ने अपने सर्च इंजन पर लगाया है |

आज जिनका गूगल ने डूडल लगाया है उनका नाम मिचियो त्सुजिमुरा है जो एक जापानी कृषि वैज्ञानिक थे और जैव रसायन से सम्बन्धित क्षेत्रों से सम्बन्धित है | आज इनका 133 वाँ जन्मदिन है और इस उपलक्ष में गूगल ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी फोटो उनको 133 वें जन्मदिन के अवसर पर लगाकर उन्हें धन्यवाद स्वरूप श्रद्धांजलि  अर्पित की है |

क्योंकि मिचियो त्सुजिमुरा (Michiyo Tsujimura) ने कृषि वैज्ञानिक के तौर पर कई बेहतरीन कार्य किये है जिनके कारण पूरा विश्व उन्हें याद करता है |

अगर आपने कभी ग्रीन चाय को अधिक समय तक पानी में उबाला हो और फिर इसका इस्तेमाल किया हो तो आपने महसूस किया होगा कि ग्रीन चाय का स्वाद कुछ कड़वाहट देने लग जाता है या इसका स्वाद अच्छा नहीं लगता है , या दूसरी तरफ सोचो की ग्रीन चाय स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्यप्रद है या नुकसानदायक , इसका इन्सान को ज्ञान कैसे हुए ?

कुछ ऐसी ही चीजों पर मिचियो त्सुजिमुरा (Michiyo Tsujimura) ने प्रयोग करके पता लगाया था | उन्होंने ही अपने प्रयोगों के निष्कर्ष के आधार पर ग्रीन चाय के फायदों के बारे में बताया जिसके बाद ग्रीन चाय का उपयोग बहुतायत से होने लगा है |

एक दशक पूर्व तक शायद ग्रीन चाय को कोई जानता भी नहीं होगा , इसका इस्तेमाल तो दूर की बात है |

इनका जन्म 17 September 1888 को ओकेगोवा में हुआ था , यानी आज से ठीक 133 साल पहले , और आज इनका 133 वाँ जन्मदिन है |

इनकी मृत्यु 1 June 1969 को हुई थी | अपने इस जीवनकाल में उन्होंने कई ऐसे कार्य किये जिन्होंने उनको इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया |

इनका सबसे बड़ा योगदान तो ग्रीन चाय के क्षेत्र में किये गए विभिन्न प्रकार के प्रयोग , और अपने प्रायोगिक आधार पर ग्रीन चाय के उपयोग और उसके फायदों के बारे में लोगों को बताना था , जिसके बाद से ग्रीन चाय का प्रयोग स्वास्थ्य वर्धक के रूप में किया जाने लगा |

जापान देश की वह पहली महिला थी जिन्होंने कृषि क्षेत्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की थी |

प्रारंभ में उनकी शिक्षा एक सामान्य स्कूल से हुई थी , उन्होंने 1909 में अपनी स्कूल पूरी की और इसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षा महान जैव वैज्ञानिक Kono Yasui से प्राप्त की और Kono Yasui द्वारा ही उनको प्रेरणा मिली जिसने उन्हें प्रेरित किया कि उन्हें विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में कुछ करना चाहिए |

1913 में मिचियो त्सुजिमुरा ने अपनी स्नातक की पढाई पूरी की और उसके बाद वह Yokohama High School में एक प्रोफ़ेसर बन गयी और वहां बच्चों को पढ़ाने लगी |

मिचियो त्सुजिमुरा के जीवन में घुमाव तब आया जब उन्होंने होक्काइडो इंपीरियल यूनिवर्सिटी में एक प्रयोगशाला सहायक के रूप में कार्य शुरू किया , अर्थात प्रयोगशाला सहायक के रूप में उन्होंने होक्काइडो इंपीरियल यूनिवर्सिटी ज्वाइन कर ली |

चूँकि इस यूनिवर्सिटी में महिला छात्र नहीं पढ़ती थी इसलिए उनको रखना यूनिवर्सिटी के लिए भारी पड़ता इसलिए यूनिवर्सिटी के न रखने पर उन्होंने बिना सैलरी के वहां रहने का निश्चय किया और यूनिवर्सिटी के कृषि रसायन डिपार्टमेंट में काम करने लगी और , यह कार्य वह मुफ्त में अपने रूचि के लिए कर रही थी |

यूनिवर्सिटी के इस डिपार्टमेंट में रहते हुए उन्होंने रेशम कीड़े के पोषक तत्वों के बारे में रिसर्च किया | वहां उनके कार्य से प्रभावित होकर उन्हें 1922 में मेडिकल रसायन प्रयोगशाला , टोक्यो इम्पीरियल यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज में भेज दिया गया |

लेकिन 1923 में एक जबरदस्त भूकंप आया और इस खतरनाक भूकंप ने इस मेडिकल कॉलेज के प्रयोगशाला को नष्ट कर दिया इस कारण उन्हें अक्टूबर 1923 में एक शोध छात्रा के रूप में आरआईकेईएन (भौतिक और रासायनिक अनुसंधान संस्थान (रिकेन)) में भेज दिया गया | वहां उन्होंने उमेतारो सुजुकी नाम की प्रयोशाला में कार्य जारी रखा और साथ ही अपनी डॉक्टरेट की डिग्री पूरी की और पोषण रसायन में शोध कार्य किया |

1924 में अपनी शोधों के द्वारा मिचियो त्सुजिमुरा ने अपनी सहयोगी सीतारो मिउरा के साथ मिलकर ग्रीन चाय में विटामिन C की खोज की और पहली बार बताया कि ग्रीन चाय में विटामिन सी पाया जाता है | और रसायन विज्ञान के क्षेत्र में प्रकाशित एक लेख छापा जिसका शीर्षक ‘On Vitamin C in Green Tea ‘ दिया गया |

अपने इस खोज के फलस्वरूप ग्रीन चाय का निर्यात उत्तरी अमेरिका में बढ़ गया  |

1929 में उन्होंने ग्रीन चाय में से flavonoid catechin से पृथक किया | इसके बाद 1930 में उन्होंने ग्रीन चाय में से टेनिन नामक पदार्थ को अलग किया |

अपनी इन शोधों के निष्कर्ष के आधार पर थीसिस लिखी और इन थीसिस में उनका मुख्य सार ग्रीन चाय किन किन पदार्थों से मिलकर बनी होती है यह था | अर्थात ग्रीन चाय में क्या क्या रसायन होते है और वे शरीर के लिए लाभदायक होते है इस सन्दर्भ में था | अपनी इस थीसिस के आधार पर ही टोक्यो इंपीरियल यूनिवर्सिटी में 1932 में उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की |

जापान देश की वह पहली महिला था जिन्होंने डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त की |

1934 में गैलोकैटेचिन को ग्रीन चाय से पृथक कर लिया और 1935 में पादप से विटामिन C को पृथक करने का तरीका को अपने नाम से पेटेंट करवा लिया |

1942 में उनका प्रमोशन हो गया और वह आरआईकेईएन (भौतिक और रासायनिक अनुसंधान संस्थान (रिकेन)) में जूनियर शोधकर्त्ता के रूप में कार्य करने लगी |

1947 में वह ओचनोमिज़ु विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बन गयी |

1955 में उन्होंने सेवानिवृत्ति ले ली (ओचनोमिज़ु विश्वविद्यालय से) | लेकिन इसके बाद भी उन्होंने पढ़ाना बंद नहीं किया और 1961 तक पार्ट टाइम बच्चों को पढ़ाने लगी |

चूँकि कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान अतुल्य है इसलिए उनको कृषि विज्ञान का जापान पुरस्कार दिया गया | और उनको यह पुरस्कार ग्रीन चाय के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण दिया गया था | 1 जून 1969 को 81 वर्ष की आयु में टोयोहाशी में मिचियो त्सुजिमुरा का निधन हो गया |