हिंदी माध्यम नोट्स
भाषा का इतिहास और विकास क्या है | भारत में भाषा के इतिहास किसे कहते है history and development of language
history and development of language in hindi भाषा का इतिहास और विकास क्या है | भारत में भाषा के इतिहास किसे कहते है ?
भारत में भाषा का इतिहास
भारतीय जनजातियों का अध्ययन करने वाले नृवैज्ञानिक मानते हैं कि भारत के मूल बासी ऑस्टो-ऐशियाई मूल के हैं जिनका संबंध उपकुल मुडा से है। इनकी भाषाएं मोन-खमेर भाषा, विशेषकर वियतनामी भाषा से जुड़ी हैं, छोटा नागपुर से लेकर उत्तर पूर्व में हिन्द-चीन तक फैली हुई हैं। हिंद-यूरोपीय भाषाएं बोलने वाले आर्यों का भारत में आगमन 1500 ईसा पूर्व पश्चिमोत्तर दिशा से हुआ था। वैदिक काल (लगभग 1500-500 ईसा पूर्व) के आने तक उत्तरी भारत के अधिकांश भागों में संस्कृत बोली जाती थी। भारत पर मुस्लिम आक्रमण होने से पहले संस्कृत यहां कि आम भाषा बन गई थी जो अलग-अलग रूपों में बोली जाती थी। विभिन्न प्रकार के मध्य हिंद-आर्य भाषाओं के सबसे पुराने स्वरूपों, जिन्हें हम प्राकृत कहते हैं, का विकास इसी काल में हुआ। भाषाविदों का मानना है कि संस्कृत और ये सभी हिन्द आर्य प्राकृत भाषाएं उत्तरी भारत से लेकर दक्षिणी पठार तक बोली जाती थीं। द्रविड़ भाषाएं दक्षिणी पठार से नीचे दक्षिण भारत में बोली जाती थीं। भाषा इतिहासकार अक्सर हिन्द-आर्य उत्तरी भारत और द्रविड़ दक्षिण भारत के बीच एक गहरी खाई की बात करते हैं। अपनी विस्तृत सांस्कृतिक विरासत के फलस्वरूप भारत की भाषायी परंपरा समृद्ध हुई है। प्रमाणों के अनुसार तमिल में साहित्यिक उत्कृष्टता ईसा पूर्व दूसरी सदी और कन्नड़ में चैथी सदी-मलयालम में 10वीं सदी और तेलुगु में सातवीं सदी से चली आ रही है। यहां ध्यान देने की एक रोचक बात यह है कि अंग्रेजी और जर्मन भाषा में लिखित दस्तावेजों के प्रमाण पांचवीं सदी से मिलते हैं। बौद्ध-धर्म की सबसे प्राचीन वंदना कार्यपद की रचना 1000 और 1200 ईसवी के बीच बंगाली, असमी और उड़िया भाषाओं में की गई थी।
भारत में मुस्लिम शासन का आरंभ होने से पहले संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं ही राजकाज की भाषा थीं जिसके बाद इनकी जगह विशेषकर उत्तरी भारत में फारसी ने ले ली। राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहने के बावजूद भी भारत की समृद्ध भाषायी विरासत भावनात्मक और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में जीवंत रहीं।
बॉक्स 12.01
शासन में उच्च पदों की आकांक्षा रखने वाले लोगों ने फारसी भाषा और फिर उसके परिवर्तित स्वरूप उर्दू को सीखा। राष्ट्रवादियों ने अपनी राष्ट्रवादी और देशभक्ति की जरूरतों के अनुरूप क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में समृद्ध साहित्य का सृजन किया। मौखिक पंरपरा ही प्रत्येक जातीय समूह के लिए अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषायी विरासत की रक्षा करने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गई। प्राच्य भाषाविद स्वीकार करते हैं कि भारत की मूल भाषाओं में जो साहित्य उपलब्ध है वह अंग्रेजी भाषा में सृजित साहित्य से कहीं ज्यादा समृद्ध है हालांकि दुनिया में बोल-बाला अंग्रेजी साहित्य का ही है। अंग्रेजी भाषा ने भारतीय सांस्कृतिक ताने-बाने में आधुनिकीकरण और सशक्तीकरण का वाहन बनकर प्रवेश किया। मगर स्वतंत्रता के पश्चात इसे शक्तिशाली और धनाढ्यों की भाषा के रूप में पेश किया गया। भाषायी दंगों के आंरभिक दौर में इसे स्वाभाविक स्वीकृति भी मिल गई।
भाषा और आधुनिकीकरण
एक राष्ट्र-राज्य के रूप में भारत को अपने शुरुआती दौर में इस जटिल समस्या से जुझना पड़ा था कि वह शासन चलाने के लिए ऐसी कौन सी आम भाषा चुने जिससे अन्य भाषाओं की निजी, महत्ता, उनकी प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंचे। भारतीय संविधान ने 1950 में हिंदी को देश की राजकीय भाषा का दर्जा दिया, उधर अंग्रेजी सरकारी अकादमी और व्यापारिक कामकाज की भाषा बनी रही। संविधान में अंग्रेजी को सरकारी प्रयोजनों के लिए संघ की भाषा के रूप में बने रहने के लिए 15 वर्ष का समय दिया गया। मगर अंग्रेजी को जनमानस आधुनिकीरण और वैश्विक भागीदारी का एक सशक्त माध्यम के रूप में देखा। यही कारण है कि जबर्दस्त भाषायी जातीयतावादी लोग भी अपनी भाषायी जातीयता के प्रति कोई पुर्वाग्रह रखे बिना अंग्रेजी की लोकप्रियता और उसके चलन के कायल हैं। मगर वहीं द्रविड़ भारतवासी विशेषकर तमिल भाषी लोग हिंदी विरोधी थे। भारतीय राष्ट्र राज्य ने जब हिंदी को भारतीय राष्ट्रवाद और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में परिभाषित करने का प्रयत्न किया तो इसने जन विद्रोह को भड़का दिया। आर.एन.श्रीवास्तव के अनुसार, दक्षिणी राज्यों में पहले द्रविड़ कड़गम और फिर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) कटटर और ऊर्जावान धर्म-विरोधी भावनाओं के उफान की एक कडी मात्र थे। इस आंदोलन के सूत्रधार ई.वी. रामास्वामी नैकर थे जिन्हें बाद में पेरियार के नाम से पुकारा जाने लगा। उन्होंने 1925 में “आत्मसम्मान आंदोलन‘‘ की शुरुआत की। 1938 में उन्होंने हिन्दी विरोधी आंदोलन छेड़ा जिसके दौरान जस्टिस पार्टी इनके आत्मसम्मान आंदोलन से जुड़ गई। इसके बाद 1944 में दोनों ने मिलकर द्रविड़ कड़गम की स्थापना की, जिसने हिंदी विरोधी और ब्राह्मण विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया। द्रविड़ कड़गम ने 25 दिसंबर 1974 को रावण लीला का आयोजन किया जिसमें राम, लक्ष्मण और सीता के पुतले पुंके गए। इससे पहले वर्ष 1956 में तेलुगु अकादमी ने मद्रास में एक भाषा सम्मेलन बुलाया जिसमें दक्षिण में हिंदी थोपने पर बड़ा जबर्दस्त विरोध प्रकट किया गया। फिर 1958 में राजागोपालाचारी के नेतृत्व में एक अखिल भारतीय भाषा सम्मेलन बुलाया गया। इस सम्मेलन में फ्रैंक एंथनी ने घोषणा कीः “आज हिन्दी सांप्रदायिकता का प्रतीक है, यह धर्म का प्रतीक है, यह भाषा अतिवादिता है और सबसे बढ़कर यह अलसंख्यक भाषाओं के दमन का प्रतीक है।‘‘ वहीं राजागोपालाचारी ने भी इस सम्मेलन में कहाः ‘‘हिन्दी गैर-हिन्दी भाषियों के लिए उतनी ही पराई भाषा है जितनी पराई अंग्रेजी भाषा हिन्दी के पैरोकारों के लिए है।‘‘ इस हिन्दी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करते हुए डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) ने 17 जनवरी 1965 को मद्रास में एक हिन्दी-विरोधी सम्मेलन बुलाया। इस सम्मेलन में 26 जनवरी 1965 को शोक दिवस मनाने की घोषण की। इसके बाद आंदोलन उग्र और हिंसक हो गया जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने तमिलनाडु स्टुडेंट्स ऐंटी-हिन्दी एजीटेशन काउंसिल (तमिलनाडु छात्र हिन्दी-विरोधी आंदोलन परिषद्) का गठन किया, जिसके आहान पर मद्रास कॉलेज के पचास हजार से अधिक छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस प्रकार समूचे दक्षिण भारत में हिन्दी-विरोधी प्रदर्शन हुए। इसी दौरान दो छात्रों ने आत्मदाह कर लिया जिससे आंदोलन हिंसक और उग्र हो गया जिनमें 70 लोग मारे गए। इसके फलस्वरूप भारत सरकार ने 1967 में राजकीय भाषा संशोधन अधिनियम संसद में पारित कराया। यह अधिनियम द्विभाषा सिद्धांत पर आधारित है जिसके अनुसार राज्यों को सरकारी काम-काज अंग्रेजी या हिन्दी में चलाने की छूट है। जैसेः (क) प्रस्ताव, सामान्य आदेश नियम, अधिसूचना इत्यादि (ख) प्रशासनिक और अन्य रिपोर्टों और (ग) अनुबंध समझौतों, लाइसेंस, निविदा प्रपत्रों इत्यादि में दोनों में से कोई भी भाषा प्रयोग की जा सकती है। इसी अधिनियम के तहत हिन्दी में
प्रदत्त सामग्री को अंग्रेजी में अनुवाद करने का प्रावधान भी किया गया।
अभ्यास 1
भाषा का मुद्दा आखिर इस तरह की भावनाओं को क्यों भड़काता है। अपने ऐसे सहपाठियों और मित्रों से इस विषय पर चर्चा कीजिए जो अलग-अलग भाषाएं बोलते हों और फिर इस चर्चा में आपको जो जानकारी मिलती है उसे अपनी नोटबुक में लिख लीजिए।
राज्यों का पुनर्गठन
स्वतंत्र भारत में भाषायी बंधुता के सिद्धांत पर राज्यों का जो पुनर्गठन हुआ उसने विशाल क्षेत्रीय प्रांतों को टुकड़ों में बांट दिया। मद्रास और मध्य प्रांत इसके उदाहरण हैं। इसी पैर्टन पर छोटे-छोटे राज्यों को जोड़कर एक किया गया, जैसे मध्य भारत, पटियाला और पूर्वी पंजाब को जोड़ा गया। मगर इस प्रक्रिया ने नवोदित प्रजातंत्र के विभिन्न अंचलों में भाषाई विद्वेष और तनाव को भी जन्म दिया। भाषाई राष्ट्रीयता की मांग के चलते ही बंबई का विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात में हुआ, पंजाब का हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में हुआ।
आंचलिक और भाषाई एकता के चलते ही क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का उदय हुआ। डीएमके, तेलुगुदेशम, अकाली दल, असम गण परिषद, महाराष्ट्रवादी गोमांतक दल, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट, झारखंड मुक्ति मोर्चा इत्यादि सभी दल प्रांतीय जातीय-भाषाई राष्ट्रीयताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की अभिव्यक्ति हैं। भाषाई राष्ट्रीयता के अंतरराष्ट्रीय पहलू बारंबार यही बताते हैं कि भारत ने भाषाई विविधता के मुद्दों को सफलतापूर्व सुलझा लिया है। मगर ऐतिहासिक प्ररिप्रेक्ष्य में गहराई से विश्लेषण करने से पता चलता है कि अगर अतीत में ये भाषाई आंदोलन हिंसक और उग्र थे तो कुछ क्षेत्रों में आज भी इसकी प्रबल अंतरधाराएं विद्यमान हैं।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…