lac operon in hindi | लेक ऑपेरॉन क्या है | लेक ओपरेन की परिभाषा किसे कहते है operon model kisne diya

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लेक ओपरेन की परिभाषा किसे कहते है operon model kisne diya lac operon in hindi ?

लेक ऑपेरॉन (Lac Operon)
परिचय (Introduction)
प्रोकेरियोट में इ.कोलाई नामक बेक्टीरिया में प्रोटीन संश्लेषण का अध्ययन विस्तारपूर्वक किया गया है। β-गैलेक्टोसाइडेज ( β-galalactosidase) नामक एन्जाइम के संश्लेषण पर भी काफी अध्ययन हुआ है। β-galactosidase एन्जाइम द्वारा लेक्टोस का ग्लूकोज व गैलेक्टोज में निम्न प्रकार से अपघटन होता है।
वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद यह पाया कि ई. कोलाई कोशिकाओं में एक गैलेक्टोसाइड (लेक्टोस) की आपूर्ती बन्द करने पर कोशिकाएँ β-गैलेक्टोसाइडेज एन्जाइम का निर्माण भी बंद कर देती है परन्तु इसकी आपूर्ति पुनः प्रारम्भ करने पर यह एन्जाइम पुनः उत्पन्न होकर 10,000 गुणा बढ़ जाता है।
प्रेरक एवं प्रेरण (Inducer and Induction)
ई. कोलाई के उदाहरण में जैसा कि हमने पढ़ा कि लेक्टोस β -गैलेक्टोसाइडेज नामक एन्जाइम की उत्पत्ति को प्रेरित करता है। लेक्टोस की उपस्थिति से एन्जाइम β -गैलेक्टोसाइडेज का निर्माण होने लगता है अतः ऐसे पदार्थों को जो एन्जाइम उत्पत्ति को प्रेरित करते है प्रेरक (inducer) तथा इस प्रक्रिया को प्रेरण (induction) कहते हैं। ऐसे एन्जाइम जो विशिष्ट पदार्थों की उपस्थिति द्वारा प्रेरित होते है प्रेरित एन्जाइम (indusable eæymes) कहलाते हैं।
सहदमनकर तथा दमन (Co-repressor and repression)
.ऐसे पदार्थ, जिनकी उपस्थिति द्वारा एन्जाइम का संश्लेषण रुक जाता है सहदमनकर (corepressor) कहलाते है। कुछ अमीनो अम्ल ऐसे होते हैं जिनकी आपूर्ति (supply) बाहर से न होने पर कोशिकाएँ इनके संश्लेषण के लिए जिम्मेदार सभी एन्जाइम का संश्लेषण शुरू कर देती है। परन्तु यदि इन्हीं की आपूर्ति (supply) बाहर से की जाती है जो यह संश्लेषण तुरन्त रुक जाता है। उदाहरणस्वरूप हिस्टीडीन नामक अमीनो अम्ल की आपूर्ति बाहर से करने पर इनका निर्माण करने वाले एन्जाइम की उत्पत्ति कम हो जाती है परन्तु अगर यह आपूर्ति रुक जाती है तो इनके संश्लेषण के लिए आवश्यक एन्जाइम पुनः बनने लगते हैं। यहाँ हिस्टीडीन सहदमनकर है क्योंकि इसको मिलाने से इसके संश्लेषण के लिए आवश्यक एन्जाइम की उत्पत्ति कम हो जाती है। प्रक्रिया, जिसमें सश्लेषण रुक जाता है, दमन (तमचतमेेपवद) कहलाता है।
ऑपरान मॉडल (The Operon Model)
ऑपरॉन मॉडल जैकब (Jacob) तथा मोनॉड (Monad) ने 1961 में प्रयुक्त किया। ई. कोलाई में उन्होंने प्रेरणीय तंत्र (Induced system) पर काम करते हुए एन्जाइम संश्लेषण पर विस्तारवपूर्वक अध्ययन किया। β-गैलेक्टोसाइडेज एन्जाइम के संश्लेषण के प्रेरण व दमन के लिए निम्न मॉडल प्रस्तुत किया।
संरचनात्मक जीन (Structural genes)- यह जीन, प्रोटीन के लिए कोड करते हैं। यह जीन कोशिकाओं को एन्जाइम उत्पन्न करके देते हैं अथवा रचनात्मक कार्य करते हैं। ई. कोलाई में लगभग 2500 जीन मौजूद रहते हैं जो 800 विभिन्न प्रकार के एन्जाइम उत्पन्न कर सकने की क्षमता रखते हैं। इनमें से कुछ लगातार उत्पन्न होते रहते है, जबकि कुछ एन्जाइम का निर्माण नियंत्रित रहता है। जीवाण की कोशिका में एक प्रणाली (mechanism) होती है जिससे इसके जीन्स में स्विच खुलता व बन्द होता रहता है। प्रोकेरियोटिक एन्जाइम निम्न तीन प्रकार के होते हैं। एक ऑपरॉन के समस्त रचनात्मक जीन्स एक समूह में रहकर इकट्ठे नियंत्रित (regulate) होते हैं। यह पॉलीसिस्ट्रोनिक अनुलेखन (transcription) के दौरान 5′ →3′ श्दिशा में अनुलेखित होकर (poly-cistronic mRNA बनाते हैं।
रेगुलेटर जीन (Regulator gene)- रचनात्मक जीन्स को नियंत्रित करने के लिए रेगुलेटर जीन की आवश्यकता होती है। यह दमन (repressor) नामक प्रोटीन उत्पन्न करते हैं जिसे श्पश् जीन कहते हैं जो ऑपरेटर जीन के पास स्थित होता है। यह जीन लेकऑपरान में सम-टेट्रामर होता है जिसमें चार पॉलीपेप्टाइड की एकमात्र श्रृंखलाएँ मौजूद रहती हैं। यह जीन ऑपरेटर साइट (operator site) के साथ जुड जाता है तब mRNA का संश्लेषण रुक जाता है। परन्त इसी समय प्रेरित लेक्टोस डालन समन अक्रियाशील होकर आपरेटर जीन से हट जाता है तब mRNA पुनः बनने लगता है।
आपरेटर साइट (Operator site)- यह साइट वो स्थल है जहाँ पर दमन (repressor) प्रोटीन जडता (bind) है। यह रचनात्मक जीन्स के बायीं तरफ मौजद रहती है। इस दमन बाइ साइट को “O” साइट कहते हैं। इस साइट पर प्रोटीन्स नहीं बनते हैं।
प्रेरित साइट (Promoter site)- यह साइट, ऑपरेटर साइट के आगे ही जुड़ी रहती है तथा इसके बायीं तरफ उपस्थित रहती है। यह साइट प्रोटीन नहीं बनाती है। ई. कोलाई में कई 100 प्रेरित साइट की अनुकम पर अध्ययन किया गया है तथा कई ज्ञात कर ली गयी है। विभिन्न प्रेरित साइट (promoters) जीन में दो छोटी समान अनुक्रम प्राप्त हुई है। प्रिबनोऊ (1975) ने इस जीन में तीन विस्थल रिपोर्ट किये हैं- (प) अभिज्ञान क्रम (regcognition site) (2) बन्धक क्रम (binding sequence) तथा (3) m-आरएनए प्रारम्भन स्थल (mRNA initiation site)।
अहेतुक प्रभाव (Constitutive strains)
यह पाया गया है कि उत्परिवर्तन (mutation) द्वारा रेगुलेटर जीन (प) में कुछ परिवर्तन आने से यह दमन के साथ नहीं जुड़ पाता। न जुड़ पाने से यह संश्लेषण को रोकने अथवा नियंत्रित करने में सफल नहीं हो पाता। इस तरह बराबर एन्जाइम का संश्लेषण होता रहता है। ऐसे प्रभेद (strains) जो लगातार एन्जाइम को संश्लेषित करते रहते हैं चाहे आवश्यकता हो अथवा नहीं, उन्हें अहेतुक प्रभव (consititutive strains) कहते हैं। यह कार्य वह स्वतंत्र रूप से लगातार कर पाते है क्योंकि जीव ष्प दमन के साथ नहीं जुड़ पाता। आपरेटर जीन में भी उत्परिवर्तन हो सकते हैं।
यह दो प्रकार के होते है
(1) रेगुलेटर अहेतुक (Regulater constitutive)
(2) ऑपरेटर अहेतुक (Operator constitutive).
प्रमोटर जीन (Promotergene)– यह आपरेटर जीन के बाईं तरफ स्थित रहता है यह माना गया है कि आरएनए पॉलीमरेज प्रमोटर साइट के साथ जुड़कर गति करती है। परन्तु दमनकर जब आपरेटर के साथ जुड़ता है तब आरएनए पॉलीमरेज की गति रुक जाती है। यहाँ पर तीन साइट स्थित रहती है।
(1) अपचयी जीन सक्रियक ध्सीजीए [Catabolic gene activator (Cga)]
(2) प्रारम्भिक बन्धनकारी स्थल ध्आईबीएस [Initial binding site (Ibs)]
(3) ऑपरेटर जीन ध्ओपी [Operator gene (OP)]
प्रमोटर जीव ही अनुलेखन प्रारम्भन की प्रक्रिया का स्थल है जो आपरेटर जीन के बाई तरफ स्थित होता है।
प्रोटीन्स (Proteins)-लेक्टोस ऑपरान के नियमन के दौरान निम्न प्रोटीन्स संलग्न होते हैं जो धनात्मक व ऋणात्मक नियन्त्रण के लिए जिम्मेदार होते हैं।
(1) धनात्मक नियंत्रण (Positive control) केटाबोलिक जीन प्रोटीन (Cga Proteins)-दमनकर आपरेटर साइट तथा ब्हं प्रोटीन (Cga) साइट के लिए बन्धनकारी है। प्रमोटर जीन ऑपरेटर जीन्स के बायीं ओर स्थित रहता है। जब दमनकर आरएनए पॉलीमरेज को आगे बढ़ने से ऑपरेटर के द्वारा रोकने में मदद करता है तथा इसकी गति को रोकता है। ब्हं प्रोटीन धानात्मक नियंत्रण करती है। Cga प्रोटीन तभी आरएनए पॉलीमरेज को जोड़ती है, जबकि साइक्लिक AMP अणु Cga प्रोटीन को क्रियाशील करते हैं।
इस तरह हम देखते हैं कि लेक ऑपेरान के अनुलेखन के दौरान आरएनए पालीमरेज प्रमोटर स्थल पर आता है तब वहीं से गति करके आगे जाता है परन्तु दमनकर जब ऑपरेटर से जडता है जब साइक्लिक AMP अणु, Cga प्रोटीन्स को क्रियाशील करके सक्रिय कर देता है। यह धनात्मक नियंत्रण कहलाता है।
(2) ऋणात्मक नियंत्रण (Negative control) लेक दमन- प्रेरक (inducer)- लेक दमनकर को अक्रियाशील बना देता है इसे ऋणात्मक नियंत्रण कहते हैं। आज तक श्ई. कोलाईश् तथा अन्य जीवाणुओं में डीएनए अनुक्रम तथा अनुलेखन प्रारम्भमन स्थल (site) पर कई ऑपरान पर काम हुआ है। .
ऑपरॉन के प्रमुख जीनों की अभिव्यक्ति का नियमन प्रोटीन संश्लेषण को रोकता है। – 10,-25 तथा -60 न्युक्लिाओटाइड युक्त आपॅरॉन प्रमुख होता है। इसमें किसी भी प्रकार का विलोपन (deletion) अथवा परिवर्तन मिलने पर प्रोटीन संश्लेषण भी प्रभावित होता है। – 10 पर प्रमुख अनुक्रम को प्रिननो बाक्स न एक महत्त्पूर्ण स्थल माना था। -60 क्षेत्र में Cga प्रोटीन का सक्रिय स्थल माना गया।
संश्लेषण के दौरान अन्तिम उत्पाद (product) के उपयोग में नहीं आने पर यह अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाता है। अतः अधिकता से इस पदार्थ का संश्लेषण रूक जाता हैं अतः किसी उत्पाद की अधिकता होने से उसके संश्लेषण का रूकना पुनर्भरण निरोध (Feed back Inhibition) कहलाता है।
अनलेखन समापन स्थल (Transcription Terminator Site)
अनलेखन का DNA में विशिष्ट अनुक्रम द्वारा सम्भव होता है। ज्यादातर प्रोकेरियोट के mRNA अनुक्रम 5UUUUUUA 3′ द्वारा समाप्त (terminate) होते हैं। इस कार्य को सम्पदित करने के लिये रो श्तीवश् प्रोटीन अनुलेखन टमिर्नल (terminal) सिग्लन पर उपस्थित रहता है।
प्ररेक ऑपरॉन तंत्र में स्वतंत्र दमनकर ऑपरेटर के साथ संलग्न होकर डीएनए के अनुलेखन को बन्द कर देता है। इस प्रकार ऑपरेटर डीएनए का विशिष्ट अनुक्रम होता है जो दमनकर के साथ जुड़ जाता है। जब प्रेरिक मौजूद रहता है तब यह दमनकर के साथ जुड़ जाता है और दमनकर को हटा देता है। इस तरह से दमनकर प्रेरक काम्पलेक्स (complex)ऑपरेटर के साथ नहीं बंध सकता तथा इस तरह प्रेरक ऑपरान के रचनात्मक जीन के अनुलेख को प्रेरित करता है। यही रचनात्मक जीन एन्जाइम बनने के लिए जिम्मेदार होते हैं। दमनकारी आपॅरान तंत्र की अवस्था में स्वतंत्र दमनकर ऑपरेटर के साथ नहीं जुड़ता है परन्तु सहदमन जटिल (co-repressor complex) ऑपरेटर के साथ जुड़कर रचनात्मक जीन के अनुलेखन का स्विच बंद कर देता है। इस तरह सहदमन की उपस्थिति दमनकारी ऑपरॉन के रचनात्मक जीन का अनुलेखन का स्विच बंद तथा इसकी उपस्थिति में पुनः खोल देती है।
सक्रिय दमनकर = असक्रिय दमनकर ़ सहदमनकर
(active repressor = inactive repressor ़ co-repressor)
असक्रिय दमनकर = सक्रिय दमनकर ़ प्रेरक ।
(inactive repressor = active repressor ़ inducer)
जैकब व मोनाड ने जो ई. कोलाई को लेकर ऑपरान मॉडल प्रस्तुत किया था वह जीवाणुओं के विभिन्न उत्परिवर्तक (mutants) तथा मीरोजाइगोट (merozygotes) पर आधारित था। मीरोजाइगोट में आधा द्विगुणित (half diploid) बेक्टीरिया होता है जो fHr strain लेकर तैयार किए गए। इनमें प्रभावी व अप्रभावी तथा उत्परिवर्तक (dominant recessive mutant) जीन को ज्ञात करने की सुविधा रहती है। आज का लेक ऑपरॉन में निम्नलिखित स्थान होते हैं–
(1) प्रमोटर
(2) एक आपरेटर
(3) तीन रचनात्मक जीन निम्नलिखित एन्जाइम संश्लेषित करते हैं।
(प) x एन्जाइम β- गेलेक्टोसाइडेज
(पप) y एन्जाइम परमिएज
(पपप) ं एन्जाइम ट्रांस एसीटाइलेज
गेलेक्टोसाइडेज लेक्टोस को ग्लूकोज एवं गेलेक्टोज तथा लेक्टो परमिएज लेक्टोज को जीवाणु में पंप करता है। ट्रांसएसीटाइलेज का कार्य अज्ञात है।
जीन नियमन प्रोटीन (Regulatory Gene Protein)
लेक रेगूलेटरी जीन दमनकारी प्रोटीन बनाते है। यह जीन 360 अमीनो अम्ल की पॉलीपेप्टाइड चेन बनाते है। ऐसी चार पॉलीपेप्टाइड शृंखलाएँ कुण्डलित या मुड़कर (fold) लेक ऑपरान प्रोटीन का निर्माण कती है। अतः यह टेट्रामर प्रोटीन होता है जिस पर 2 भिन्न-भिन्न बन्धनकारी स्थल मौजद रहते है। इसका एक सिरा प्रेरक अणु की पहचान करता है तथा दूसरा स्थल डीएनए पर मौजूद लेक ऑपरान की अनुक्रम (Lac operon sequenes on the DNA) की पहचान करता है।