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ताला चाबी परिकल्पना का सचित्र वर्णन कीजिए फिशर का ताला कुंजी मॉडल Fischer’s Lock and Key model in hindi

Fischer’s Lock and Key model in hindiताला चाबी परिकल्पना का सचित्र वर्णन कीजिए फिशर का ताला कुंजी मॉडल ?

विकर या एंजाइम ( Enzymes )
एन्जाइम बहुत अधिक जटिल कार्बनिक पदार्थ है जो समस्त जीवों में होने वाली विभिन्न जैविक अभिक्रियाओं में विशिष्ट उत्प्रेरक (Specific catalysts) का कार्य करते हैं। अतः इन्हें जैव उत्प्रेरक (Biological catalysts) कहते हैं। सर्वप्रथम एमाइलेज (Amylase) एन्जाइम की खोज बरजिलियस (Berzelius) ने की। इन जीव उत्प्रेरकों को एन्जाइम नाम कुहेन (Cuhen) ने दिया। समनर (Sumner 1926) ने सर्वप्रथम प्रयोग शाला में यूरियेज (Urease) नामक एन्जाइम को क्रिस्टल (Crystals) के रूप में प्राप्त किया।
एन्जाइम में वे जैव उत्प्रेरक है जो स्वयं परिवर्तित हुये बिना रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को तीव्र करते हैं।
ग्रीक भाषा में एन्जाइम शब्द का अर्थ होता है-“यीस्ट में” में प्रारंभ में यह माना जाता रहा कि एन्जाइम केवल सजीव कोशिका में पाये जाते हैं। प्रायः इन्हें यह नाम दिया गया। एन्जाइम मूल रूप से प्रोटीन होते हैं जो कि सजीवों की कोशिका में होने वाली अभिक्रियाओं में विशिष्ट उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। कोशिका में एन्जाइम स्वतन्त्रत रूप से नहीं मिलते बल्कि उन झिल्लियों में या झिल्लियों पर स्थित होते हैं जो कि केन्द्रक या विभिन्न कोशिका के अंगों पर चढ़ी होती है। इस विशिष्ट प्राप्ति स्थलों के कारण समस्त कोशिका अभिक्रियाएँ (Cell reactions) एक दूसरे से स्वतंत्र होती हैं। अभी तक लगभग दो हजार एन्जाइमों का पता लग चुका है और साथ ही यह भी पता लगा है कि एन्जाइम कोशिका के बाहर भी उत्प्रेरक (Catalyst) का कार्य कर सकते हैं।
एन्जाइमों के अभिलक्षण (Characteristics of Enzymes )
1. अधिकांश एन्जाइम रंगहीन व जल में या नमक के घोल में घुलनशील होते हैं।
2. यह अनुमान लगाया गया है कि एक सजीव कोशिका में हर समय लगभग 1,000 विभिन्न एन्जाइम उपस्थित रहते हैं।
3. एन्जाइम का मुख्य लक्षण अभिक्रिया की गति को लगभग 106 ( 10 million) गुना / मिनट/मोल बढ़ा देना है।
4. अति तीव्र अभिक्रिया करने वाला एन्जाइम जैसे पेप्सिन अधः स्तर या सबस्ट्रेट ( Substrate)
के लगभग 106 अणुओं के एक मिनट में परिवर्तित कर सकता है। यह अनुमान लगाया गया है कि यदि पाचन में एन्जाइम सहायता न करें तो एक सामान्य भोजन को पचने में लगभग 50 वर्ष लगेंगें। सबस्ट्रेट या अधःस्तर वह पदार्थ है जिस पर एन्जाइम क्रिया करता है।

5. एन्जाइम विशिष्ट होते हैं और इन्हें कार्य करने के लिये विशिष्ट pH व विशिष्ट तापक्रम
की आवश्यकता होती है।
6 राइबोन्यूक्लिऐज जो कि सबसे छोटे एन्जाइमों में से एक है, का अणु भार 12,700 होता
है। यूरिएज का अणु भार 200,000 होता है।
7. आँसुओं व नाक के म्यूकस में पाया जाने वाला एन्जाइम लाइसोजाइम कहलाता है जो कि बैक्टीरिया की पॉलिसैकेरॉइड दीवार का अपघटन कर देता है। अतः यह लाइसोजाइम
शरीर का सुरक्षा में सक्रिया भाग लेता है।
8 प्रत्येक कोशिका में उपस्थित एन्जाइमों का निर्धारण, कोशिका में उपस्थित आनुवंशिक निर्देशों द्वारा होता है।
साधारण गुण (General Properties)
1. एन्जाइम अभिक्रिया में कभी समाप्त नहीं होता, अतः अभिक्रिया के अन्त में अपरिवर्तित
रहता है।
12. सबस्ट्रेट पर क्रिया करने के लिये बहुत अल्प मात्रा में एन्जाइम की आवश्यकता होती है। एन्जाइम को कई बार प्रयोग किया जा सकता है।
3. RNAase के अतिरिक्त समस्त एन्जाइम प्रोटीन के बने होते हैं जिनमें एक या अधिक सक्रिय स्थल होते हैं।
4. एन्जाइम, क्रिया की सक्रियता ऊर्जा को कम करके, अभिक्रिया की गति को बढ़ा देते हैं। कुछ एन्जाइमों की अभिक्रियाएँ उत्क्रमणीय होती है। उदाहरणार्थ-
5.   H2CO3 ⇌ CO2 + H2O
6. उच्च ताप, पराबैंगनी प्रकाश (U.V. light) अम्ल, उच्च लवण सान्द्रता, भारी धातु लवण व क्षारीय अभिकर्मक एन्जाइम की प्रकृति स्थिति व संरचना को विकृत कर देतेहैं। इसे विक्रतीकरण (Denaturation) कहते हैं। इससे एन्जाइम की सक्रियता नष्ट हो जाती है। 7. कुछ निश्चित पदार्थ या एन्जाइम उत्तेजक, एन्जाइम को सक्रिय करने के लिए आवश्यक होते हैं।
8 कुछ पदार्थ एन्जाइम से मिलकर, उसकी सक्रियता को नष्ट (Inhibit) कर देते हैं। 9. एन्जाइम विशिष्टता (Enzyme specificity) का अर्थ है एक प्रकार का एनजाइम एक ही प्रकार की अभिक्रिया को उत्प्रेरित करता है। उदाहरणार्थ एमाइलेज (Amylase) केवल स्टार्च अपघटन को ही उत्प्रेरित करता है, सेलूलोस को नहीं।
10. लयन एन्जाइम (Lytic enzymes) एक विशिष्ट रासायनिक समूह पर ही क्रिया करते हैं। उदाहरण के लिए ग्लूकोसाइडेजे (Glucosidases) ग्लूकोज पर, पेप्सिन (pepsin) व ट्रीप्सिन (Trypsin) पेप्टाइड (Peptide) बंधों पर व एस्टेरेज (Esterases) केवल इस्टेर (Esters) पर ही क्रिया करते हैं। इसे “समूह विशिष्टता” (Group Specificity) कहते हैं ।
एन्जाइमों की रासायनिक प्रकृति (Chemical Nature of Enzymes)

जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि एन्जाइम मूल रूप से प्रोटीन होते हैं तथा कई एन्जाइमों को सक्रिय होने के लिये सहकारकों की आवश्यकता होती है। रासायनिक प्रकृति के आधार पर एन्जाइमों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
1. एकलकी एन्जाइम (Monomeric Enzyme): वो एन्जाइम जो कि केवल एक ही पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के बने होते हैं, एकलकी एन्जाइमों कहलाते हैं। ऐसे एन्जाइमों की संख्या कम ही है। ये जल-अपघटनी क्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं। उदाहरणार्थ पेप्सिन, ट्रिप्सिन तथा यूरिएज आदि । एकलकी एन्जाइम का संश्लेषण निष्क्रिय जायमोजन के रूप में ही होता है। यदि सक्रिय संश्लेषित होते तो इनके अधिक व तेज क्रियाशील होने के कारण यह इनको स्रावित करने वाली ग्रन्थि का ही विनाश कर देते ।
2. स्वल्पमक एन्जाइम (Oligomeric Enzymes) : बहुत से एनजाइम्स 2-60 उप इकाइयों के बने होते हैं। इनके उदाहरण – लैक्टिक हिडाइड्रोजिनेज, हैक्सोकाइनेज, इनोलेज, एलडोलेज आदि । कई स्वल्पकी एन्जाइम्स ऐसे भी है जिनके कई आणविक रूप हैं परन्तु ये एक ही क्रिया को उत्प्रेरित करते हैं. इन्हें आइसोएन्जाइम्स (Isoenzymes) कहते हैं।
उदाहरण के तौर पर कशेरूकियों के हृदय तथा पेशियों में पाये जाने वाले एन्जाइम लैक्टेट डिहाइड्रोजिनेज (Lactate dehydrogenase = L.D.H) में चार एकलक (Monomers) होते हैं। हृदय में पाये जाने वाली LDH के एकलकों को H उपइकाइयाँ कहते हैं जबकि पेशियों में इन चारों उपइकाइयों को M उपइकाइयाँ कहते हैं। अतः LDH एक चतुष्टय (Tetramer) है।
कोशिका में उपापचय (Metabolism) में भाग लेने वाले विभिन्न एन्जाइमों में अनेक आइसोएन्जाइम ‘रूप होते हैं। किसी एन्जाइम के विभिन्न सम्म्रएन्जाइम का वितरण निम्नलिखित चार तथ्य प्रकट करता है।
1. विभिन्न अंगों के विभिन्न उपपचयी प्रतिरूप उदाहरणार्थ- LDH समएन्जाइम हृदय व कंकाल पेशी (Skelatal muscle) में उपापचयी विभिन्नता को दर्शाता है।
2. एक ही कोशिका के भीतर किसी एक एन्जाइम के विभिन्न उपापचयी कार्य व स्थल होते हैं। उदाहरणार्थ-मेलेट डीहाइड्रोजिनेज (Malate Dehydrogenase) एन्जाइम माइटोकॉन्ड्रिया व कोशिका रस (Cytosol) में विभिन्न रूपों में मिलता है। जहाँ वे विभिन्न कार्य करते हैं। 3. भ्रूण रूपों से वयस्क उत्तकों का परिवर्धन व विभेदन : उदाहरण के लिए, भ्रूण यकृत मं लेक्टेट डीहाइड्रोजिनेज (Lactate Dehydrogenase) के सम एन्जाइम्स का एक वि वितरण होता है जो कि वयस्क अवस्था में बिल्कुल बदल जाता है।
4. एलोस्टेरिकमॉडुलक (Allosteric Modullators) के लिए, आइसो एन्जाइमों के विभिन्न रूपों की अनुक्रिया द्वारा उपपचयी दर को समस्वरित करता है।
कुछ एन्जाइमों के विभिन्न समएन्जाइम्स, मॉडुलक (Modulators) के प्रति भिन्न अनुक्रिया करते
हैं।
नामकरण (Nomenclature)
क्रिया द्वारा लगभग 3000 एन्जाइम ज्ञात किये जा चुके हैं। आधुनिक पद्धति जिसे आई.एस. बी. कमीशन ने 1965 में स्वीकार किया, उसके अनुसार एन्जाइम जिस सबस्ट्रेट पर क्रिया करता है उसके नाम के पश्च (Suffix) भाग पर ase लगा कर नामांकित किया जाता है। उदाहरण के लिये मंड को माल्टोज में बदलने वाले एन्जाइम को एमाइलेस (Amylase) लिपिड को ग्लीसरोल व वसा अम्ल में बदले वाले एन्जाइम को लाइपेस (Lipase), प्रोटीन को अमीनों अम्ल में परिवर्तित करने वाले एन्जाइम को प्रोटीएस (Protease) कहते हैं।

एन्जाइम-प्रकार एवं क्रियाविधि
एन्जाइमों का वर्गीकरण (Classification of Enzymes)

आई.यू.बी. (I.U.B. International Union of beochemistry) कमीशन ने 1965 में एन्जाइमों को 6 समूहों में बांटा। इस वर्गीकरण का आधार अभिक्रिया का प्रकार एवं अभिक्रिया की क्रियाविधि बनाया गया था। आई. यू. बी वर्गीकरण के मुख्य लक्षण हैं-
अभिक्रियाओं व उनके एन्जाइम को छः मुख्य वर्गों में तथा प्रत्येक वर्ग को चार से तेरह उपवर्गों में बांटा गया है।
प्रत्येक एन्जाइम के दो भाग होते हैं (a) अधःस्तर या सबस्ट्रेट का नाम तथा दूसरा नाम के पश्च में (b) ऐज (ase) शब्द का लगना ।
यदि एन्जाइम के बारे में अन्य कोई विशेष सूचना हो तो वह नाम के आगे कोष्ठक में
लिखी जाये।
4. प्रत्येक एन्जाइम का अपना वर्गीकरण कोड (Systematic code) होता है। प्रथम अंक वर्ग को दर्शाता है। द्वितीय अंक उपवर्ग को, तृतीय अंक उप-उपवर्ग को बताता है। उदाहरणार्थ- 27.1.1 प्रदर्शित करताहै वर्ग (2) ट्रांसफेज (Transferase) उपवर्ग (7) फॉस्फेट का स्थानान्तरण उपवर्ग (1) अर्थात् एक एल्कोहॉल फॉस्फेट ग्राही (Acceptor) के रूप में कार्य करता है। अंतिम अंक (1) एन्जाइम हैक्सोकाइनेज (Hexokinase) को दर्शाता है।
वर्गीकरण
वर्ग 1 (Class 1)
ऑक्सीडोरिडक्टेज (Oxidoreductases) : इस वर्ग के एन्जाइम एक इलेक्ट्रॉन (e) का एक अणु से दूसरे तक स्थानांतरण व हाइड्रोजन स्थान्तरण को दर्शाते हैं।
इस वर्ग में डीहाइड्रोजिनेज (Dehydrogenases), ऑक्सीडेज (Oxidases), ऑक्सीजिनेज (Oxenases), पैरा ऑक्सीडेज (Peroxidases) एन्जाइम आते हैं।
उदाहरण (1) 1.1.1.1 Alcohol NAD Oxidoreductase (Alcohol dehydrogenase)
(2) 1.4.1.3 Glutamate AND Oxidoreductase (Glutamate dehydrogenase)
वर्ग 2 (Class 2)
· ट्रान्सफरेज (Transferases) : ये एन्जाइम किसी विशिष्ट समूह को एक सबस्ट्रेट से दूसरे | सबस्ट्रेट तक के स्थानान्तरण को उत्प्रेरित करते हैं। स्थानांतरण होने वाले समूह है। जैसे NH2 | ट्रासऐमीनेशन में तथा -PO, (फास्फेट) फास्फोरीलीकरण में ।
उदाहरण 2.3.1.6 = एसाइल को एन्जाइम A (Acetyl Coenzyme A), कोलिन एसाइल ट्रान्सफरेज (Choline-Acyl Transferase)
वर्ग 3 (Class 3)
हाइड्रोलेजे (Hydrolases) : ये एन्जाइम जल की उपस्थिति में रासायनिक बंधों के टूटने क उत्प्रेरित करते हैं। ये अभिक्रियाएँ उत्क्रमणीय होती है। ये एस्टर, पेप्टाइड, ग्लाइकोसाइल, एसिड- एनहाइड्राइड, C-C आदि बंधों को तोड़ते हैं।

उदाहरण : बी.डी. गेलेक्टोसाइड वोलेक्टो हाइड्रोलेज सी.बी. गेलेक्टोसाइडेज 3.2.1.2.3 (B-D Galactoside Galecto Hydrolases, B-Galactosidase)
वर्ग 4 (Class 4)
लाइजेज (Lyases) : ये एन्जाइम किसी अणु के दो भागों को तोड़कर उनके मध्य द्विबंध बनाने में सहायक होते हैं। ये अभिक्रियाएँ उत्क्रमणीय होती हैं। C-C, C-O, C-N, C-S आदि ऐसे समूह हैं जिन पर ये एन्जाइम क्रिया करते हैं।
CX + CY ⇌ XY + C = C
सामान्य अभिक्रिया (General reaction) निम्न प्रकार होती है-
(D)
उदाहरण (1) 4.1.2.7 कीटो-1 फॉस्फेट एल्डीहाईड लाईजेज (एल्डोलेज) (Ketose-1-Phosphate aldehydelyase (aldolase)
(2) 4.2.1.2 एल मेलेट हाइड्रोलाइजेज फ्यूमरेज (L-malate hydrolyase Fumerase)
वर्ग 5 (Class 5)
आइसोमरेज (Isomerases) : ये एन्जाइम प्रकाशीय, ज्यामितय तथा संरचनात्मक समावयवों के अन्योन्य रूपान्तरण को उत्प्रेरित करते हैं। उदाहरा-सिस-ट्रास आइसोमरेज, एल्डोलेजेज (Aldoases) व कीटोजेज (Ketoses) के अन्योन्य रूपान्तरण (Interconversion) को उत्प्रेरित करने वाले आइसोमरेज आदि।
वर्ग 6 (Class 6)
लिगेजे (Ligases) ये वह एन्जाइम हैं जो दो यौगिकों के जुड़ने (Linking) की अभिक्रियाओं को उत्प्रेरितकरते हैं साथ ही एक उच्च ऊर्जा फास्फेट ‘पाइरोफॉस्फेट’ भी टूटता है जो कि अभिक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। इन अभिक्रियाओं में मुख्य: C-O, C-S, C-N व C-C बंध बनते हैं।
उदाहरण: 6.4.12 Acetyl CoA Co2 Ligase (Acetyl CoA Carboylase)

एन्जाइम अभिक्रिया की क्रियाविधि (Mechanism of Enzyme Reaction)
एन्जाइम सबस्ट्रेट के समक्ष ऐसे विन्यास (Configurations) में आता हैं ताकि सबस्ट्रेट उसमें आसानी से फिट हो सके। यह स्थल एन्जाइम का सक्रिय स्थल (Active Stie) कहलाता है। सक्रिय ‘स्थल पर एन्जाइम अणु की तृतीय कुंडलन के कारण अमीनों सन्निकट, अम्ल एक दूसरे के पास
आ जाते हैं।
एन्जाइम तथा सबस्ट्रेट मिलकर, एक अस्थायी यौगिक बना लेते हैं, अतः अभिक्रिया निम्न प्रक
से होती है-
हैं।
Enyzme + Substrate → Enzyme – Substrate complex→ Product + Enzyme

एन्जाइम-सबस्ट्रेट बंध की प्रक्रिया समझाने के लिये निम्नलिखित दो मॉडल प्रस्तुत किये गये (ES Complex)
1. फिशर का ताला : कुंजी मॉडल (Fisher’s Lock and Key model)
एमिश फिशर के इस मॉडल के अनुसार प्रत्येक एन्जाइम एक ताले की तरह होता है जिसमें कोई विशिष्ट सबस्ट्रेट ही चाबी के रूप में फिट हो सकता है। जिस प्रकार प्रत्येक ताले की एक ही चाबी होती है, उसी प्रकार प्रत्येक अभिक्रिया का एक ही विशिष्ट एन्ज़ाइम होता है।
दूसरे शब्दों में प्रत्येक एन्जाइम के अणु की संरचना मे विविध समूहों का एक विशेष विन्यास होता है जिसमें कोई ऐसा सबस्ट्रेट (कुंजी) जुड़ सकता है जिसका अणु एन्जाइम के सक्रीय भाग में (ताला) में फिट हो सकता हो।

चित्र 14.1 एन्जाइम अभिक्रिया की क्रियाविधि दर्शाता फिशर का ताला-कुंजी मॉडल

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