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Categories: Biology

C4 चक्र / Hatch and slack pathway , CAM चक्र (crassulacean metabolism acid) in hindi

C4 चक्र / Hatch and slack pathway : ऐसे पादप जिनमे कार्बन डाई ऑक्साइड का अवशोषण एक चार कार्बन वाले स्थायी यौगिक के द्वारा किया जाए , C4 पादप कहलाते है तथा ऐसे अवशोषित कार्बन डाई ऑक्साइड से ग्लूकोज के निर्माण की क्रिया को C4 चक्र के नाम से जानी जाती है।

C4 चक्र को सर्वप्रथम मक्का में सन 1960 में केपरीलोव नामक वैज्ञानिक के द्वारा खोजा गया।

इस वैज्ञानिक के द्वारा यह पता लगाया गया कि अवशोषित कार्बन डाइ ऑक्साइड को तीन कार्बन वाले स्थायी यौगिक PGA के द्वारा ग्रहण न करके चार कार्बन वाले स्थायी यौगिक ओक्सेलो एसिटिक अम्ल के द्वारा ग्रहण किया जाता है।

समान क्रिया का अध्ययन अन्य वैज्ञानिक कोर्ट चाक के द्वारा गन्ने की पत्तियों में सन 1965 को देखा गया।

सम्पूर्ण C4 चक्र का अध्ययन सन 1966में हैच और स्लैक नाम वैज्ञानिक के द्वारा प्रतिपादित किया गया , इसके फलस्वरूप इस चक्र को hatch and slack path के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसे पादप जिनमे C4 चक्र पाया जाता है C4 पादप कहलाते है।

C4 चक्र मुख्य रूप से एक बीज पत्री पादप जैसे मक्का , बाजरा तथा गन्ने में पाया जाता है , वही यह चक्र कुछ द्विबीजपत्रित पादप जैसे Amarauthus तथा Euphorbia (डंडाथोर) में भी पाया जाता है।

C4 चक्र की क्रियाविधि

C4 पादपों में C4 चक्र मुख्य रूप से पत्तियों की दो प्रकार की कोशिकाओं में संपन्न होता है जो निम्न प्रकार से है –

(1) Mesophyll cell’s / पर्ण मध्योत्तक कोशिकाएँ : पत्तियों में पायी जाने वाली ऐसी कोशिकाएं जिनमे हरित लवक सामान्यत: आकार में छोटे सुविकसित तथा ग्रेना युक्त पाए जाते है।

(2) Bundle sheath cell’s / पुल आच्छद कोशिकाएँ :

पत्तियों में पाए जाने वाले संवहन मण्डल के चारों तरफ माला की आकृति की कोशिकाएं पायी जाती है जिनमे अविकसित , बड़े आकार की ग्रेना विहीन हरितलवक पाए जाते है ऐसी कोशिकाएँ पुल आच्छद कोशिकाओं के नाम से जानी जाती है।

नोट : पत्तियों के संवहन मण्डल के चारो तरफ माला की आकृति में पायी जाने वाली कोशिकाओं को जर्मन भाषा में Kranz के नाम से जाना जाता है अत: पत्तियों की एनाटोमी या शारीरिकी का अध्ययन Cranch एनाटोमीक कहलाता है।

पुल आच्छद कोशिकाओ में Thelakoid granna की अनुपस्थिति के कारण सिक्के के रूप में न रहकर नलिका के रूप में पाए जाते है जिसे स्ट्रोमा lemili के नाम से जाना जाता है।

पत्तियों की पर्ण मध्योतक कोशिकाओं में प्रकाशिक अभिक्रिया संपन्न होती है वही पुल आच्छद कोशिकाओ में अप्रकाशिक अभिक्रिया संपन्न होती है अर्थात कार्बन डाई ऑक्साइड का स्वांगीकरण होता है [उपरोक्त प्रकाशिक व अप्रकाशिक अभिक्रिया का स्थान C4 पादपो के सन्दर्भ में बताया गया है। ]

C4 पादपों में C4 चक्र निम्न चरणों में संपन्न होता है

(1) सर्वप्रथम C4 पादपों की पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले रंध्रो के द्वारा वायुमण्डल से कार्बन डाई ऑक्साइड का अवशोषण किया जाता है।
(2) अवशोषित कार्बन डाइ ऑक्साइड पर्ण मध्योतक कोशिकाओं के कोशिका प्रत्य में प्रवेश करती है जिसे Phospho enol puruvate नामक तीन कार्बन वाले यौगिक के द्वारा ग्रहण किया जाता है जो एक विशिष्ट एंजाइम phosphoenolpyruvate carboxylase की उपस्थिति में ओक्सिलो एसिडिक अम्ल नामक चार कार्बन वाले यौगिक में परिवर्तित किया जाता है।
(3) निर्मित ऑक्सेलिक एसिटिक अम्ल का अपचयन होता है तथा NADPH + H+ के NADPH में परिवर्तित होने के कारण नए उत्पाद Malic अम्ल का निर्माण होता है जो पुनः चार कार्बन वाला होता है।
(4) निर्मित Malic acid मिसोफिल कोशिकाओ से पूल आच्छद कोशिकाओ में प्रवेश करती है जहाँ malic एसिड का Decarboxylation होता है , जिसके फलस्वरूप मुक्त कार्बन डाई ऑक्साइड के अणु का C3 चक्र द्वारा स्थिरीकरण होकर ग्लूकोज तथा ग्लूकोज से शर्करा में परिवर्तित हो जाता है तथा Malic acid , Purovic acid में बदल जाता है।
(5) निर्मित Purovic अम्ल पुनः पर्ण मध्योतक कोशिकाओं में प्रवेश करती है तथा ATP के अणु के साथ जुड़कर एक तीन कार्बन वाले यौगिक Phospho euol Puruvate (PEP) का निर्माण होता है और पुनः यह PEP , कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण कर पुनः Oxalo acetic acid (OAA) में परिवर्तित होता है तथा इसी प्रकार यह चक्र चलता रहता है।
नोट : कार्बन डाइ ऑक्साइड को चार कार्बन वाले स्थायी यौगिक के द्वारा ग्रहण किये जाने के कारण यह चक्र C4 चक्र कहलाता है।

C4 चक्र व C4 पादपो की विशेषताएँ

C4 पादप CO2 (कार्बन डाई ऑक्साइड) की अत्यधिक कम सान्द्रता पर भी प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को संपन्न कर सकते है।
C4 चक्र के अंतर्गत एक विशिष्ट एंजाइम पाया जाता है जो Phosphoenolpyruvate carboxylase के नाम से जाना जाता है तथा यह एंजाइम CO2 की कम सांद्रता पर भी क्रियाशील रहता है।
यदि पादपो में प्रकाश श्वसन अनुपस्थित हो तो भी C4 पादपो की उत्पादकता सक्रीय रहती है तथा ऐसी स्थिति में C4 पादपों की उत्पादकता C3 पादपो से अधिक पायी जाती है।
C4 पादप आसानी से कम जल की मात्रा में तथा अधिक तापमान पर उगाये जा सकते है [जैसे 45 डिग्री सेल्सियस ताप पर भी इन्हें आसानी से उगाया जा सकता है। ]
उपरोक्त विशेषताओ के आधार पर उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रो में सर्वाधिक उपयुक्त उगाये जाने वाले पादप C4 पादप होते है।

CAM चक्र (crassulacean metabolism acid)

उपरोक्त चक्र एक विशेष प्रकार के कुल क्रुसीलेसी के सदस्यों में पाया जाता है तथा यह चक्र C4 चक्र के समान कार्य करता है।
इसके कुल के नाम के आधार पर इस चक्र का नामकरण किया जाता है।
उपरोक्त चक्र सामान्यत: ऐसे पादपो में पाया जाता है जो मासल तथा गुद्देदार पत्तियाँ युक्त होते है तथा शुष्क प्रकार के मौसम में पाए जाने वाले पादपों में भी CAM चक्र पाया जाता है।
उपरोक्त प्रकार के पादपों के रन्ध्र सामान्यत: दिन के समय बंद परन्तु रात्री के समय खुली अवस्था में पाए जाते है , इस प्रकार के रन्ध्रो को तिमिर सक्रीय रंध्र (Scotoactive stomata) के नाम से जाना जाता है।
रात्री के समय ऐसे रन्ध्रो के खुलने के कारण वायुमण्डल में उपस्थित CO2 को पर्ण मध्यक cell के द्वारा अवशोषित किया जाता है जिसे Phosho enol puruvate ग्रहण कर चार कार्बन वाले Oxalo एसिटिक अम्ल में परिवर्तित कर देती है जो अपचयित होकर Malic acid में परिवर्तित हो जाता है अत: ऐसे पादपों में रात्री के समय CO2 का स्थिरीकरण malic acid के रूप में होता है।
इस प्रकार के चक्र में दिन के समय malic acid के perboxylation से CO2 उत्सर्जित होती है जो हरितलवक में विसरित होकर C3 चक्र के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट में अपचयित हो जाती है। अत: इस प्रकार के पादपो में CO2 का स्थिरीकरण रात्रि के समय तथा CO2 का अपचयन दिन के समय होता है अत: इस क्रिया में CO2 का अपचयन बिना जल की हानि के होता है।
उपरोक्त चक्र सामान्यत: Agave Yacca Craculla , नागफनी , अनानास आदि पादपों में पाया जाता है।
उपरोक्त चक्र कुछ विशिष्ट मरुद्भिद्द पादप जैसे Echinoeactus नाम पादपो में भी पाया जाता है।
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