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सुसमाचार क्या है | ईसाई धर्म में सुसमाचार किसे कहते है परिभाषा अर्थ मतलब Gospels in hindi meaning

Gospels in hindi meaning definition in Christianity religion सुसमाचार क्या है | ईसाई धर्म में सुसमाचार किसे कहते है परिभाषा अर्थ मतलब ?

शब्दावली
धर्मदूत (Apostles) ः ईसा मसीह के बारह शिष्य और पौलुस । (च्ंनस)।
बपतिस्मा (Baptism) ः इसी रस्म के जरिये व्यक्ति को ईसाई समुदाय में दीक्षित किया जाता है।
सुसमाचार (Gospels) ः ‘‘नया नियम‘‘ की पहली चार पुस्तकें जिनमें ईसा मसीह के जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान का वर्णन है।
पवित्र आत्मा (Holy Spirit) ः मनुष्य के जीवन में परमेश्वर की सक्रिय मौजूदगी, जो त्रयी की तीसरी सत्ता है।
अवतार (Incarnation) ः ईसा मसीह में देवत्व का मनुष्यत्व के साथ संगम ।
उपासना पद्धति (Liturgy) ः सार्वजनिक उपासना के लिए निर्धारित अनुष्ठान ।
पैगम्बर (Prophet) ः वह व्यक्ति जो परमेश्वर की ओर से प्रेरित ‘‘इलहाम‘‘ की बातें कहता या परमेश्वर का संदेश देता है।
पुनरुत्थान (Resurrection) ः ईसा मसीह का मुरदों में से जी उठना।
त्रयी (Trinity) ः ईसाई धर्म के अनुसार, एक परमात्मा में तीन सत्ताओं के रूप में पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का संगम है।

सारांश
इस इकाई के प्रारंभ में हमने ईसा मसीह के जीवन और संदेश पर विचार किया। ईसाई धर्म की स्थापना करने वाले ईसा मसीह थे। जिनके बारे में यह विश्वास किया जाता है कि वे परमेश्वर के पुत्र थे, लेकिन मनुष्य जाति के पापों का प्रायश्चित करने के लिए उन्होंने मनुष्य के रूप में जन्म लिया, दुख उठाये, सलीब पर अपनी जान दी और फिर मुरदों में से जी उठे। ईसाई धर्म ने परमेश्वर के जिस वचन या दैवीय रूप से प्रेरित उपदेशों को स्वीकार किया, वे बाइबिल में संकलित हैं।

इस इकाई में हमने ईसाई धर्म की शिक्षाओं को भी स्पष्ट किया। ईसा मसीह का जीवन और उनके उपदेश ईसाई धर्म का आधार हैं। ईसा मसीह ने जिस तरह का जीवन जीने का उपदेश दिया और स्वयं जिया वह उस समय के आम चलन के विपरीत था। उन्होंने जिस नैतिक व्यवहार और सामाजिक जीवन को अपने उपदेशों और कर्म में उतारा उसका आधार परमेश्वर का प्रेम और उससे प्रवाहित होने वाला साथियों के प्रति प्रेम है। जब ईसा मसीह मुर्यों में से जी उठे और स्वर्ग में उठा लिए गये तो उसके बाद के उनके अनुयायियों में एक उल्लेखनीय बदलाव आया, जो उन पर पवित्र आत्मा के उतरने के कारणं था। तब से विश्वास किया जाता है कि पवित्र आत्मा उन ईसाइयों को आत्मिक सामर्थ्य और प्रेरणा देती है जो यीशु की शिक्षाओं के अनुसार चलते हैं। ईसाइयों की धार्मिक प्रार्थना सभाओं का मुख्य उद्देश्य ईसा मसीह के माध्यम से और पवित्र आत्मा की शक्ति से परमेश्वर की उपासना करना है।

इस इकाई में हमने. ईसाई सामाजिक व्यवस्था और इस ईसाई समाज में चर्च की भूमिका पर भी विचार किया। ईसाई समुदाय धर्म की स्थापना ईसा मसीह के उपदेशों के अनुरूप हुई। लेकिन चर्च को विपरीत प्रतिमानों और व्यवहार वाले व्यापक संसार के साथ सामंजस्य स्थापित करना होता है, जिसके कारण ईसाइयों के सामने असाधारण किस्म की समस्याएं खड़ी होती हैं।

इकाई के अंत में हमने भारत में ईसाई धर्म के कुछ पहलुओं पर विचार किया। भारत में ईसाई धर्म पहली शताब्दी ईसवीं में ही आ गया था, और केरल में एक ईसाई समुदाय बन गया था। लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में इसका प्रसार 16वीं शताब्दी में यूरोपीय मिशनरियों के आगमन के साथ ही हुआ। 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में ईसाइयों की संख्या कुल जनसंख्या का केवल 2.4 प्रतिशत थी, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में उनका अच्छा खासा जमाव है। ईसाइयों ने देश में सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

 कुछ उपयोगी पुस्तकें
क्लीमेन, सी, 1988. ‘‘रिलिजंस ऑफ द वर्ल्ड‘‘ पुनःमुद्रण‘‘, (अंग्रेजी अनुवाद) मानस पब्लिकेशंस: दिल्ली
बर्टन, ए.जी., 1990. “द रिलिजंस ऑफ द वर्ल्ड‘‘, ओलंपिया पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
मैकारिस, जे., 1966 ‘‘प्रिंसिपल्स ऑफ क्रिश्चियन थियोलॉजी‘‘, एस.सी.एम.प्रेस: लंदन

बोध प्रश्न 1
I) बाइबिल के “पुराना नियम‘‘ और ‘‘नया नियम के बीच क्या संबंध है? लगभग आठ पंक्तियों में स्पष्ट करें।
II) ईसाई धर्म में शरीर और आत्मा की अवधारणा क्या है? लगभग पाँच पंक्तियों में स्पष्ट करें।
III) ईसा मसीह मुरदों में से कब जी उठे?
क) पाँचवे दिन के बाद
ख) चैथे दिन के बाद
ग) तीसरे दिन के बाद
घ) दूसरे दिन के बाद

बोध प्रश्न 1
I) ईसाई धर्म का अभिन्न अंग है उद्वार की योजना जिसके विषय में पुराना नियम और नया नियम दोनों में विवरण है। पुराना नियम में उद्वारकर्ता के आगमन के बारे में वादे, विवरण और भविष्यवाणियाँ हैं। ये सब बातें ईसा मसीह के रूप में पूरी हुई जिनके जीवन और शिक्षाओं का वर्णन नया नियम में हैं। नया नियम इस अर्थ में पुराना नियम का साक्षी है। ईसा मसीह यूहदी थे और नया नियम में मिलने वाली उनकी शिक्षाओं में जगह-जगह पर पुराना नियम की शिक्षाओं का हवाला मिलता है।

II) जैसे कि बाइबिल में कहा गया है, मनुष्य के पास शरीर और आत्मा होती है। शरीर तो मृत्यु के साथ नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा अनंत काल तक जीवित रहती है। उद्वार का अर्थ है मृत्यु के बाद स्वर्ग में आत्मा का जीवित रहना। ईसाई धर्म के अनुसार, मनुष्य धरती पर केवल एक बार जन्म लेता है। उसका पुनर्जन्म नहीं होता।

उद्देश्य
इस इकाई का मुख्य उद्देश्य है, आपको ईसाई धर्म की विश्वास पद्धति और सामाजिक व्यवस्था की जानकारी देना। इस इकाई को पढ़ने के बाद, आपः
ऽ ईसाई धर्म के मुख्य स्रोतों और विश्वासों पर चर्चा कर सकेंगे,
ऽ ईसा मसीह की शिक्षाओं का विवेचन कर सकेंगे,
ऽ ईसाई सामाजिक व्यवस्था की व्याख्या कर सकेंगे,
ऽ ईसाई धर्म संस्था (चर्च) और विश्वव्यापी ईसाई दृष्टिकोण का विवरण दे सकेंगे, और
ऽ भारत में ईसाई धर्म के विभिन्न पहलुओं का विवेचन कर सकेंगे।

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