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शिशु मृत्यु दर क्या होती है | भारत में शिशु मृत्यु दर किसे कहते है परिभाषा infant mortality rate in hindi meaning
infant mortality rate in hindi meaning definition शिशु मृत्यु दर क्या होती है | भारत में शिशु मृत्यु दर किसे कहते है परिभाषा ?
शिशु मृत्यु दर
शिशु मृत्यु दर बच्चों के स्वास्थ्य व विकास का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। शिशु मृत्यु दर का अर्थ है कि एक निश्चित वर्ष में, प्रति 1000 जीवित जन्में शिशुओं में एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु संख्या कितनी है। 1947 में 1000 जीवित जन्में शिशुओं में यह संख्या 160 थी जो एक वर्ष की आयु पूरे नहीं कर पाए थे। 1986 में यह संख्या गिरकर 96.4 रह गई। शिशु मृत्यु के मुख्य कारण शैशवावस्था की कुछ विशिष्ट बीमारियाँ हैं, जैसे समयपूर्व प्रसव, श्वसन संक्रमण व दस्त आदि। खाँसी, बुखार और पाचन संबंधी विकार भी बाल मृत्यु के महत्त्वपूर्ण कारण हैं। सन् 2000 में भारत में शिशु मृत्यु दर मात्र 69 थी। भले ही शिशु मृत्यु दर में कमी हुई है, यह विश्व में विकसित देशों की तुलना में अपेक्षाकृत काफी अधिक है (विस्तृत ब्यौरों के लिए मानव विकास रिपोर्ट, 2003 देखें)।
बच्चों की अस्वस्थता और मृत्यु के छरू सर्वाधिक सामान्य कारण हैं- टी.बी. अथवा तपेदिक, टिटनस, काली खाँसी, डिप्थीरिया, पोलियो और खसरा, ये बीमारियाँ प्रतिरक्षीकरण द्वारा रोकी जा सकती हैं। भारत सरकार ने सर्वव्यापक प्रतिरक्षण कार्यक्रम (यू. आई. पी.) शुरू किया है और यह आशा की जाती है कि सन् 2000 ई. तक सभी बच्चे पूरी तरह से प्रतिरक्षित हो जाएंगे।
शिशु मृत्यु दर और जन्म दर में धीरे-धीरे कमी होने से जन्म के समय जीवित रहने की आशा बढ़ गई है। अनुमान है कि 1986 से 1991 के दौरान जन्म के समय जीवन प्रत्याशा पुरुषों में 58.1 वर्ष और स्त्रियों के लिए 59.1 वर्ष रही। 2000 ई. तक स्त्री व पुरुष दोनों के लिए 64 वर्ष की आयु का लक्ष्य निर्धारित किया गया और उस वर्ष तक औसत भारतीयों की जन्म के समय औसत जीवन-प्रत्याशा बढ़कर 63.3 वर्ष हो गई। पुरुषों के लिए यह 59.9 वर्ष है जबकि महिला के लिए यह 64.7 वर्ष (यू एन ओ यू. 2003)।
बोध प्रश्न 1
1) भारत में शिशु और बाल मृत्यु के मुख्य कारण क्या हैं? लगभग सात पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
2) अनाथ बच्चों के पुनर्वास के लिए भारत में क्या उपाए किए जा रहे हैं? लगभग दस पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
3) निम्नलिखित में से प्रत्येक का एक पंक्ति में उत्तर दीजिए रू
क) बाल श्रम की प्रतीकात्मक व्याख्या किसने की है?
ख) आज भारत में बच्चों की जनसंख्या कितनी है?
बोध प्रश्न 1 उत्तर
1) शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण हैं-समयपूर्व, जन्म, श्वसन संबंधी संक्रमण, अतिसार, खांसी, बुखार तथा पाचक गड़बड़ियाँ। बाल मृत्यु के प्रमुख कारण हैं-तपेदिक, टिटनेस, काली खाँसी, डिप्थीरिया, पोलियो, मेरुरज्जु तथा खसरा।
2. अनाथ बच्चों का पुनर्वास करने के लिए सरकार ने एक कार्यक्रम प्रारंभ किया है जिसे जरूरतमंद बच्चों के लिए देखभाल तथा सुरक्षा योजना का नाम दिया गया। योजना के अंतर्गत स्वैच्छिक संस्थाओं को बालगृह चलाने के लिए सहायता अनुदान दिया जाता है जहाँ 18 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल, सुरक्षा, साधारण शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण आदि दिया जाता है। इसके अलावा पालन-पोषण संरक्षण देने का प्रावधान भी किया गया है जिसके अनुसार बच्चे को किसी निश्चित समय तक किसी परिवार में रखा जाता है जो बच्चे को एक उपयुक्त घर जैसा वातावरण प्रदान करने की सहमति देता है।
3. क) अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन/आई.एल.ओ.
ख) 1991 में भारत में बच्चों की संख्या (एक करोड़ 12.8 लाख) थी।
ग) 1981 में प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 938 थी।
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