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दूरदर्शी व सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता और विभेदन सीमा limit of resolution and resolving power of microscope and telescope
limit of resolution and resolving power of microscope and telescope , दूरदर्शी व सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता और विभेदन सीमा ज्ञात करना क्या है ? :-
दूरदर्शी की विभेदन सीमा (dθ) : दूरदर्शी की विभेदन सीमा दूरस्थ वस्तुओ द्वारा इसके अभिदृश्क पर बनाई गयी वह न्यूनतम कोणीय दूरी है जिस पर दूरदर्शी दोनों वस्तुओ के प्रतिबिम्बों को ठीक विभेदित कर सके , इसे dθ से प्रदर्शित करते है तथा इसका मात्रक रेडियम अथवा डिग्री होता है। दूरदर्शी की विभेदन सिमा (dθ) दूरस्थ वस्तु से आने वाले प्रकाश की तरंग दैर्ध्य λ के समानुपाती तथा अभिदृशक के आकार (d) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
अत:
dθ ∝ λ समीकरण-1
dθ ∝ 1/D समीकरण-2
समीकरण-1 तथा समीकरण-2 से –
dθ ∝ λ/D
dθ = 1.22λ/D समीकरण-3
D = अभि नेत्र लेंस का आकार –
d = 1/dθ
d = D/1.22λ समीकरण-4
दूरदर्शी की विभेदन क्षमता :- दूरदर्शी की विभेदन क्षमता दूरस्थ वस्तुओ के मध्य की वह न्यूनतम दूरी होती है जिस पर अभिदृश्क द्वारा दोनों वस्तुओ के प्रतिबिम्बों को पृथक – पृथक देखा जा सकता है |
दूरदर्शी की विभेदन क्षमता (d) इसकी विभेदन सीमा (dθ) के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात –
d = 1/dθ
d = D/1.22λ समीकरण-4
समीकरण-4 से स्पष्ट है कि अभिदृश्यक के आकार को बढ़ाकर अथवा वस्तुओ से आने वाले प्रकाश की तरंग दैर्ध्य को घटाकर दूरदर्शी की विभेदन क्षमता बढाई जा सकती है परन्तु वस्तुओ से आने वाली प्रकाश की तरंग दैधर्य पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है अत: अभिदृश्य के आकार को बढ़ाकर ही दूरदर्शी की विभेदन क्षमता को बढाया जा सकता है |
नोट : दूरदर्शी का अभि दृश्यक बड़ा होने पर इसमें प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा भी अधिक होती है जिससे प्रतिबिम्बों की तीव्रता बढ़ जाती है तथा प्रतिबिम्ब चमकीली प्राप्त है अत: प्रतिबिम्बों की तीव्रता बढने से इनकी आंतरिक संरचना को अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है तथा इससे भी अधिक दूरी पर स्थित वस्तुओ के प्रतिबिम्ब को पृथक पृथक रूप से देखा जा सकता है |
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा दो बिन्दुवत वस्तुओ के मध्य की वह न्यूनतम दूरी है जिस पर सूक्ष्मदर्शी इनके प्रतिबिम्बों को अलग अलग रूप से बना सके इसे d से दर्शाते है तथा इसका मात्रक m अथवा cm होता है |
सूक्ष्म दर्शी की विभेदन सीमा वस्तुओ से आने वाले प्रकाश की तरंग दैर्ध्य (λ) के समानुपाती तथा सूक्ष्मदर्शी के संकुल कोण (2θ) के व्युत्क्रमानुपाती होती है अत:
d ∝ λ समीकरण-1
d ∝ 1/2θ समीकरण-2
समीकरण-1 तथा समीकरण-2 से –
d ∝ λ/2θ
d = 1.22 λ/2θ
चूँकि θ बहुत छोटा है |
d = 1.22 λ/Sin2θ
चूँकि sin2θ = 2sinθcosθ
अत:
d = 1.22 λ/2sinθcosθ
θ छोटा होने से –
cosθ = 1
d = 1.22 λ/2sinθ समीकरण-3
यदि वस्तु तथा अभिदृशयक के मध्य माध्यम (μ) उपस्थित हो तो तब समीकरण-3 से –
d = 1.22 λ/2μ sinθ समीकरण-4
यहाँ μ sinθ = आंकिक द्वारक है |
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता : सूक्ष्म दर्शी की विभेदन क्षमता इसकी विभेदन सीमा के व्युत्क्रम के बराबर होती है |
क्षमता = 1/D
क्षमता = 2μ sinθ/1.22 λ
यदि माध्यम की उपस्थिति हो –
क्षमता = 2sinθ/1.22 λ समीकरण-5
समीकरण-5 से स्पष्ट है कि सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता बढाने के लिए शंकु कोण 2θ को बढाना होगा अथवा वस्तुओ से आने वाले प्रकाश की तरंग दैधर्य को कम करना होता है परन्तु शंकु कोण को एक निश्चित सीमा तक ही कम किया जा सकता है क्योंकि वस्तुएं अभिदृश्यक के फोकस तल से बाहर रहनी है | अन्यथा वस्तुओ के प्रतिबिम्ब वास्तविक न बनकर आभासी बनते है अत: तरंग दैधर्य को कम करके ही सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है |
प्रश्न : दो समीपवर्ती वस्तुओ के मध्य की न्यूनतम दूरी 1mm है तथा 6000 एन्ग्सट्रम तरंग दैधर्य का प्रकाश प्रयोग में लाने पर सूक्ष्मदर्शी द्वारा इन्हें विभेदित किया जा सकता है , यदि 4800 A तरंग दैधर्य का प्रकाश प्रयोग में लाया जाए तब वस्तुओ के मध्य की न्यूनतम दूरी क्या हो जिससे इनके प्रतिबिम्बों को अलग अलग किया जा सके ?
उत्तर : दिया गया है –
d’ = 1mm
d’ = 1 x 10-3 मीटर
λ1 = 6000 A
λ1 = 6 x 10-7 मीटर
λ2 = 4800 A
λ2 = 4.8 10-7 मीटर
d” = ?
चूँकि
d = 1.22 λ/2sinθ
यहाँ θ नहीं दे रखा अत: θ दोनों स्थिति में नियत होगा |
d ∝ λ
d”/d’ = λ2/λ1
हल करने पर
d” = d’ x λ2/λ1
मान रखकर हल करने पर –
d” = 0.8 mm
प्रश्न 2 : एक मानव नेत्र का व्यास 2 mm है , इससे 50 cm दूरी पर स्थित दो वस्तुओ के मध्य की न्यूनतम दूरी क्या हो जिससे इन्हें मानव नेत्र द्वारा पृथक किया जा सके जबकि वस्तुओ से आने वाले प्रकाश की तरंग दैधर्य 6000 A है |
उत्तर : दिया गया है –
D = 2 mm
D = 2 x 10-3 मीटर
r = 50 cm
r = 1/2 मीटर
l = ?
λ = 6000 A
λ = 6 x 10-7 मीटर
हम जानते है कि –
dθ = 1.22 λ/D समीकरण-1
चित्र ज्यामिति से –
dθ = l/r समीकरण-2
समीकरण-1 व 2 से
l/r = 1.22 λ/D
l = 1.22 rλ/D
मान रखकर हल करने पर –
l = 0.183 mm
व्यतिकरण एवं विवर्तन में अंतर
| व्यतिकरण | विवर्तन |
| 1. व्यतिकरण की घटना में सभी फ्रिंजो की चौड़ाईयां समान होती है | | विवर्तन की घटना में सभी फ्रिन्जो की चौड़ाई असमान होती है | |
| 2. व्यतिकरण के घटना में सभी चमकीली फ्रिन्जो की तीव्रता समान होती है | | विवर्तन की घटना में केन्द्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता सबसे अधिकतम तथा इसके पश्चात् उच्चिष्ठों की तिव्रतायें उत्तरोतर रूप से घटती जाती है | |
| 3. व्यतिकरण की घटना में दोनों तरंगो के आयाम समान होने पर काली फ्रिन्जो के स्थान पर पूर्णत: अँधेरा प्राप्त होता है अथवा इनकी तीव्रता शून्य होती है | | विवर्तन में निम्निष्ठ की तिव्रताएं शून्य नहीं होती है | |
| 4. व्यतिकरण की घटना में काली तथा चमकीली फ्रिजो के मध्य उत्तम विप्रयास होता है | | विवर्तन की घटना में निम्निष्ठों तथा उच्चिष्ठों के मध्य उत्तम विपर्यास नहीं होता है | |
| 5.व्यतिकरण की घटना में चमकीली फ्रिन्जो के लिए तरंगो के मध्य पथांतर शून्य अथवा λ का पूर्ण गुणज होना चाहिए | विवर्तन की घटना में उच्चिष्ठो के लिए पथांतर 3λ/2 अथवा इसका विषम गुणज होना चाहिए | |
| 6.व्यतिकरण की घटना में काली फ्रिन्जो के लिए दोनों प्रकाश तरंगो के मध्य पथांतर λ/2 अथवा इसका विषम गुणज होना चाहिए | | विवर्तन की घटना में निम्निष्ठों के लिए पथांतर λ अथवा λ का पूर्ण गुणज होना चाहिए | |
| 7. व्यतिकरण की घटना में दो प्रकाश स्रोतों से चलने वाली प्रकाश तरंगिकाओ के मध्य अध्यारोपित होता है जिससे दोनों प्रकाश स्रोत कला सम्बन्ध होते है | | विवर्तन की घटना एक ही तरंगाग्र से चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओ के अध्यारोपण से उत्पन्न होती है | |
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