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NPN और PNP ट्रांजिस्टर की पहचान करना कैसे करते हैं ? how to identify npn and pnp transistor in hindi
how to identify npn and pnp transistor in hindi NPN और PNP ट्रांजिस्टर की पहचान करना कैसे करते हैं ?
क्रियाकलाप-3
[Activity] 3,
उद्देश्य (object) – बहुमापी (मल्टीमीटर) का उपयोग (i) ट्रांजिस्टर का आधार पहचानने में करना, (ii) NPN और PNP ट्रांजिस्टर की पहचान करने में करना, (iii) एक डायोड और एक LED में एकादिशीय विद्युत धारा की जाँच करने में तथा (iv)दिए गए इलेक्ट्रानिक अवयव (जैसे डायोड, ट्रांजिस्टर अथवा प्ब्) के सही होने की जाँच करने में करना।
उपकरण (Apparatus) – मल्टीमीटर, PNP या NPN ट्रांजिस्टर, डायोड व LED , सम्बन्धन तार।
सिद्धान्त (Theory) –
(i) ट्रांजिस्टर का आधार पहचानना – ट्रांजिस्टर तीन टर्मिनल वाली युक्ति है। ये तीन टर्मिनल उत्सर्जक (emitter), आधार (base) तथा संग्राहक (collector) होते हैं। ये तीनों टर्मिनल एक-दूसरे से समान दूरी पर नहीं होते हैं, बल्कि चित्र 12.9 की भाँति दो टर्मिनल 1 व 2 पास-पास तथा तीसरा टर्मिनल 3, शेष दोनों टर्मिनलों से दूर होता है। यह टर्मिनल 3. ही संग्राहक टर्मिनल (C) होता है।
P-N अथवा N-P सन्धि केवल अग्र अभिनति में ही अपने में से धारा प्रवाहित करती है, पश्च अभिनति में कोई धारा प्रवाहित नहीं करती है, अतः आधार टर्मिनल की पहचान करने के लिए संग्राहक टर्मिनल (3) तथा शेष बचे दोनों टर्मिनलों में किसी एक टर्मिनल (माना 2) के बीच पहले एक दिशा में तथा फिर विपरीत दिशा में धारा भेजते हैं। यदि एक दिशा में उससे होकर धारा प्रवाहित हो जाती है तथा विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित नहीं होती है तो यह टर्मिनल आधार (B) होत यदि दोनों दिशाओं में उससे होकर धारा प्रवाहित नहीं हो पाती है तो शेष बचा तीसरा टर्मिनल (1) आधार (B) होता है। इसका परीक्षण पुनः टर्मिनल (1) व (3) के बीच पहले एक दिशा में तथा फिर विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित की जा सकती है।
(ii) NPN और PNP ट्रांजिस्टर की पहचान करना – P-N अथवा N-P संधि केवल अग्र अभिनति में ही अपने में से होकर धारा प्रवाहित करती है, अतः दिये गये ट्रांजिस्टर की उत्सर्जक आधार सन्धि में पहले एक दिशा में तथा फिर विपरीत दिशा में धारा भेजते हैं। जब यह सन्धि धारा प्रवाहित होने देती है तो बैटरी के धनात्मक सिरे से जुड़ा सिरा P व ऋणात्मक सिरे से जुड़ा सिरा छ होगा। यदि उत्सर्जक P प्रकार है तो ट्रांजिस्टर PNP होगा और यदि उत्सर्जक N प्रकार है तो ट्रांजिस्टर NPN होगा। इसी प्रकार, संग्राहक आधार संधि के P व N सिरे की पहचान कर लेते हैं।
(iii) डायोड तथा EED में एकदिशीय धारा की जाँच करना – डायोड तथा LED दोनों ही केवल अग्र आमनात सपने में से होकर धारा को गुजरने देते हैं। अतः इनमें भी पहले एक दिशा में तथा फिर विपरीत दिशा में धारा हैं। ये केवल एक दिशा में ही अपने में से होकर धारा गुजारते हैं।
विधि (Method) – सर्वप्रथम मल्टीमीटर को प्रतिरोध मापन के लिए (अर्थात ओहा मीटर की भांति) उपयोग e है। इसका विद्युत परिपथ चित्र 12.10 में प्रदर्शित है जिसमें E मल्टीमीटर की आन्तरिक बैटरी है जिसका धनात्मक सिरा मल्टीमीटर पर अंकित – सिरे B से तथा ऋणात्मक सिरा मल्टीमीटर पर अंकित ़ सिरे A से जुड़ा होता है।
(i) ट्रांजिस्टर का आधार पहचानना –
1. दिये गये ट्रांजिस्टर के तीनों टर्मिनलों में से सबसे दर वाले टर्मिनल (माना 3) को संग्राहक टर्मिनल आकर कर लेते हैं।
चित्र 12.10: मल्टीमीटर का प्रतिरोध मापन के लिए विद्युत परिपथ या ओम मीटर
2. अब चित्र 12.11 की भाँति संग्राहक टर्मिनल 3 को सिरे B से जोड़ते हैं तथा टर्मिनल 1 को सिरे । से जोड़ते हैं तथा मल्टीमीटर में विक्षेप देखते हैं।
अब A व B सिरों पर जुड़े टर्मिनलों को आपस में बदल देते हैं तथा पुनः मल्टीमीटर में विक्षेप देखते हैं। यदि दोनों बार मल्टीमीटर में विक्षेप नहीं आता है तो ट्रांजिस्टर का टर्मिनल (1) उत्सर्जक होगा।
3. तत्पश्चात् ट्रांजिस्टर के टर्मिनल 2 व 3 को मल्टीमीटर के A व B सिरों से आपस में जोड़ते हैं तथा मल्टीमीटर में विक्षेप देखते हैं। फिर A व B सिरों से जुड़े टर्मिनलों को आपस में बदल देते हैं। तथा पुनः मल्टीमीटर में विक्षेप देखते हैं। .
यदि एक बार मल्टीमीटर में विक्षेप आता है तथा दूसरी बार विक्षेप नहीं आता है तो ट्रांजिस्टर का टर्मिनल (2) आधार होगा। इस प्रकार ट्रांजिस्टर का टर्मिनल 1 उत्सर्जक, टर्मिनल 2 आधार तथा टर्मिनल संग्राहक है।
(ii) NPN और PNP ट्रांजिस्टर की पहचान करना –
1.दिये गये ट्रांजिस्टर के उत्सर्जक व आधार टर्मिनलों को मल्टीमीटर के A व B सिरों के बीच जोड़ते हैं तथा मल्टीमीटर में विक्षेप देखते हैं। फिर A व B सिरों से जुड़े टर्मिनलों को आपस में बदल देते हैं तथा पुनः मल्टीभीटर में विक्षेप देखते हैं। हम पायेंगे कि एक बार मल्टीमीटर में विक्षेप आयेगा। जब मल्टीमीटर में विक्षेप आये तो मल्टीमीटर के सिरे B से जुड़ा टर्मिनल P तथा सिरे A से जुड़ा टर्मिनल N होगा।
यदि उत्सर्जक P प्रकार का है तो ट्रांजिस्टर PNP होगा और यदि उत्सर्जक N प्रकार का है तो टांजिस्टर NPN होगा।
2.अब पुनः परीक्षण करने के लिए उपरोक्त चरण को ट्रांजिस्टर के आधार व संग्राहक टर्मिनलों को मल्टीमीटर के A व B सिरों के बीच जोड़कर दोहराते हैं।
अब यदि संग्राहक p प्रकार है तो निश्चय ही ट्रांजिस्टर PNP होगा तथा यदि सग्राहक N प्रकार का है तो ट्रांजिस्टर छच्छ होगा।
(iii) डायोड अथवा LED में एकदिशीय धारा की जाँच करना
1.चित्र 12.12 की भाँति दिये गये डायोड या LED के P सिरे को मल्टीमीटर के – अंकित सिरे B से तथा N सिरे को ़ अंकित सिरे से जोड़ते हैं। हम पाते है कि मल्टीमीटर के विक्षेप प्राप्त होता है। इस स्थिति में डायोड या LED अग्र अभिनति में होता है।
2.तत्पश्चात् मल्टीमीटर के A व B सिरों पर जुड़े टर्मिनलों P व N को आपस में बदल देते हैं। हम पाने हैं कि मल्टीमीटर में कोई विक्षेप नहीं आता है क्योंकि इस स्थिति में डायोड या LED पश्च अभिनति में होता है।
(iv) इलेक्ट्रॉनिक अवयवों के सही होने की जांच करना
(A) डायोड की जांच – मल्टीमीटर को धारा मापन (50 mA) के लिए समंजित कर इसकी दोनों लीड़ों को डायोड के दोनों सिरों पर बारी-बारी से सिरे बदलकर लगाते हैं यदि एक स्थिति में धारा प्रवाहित हो जाए तथा दूसरी स्थिति में धारा प्रवाहित न हो तो डायोड सही है अन्यथा डायोड सही नहीं है।
(B) ट्रांजिस्टर की जांच – यदि मल्टीमीटर की उभयनिष्ठ लीड (काली लीड) को आधार से जोड़कर, दूसरी लीड (लाल लीड) को बारी-बारी से उत्सर्जक एवं संग्राहक से जोड़ने पर एक स्थिति में धारा चालन हो जबकि दूसरी स्थिति में धारा चालन न हो तो ट्रांजिस्टर सही है अन्यथा यह सही नहीं है।
(C) IC की जांच – IC में अनेकों इलेक्ट्रॉनिक अवयव होते है अतः IC के नम्बर के आधार पर IC -मैन्युअल में देखकर इसके प्रत्येक अवयव की पृथक-पृथक जांच करते हैं।
सावधानियाँ (Precautions) –
1.ध्यान रहे कि मल्टीमीटर को प्रतिरोध नापने के लिए प्रयुक्त करते समय इस पर ़ अंकित सिरा बैटरी के ऋणात्मक सिरे की भाँति तथा – अंकित सिरा बैटरी के धनात्मक सिरे की भाँति कार्य करता है।
2.मल्टीमीटर की प्रतिरोध परास न्यूनतम रखनी चाहिए।
3.प्रत्येक बार A व B सिरों के जोड़ने से पूर्व शून्य समंजन कर लेना चाहिए।
मौखिक प्रश्न व उत्तर (Viva Voce)
प्रश्न 1. ट्रांजिस्टर किसे कहते हैं?
उत्तर- यह P व N प्रकार के सिलिकॉन (या जर्मेनियम) अर्द्धचालक से बनी एक छोटी युक्ति है जिसमें तीन टर्मिनल उत्सर्जक, आधार तथा संग्राहक होते हैं।
प्रश्न 2. आप ट्रांजिस्टर को देखकर किस प्रकार पहचानते हो कि कौन-सा टर्मिनल संग्राहक है?
उत्तर- संग्राहक के पास लाल डॉट बना होता है अथवा संग्राहक वाला टर्मिनल, अन्य दोनों टर्मिनलों की अपेक्षा कुछ दूर होता है।
प्रश्न 3. ट्रांजिस्टर कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर- ट्रांजिस्टर दो प्रकार के होते हैं- (i) PNP प्रकार का तथा (ii) NPN प्रकार का।
प्रश्न 4. PNP तथा NPN प्रकार के ट्रांजिस्टर में क्या अन्तर है?
उत्तर- PNP प्रकार के ट्रांजिस्टर में उत्सर्जक P प्रकार का, आधार N प्रकार का तथा संग्राहक P प्रकार का होता है। NPN प्रकार के ट्रांजिस्टर में उत्सर्जक N प्रकार का, आधार P प्रकार का तथा संग्राहक N प्रकार का होता है।
प्रश्न 5. ट्रांजिस्टर का आधार आप कैसे पहचानते हो?
उत्तर- ट्रांजिस्टर के संग्राहक टर्मिनल व अन्य जिस टर्मिनल के बीच एक दिशा में धारा भेजने पर उसमें होकर धारा प्रवाहित हो जाये तथा विपरीत दिशा में धारा भेजने पर उसमें से धारा प्रवाहित नहीं हो, वह टर्मिनल आधार होता है।
प्रश्न 6. आप कैसे पहचान करोगे कि दिया गया ट्रांजिस्टर PNP है अथवा NPN ?
उत्तर- उत्सर्जक-आधार (अथवा आधार-संग्राहक) सन्धि में धारा भेजने पर जब उसमें से धारा प्रवाहित हो जाती है तो वह सन्धि अग्र अभिनति में होती हैं अर्थात बैटरी के धनात्मक सिरे से जुड़ा टर्मिनल च् व ऋणात्मक सिरे से जुड़ा टर्मिनल N होता है। अब यदि उत्सर्जक (या संग्राहक) P प्रकार का होता है तो ट्रांजिस्टर PNP प्रकार का होता है तथा यदि उत्सर्जक (या संग्राहक) N प्रकार का होता है तो ट्रांजिस्टर NPN प्रकार का होता है।
प्रश्न 7. आप कैसे पहचानते हो कि डायोड अथवा LED केवल एक दिशा में धारा प्रवाहित करते हैं?
उत्तर- डायोड अथवा LED को अग्र अभिनति में रखकर (अर्थात् इसके P सिरे को धनात्मक विभव पर तथा N सिरे को ऋणात्मक विभव पर रखकर) हम देखते हैं कि इससे होकर धारा बहती है। इसके विपरीत, डायोड अथवा LED को पश्च अभिनति में रखकर (अर्थात् P सिरे को ऋणात्मक विभव पर तथा N सिरे को धनात्मक विभव पर रखकर) हम देखते हैं कि इससे होकर कोई धारा नहीं बहती है।
प्रश्न 8. क्या ट्रांजिस्टर को 220 वोल्ट डी.सी. के साथ उपयोग में लाया जा सकता है?
उत्तर- नहीं। जब पश्च अभिनति में सन्धि पर वोल्टेज, उस सन्धि पर भंजन वोल्टेज को पार कर जाता है तो ट्रांजिस्टर खराब हो जाता है।
प्रश्न 9. कैसे पहचानोगे कि दिया हुआ ट्रांजिस्टर सही है अथवा खराब हो गया है?
उत्तर- ट्रांजिस्टर की प्रत्येक सन्धि को एक बार अग्र अभिनति में तथा फिर पश्च अभिनति में रखकर उसका प्रतिरोध I नापते हैं। यदि
पश्च अभिनति में प्रतिरोध, अग्र अभिनति की अपेक्षा बहुत अधिक होता है तो ट्रांजिस्टर सही है, अन्यथा वह खराब हो चुका है।
प्रश्न 10. आपके प्रयोग में मल्टीमीटर का क्या उपयोग है?
उत्तर- मल्टीमीटर द्वारा यह जाँच करते हैं कि P-N सन्धि से होकर धारा बहती है अथवा नहीं?
प्रश्न 11. आप अपने प्रयोग में मल्टीमीटर को किस प्रकार उपयोग में लाते हो?
उत्तर- प्रतिरोध मापन के लिए।
प्रश्न 12. आप अपने प्रयोग में क्या प्रमुख सावधानी लेते हो?
उत्तर- मल्टीमीटर पर ़अंकित सिरे को बैटरी के ऋणात्मक सिरे की भाँति तथा – अंकित सिरे को बैटरी के धनात्मक सिरे की भाँति माना जाता है।
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