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N व P अर्धचालकों में फर्मी स्तर क्या है समझाइये , FERMI LEVEL IN N AND P SEMICONDUCTOR in hindi
FERMI LEVEL IN N AND P SEMICONDUCTOR in hindi
आवेश वाहकों के अपवाह द्वारा चालन (CONDUCTION BY DRIFT OF CHARGE CARRIERS)
जब किसी अर्ध चालक पदार्थ की छड़ के दोनों सिरों के मध्य एक बैटरी चित्र (2.9-1) के अनुसार संयोजत की जाती है तो नै अर्ध चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन बैटरी के धन टर्मिनल की ओर तथा होल ऋण टर्मिनल की ओर बल अनुभव करते हैं जिससे इलेक्ट्रॉन तथा होल की यादृच्छिक गति संशोधित हो जाती है और इलेक्ट्रॉन एवं होल समूह के रूप में परस्पर विपरीत दिशा में गति करते हैं।
इस गति को अपवाह (drift) कहते हैं। नैज अर्ध चालक में इलेक्ट्रॉन तथा होल के अपवाह वेग (drift velocity) प्रयुक्त विद्युत क्षेत्र E के अनुक्रमानुपाती होते हैं अर्थात्
इलेक्ट्रॉन अपवाह वेग
तथा होल अपवाह वेग
यहाँ ue तथा uh क्रमशः इलेक्ट्रॉन तथा होल की गतिशीलता (mobility) कहलाती है। इसे मीटर2 प्रति वोल्ट-सेकण्ड (m2/V-s) में नापते हैं।
दिये गये विद्युत क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन अपवाह वेग होल अपवाह वेग के विपरीत दिशा में होता है परन्तु दोनों वाहकों का आवेश विपरीत होता है इसलिए दोनों वाहकों द्वारा धारा की दिशा समान होती है। यदि इलेक्ट्रॉन अपवाह वेग Ve के द्वारा धारा घनत्व Je है तथा होल अपवाह वेग के द्वारा धारा घनत्व Jh है तो नैज अर्ध चालक में प्रवाहित कुल
धारा घनत्व
J = Je + Jh
परन्तु धारा घनत्व = आवेश वाहक संख्या घनत्व आवेश x अपवाह वेग
अतः
जहाँ विद्युत क्षेत्र की दिशा में वेग धनात्मक माना गया है।
अतः J = Je + Jh
.: अर्ध-चालक की वैद्युत चालकता (Electrical conductivity)
इस अपवाह धारा के अतिरिक्त नैज अर्धचालक में एक अन्य प्रकार की धारा भी प्रवाहित होती है जिसे विसरण धारा (diffusion current) कहते हैं। यह धारा आवेश वाहकों के संख्या घनत्वों की प्रवणता (भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में वाहकों के संख्या घनत्वों के अन्तर ) के फलस्वरूप प्रवाहित होती है। विसरण धारा दोनों प्रकार के आवेश वाहकों द्वारा उत्पन्न होती है। यह धारा अपद्रव्यी अर्धचालकों में महत्वपूर्ण होती है। इसका विवेचन अपद्रव्यी अर्धचालकों में धारा प्रवाह के विवेचन के साथ किया जायेगा ।
अपद्रव्यी अर्धचालक (EXTRINSIC SEMICONDUCTOR)
नैज अर्ध चालकों (Intrinsic Semiconductor) की चालकता कम होती है। अतः अपेक्षित (required) चालकता प्राप्त करने के लिए अर्ध चालक पदार्थों जरमेनियम या सिलीकॉन में नियन्त्रित मात्रा में किसी अपद्रव्य (अशुद्धि तत्व) को मिलाया जाता है। इस प्रकार प्राप्त अर्धचालक अपद्रव्यी अर्ध चालक (Extrinsic Semiconductor) कहलाते हैं। अशुद्धियों आवर्त सारिणी के तृतीय वर्ग या पंचम वर्ग के तत्वों में से ली जाती हैं।
अशुद्धि तत्व की मात्रा अत्यल्प होती है। नैज अर्धचालक के लगभग 10^6 से 10^10 परमाणुओं में एक परमाणु अशुद्धि तत्व का होता है अर्थात् अपद्रव्यी तत्व के परमाणुओं की संख्या 10^13 से 10^17 प्रति मोल के लगभग होती है । ये अपद्रव्य अर्ध चालक दो प्रकार के होते हैं-
(i) N – अर्धचालक (N-Semiconductor) (ii) P – अर्धचालक (P-Semiconductor)
(i) N अर्ध चालक – यदि जरमेनियम या सिलीकॉन अर्धचालक (जिनकी संयोजकता चार होती है) में पंचम वर्ग के तत्व जैसे फॉस्फोरस, आर्सनिक या एन्टीमनी मिलाये जायें तो प्राप्त अर्ध-चालक N अर्ध चालक कहलाता है। फॉस्फोरस, आर्सनिक तथा एन्टीमनी पंच संयोजी तत्व होते हैं जिनके संयोजी कक्ष में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब नैज अर्धचालक पदार्थ में एक पंच संयोजी तत्व का परमाणु चर्तुसंयोजी जरमेनियम या सिलीकॉन के परमाणु को प्रतिस्थापित करता है तो अशुद्धि तत्व के चार इलेक्ट्रॉन निकटवर्ती जरमेनियम या सिलीकोन के चार परमाणुओं के एक-एक इलेक्ट्रॉन से सह-संयोजी आबन्ध बना लेते हैं परन्तु पाँचवें इलेक्ट्रॉन का मूल परमाणु से बन्धन अत्यन्त दुर्बल होने के कारण यह लगभग मुक्त रहता है। चित्र (2.10 -1 ) । सामान्य ताप पर यह मुक्त इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में संक्रमण कर जाता है। ह प्रकार पंचम वर्ग के अशुद्धि तत्व का प्रत्येक परमाणु एक मुक्त इलेक्ट्रॉन आवेश वाहक के रूप में प्रदान करता है इसी कारण इस प्रकार की अशुद्धि दाता अशुद्धि ( donor impurity) कहलाती है।
अशुद्धि तत्व के पंचम संयोजी इलेक्ट्रॉन का ऊर्जा स्तर नैज अर्धचालक के वर्जित ऊर्जा बैण्ड में चालक बैण्ट् से कुछ नीचे होता है। इस ऊर्जा स्तर को दाता स्तर (donor level) कहते हैं इसे चित्र (2.10-2) में डेश रेखा द्वारा दर्शाया गया है। दाता अशुद्धि वाले अपद्रव्यी अर्ध चालक के चालन बैण्ड में इलेक्ट्रॉन अधिसंख्या मात्रा में होने के कारण आवेश वाहक के रूप में प्रमुख इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसीलिए ऋणात्मक (Negative) आवेश वाहक बहुसंख्या में होने के कारण अर्थात् ऋणात्मक वाहकों के अपवाह के कारण चालन होता है। इस प्रकार के अपद्रव्यी अर्धचालक N- अर्थ चालक कहलाते हैं।
(ii) P अर्धचालक – जब तृतीय वर्ग के तत्व जैसे बोरोन, इंडियम या गेलियम को अशुद्धि के रूप में जरमेनियम या सिलीकॉन अर्धचालक में मिलाया जाता है तो प्राप्त अर्धचालक P अपद्रव्यी अर्धचालक कहलाता है। तृतीय वर्ग के ये तत्व त्रिसंयोजी (trivalent ) होते हैं। अत: जब त्रिसंयोजी तत्व के परमाणु चर्तुसंयोजी जरमेनियम या सिलीकॉन के परमाणु को प्रतिस्थापित करता है (चित्र 2.10- 3 ) तो अशुद्धि तत्व के तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन निकटवर्ती जरमेनियम या सिलीकॉन के तीन परमाणुओं से सह-संयोजी आबन्ध बना लेते हैं परन्तु अर्ध चालक के चौथे निकटवर्ती परमाणु का आबन्ध पूर्ण नहीं हो पाता है और उसमें एक इलेक्ट्रॉन की न्यूनता (deficiency) रह जाती है। इसे होल या कोटर द्वारा व्यक्त करते हैं। इस रिक्त स्थल में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता होती है। अत: तृतीय वर्ग की अशुद्धि ग्राही अशुद्धि (acceptor impurity) कहलाती है।
त्रिसंयोजी तत्व की अशुद्धि को नैज अर्ध-चालक में मिलाने के कारण उत्पन्न होल का ऊर्जा स्तर वर्जित ऊर्जा बैण्ड में संयोजकता बैण्ड से कुछ ऊपर होता है । इस ऊर्जा स्तर को ग्राही स्तर (acceptor level) कहते हैं। इसे चित्र (2.10.4) में डेश रेखा द्वारा दर्शाया गया है।
प्रत्येक ग्राही अशुद्धि से एक होल उत्पन्न होता है जो धनावेश (positive charge) वाहक कण के भाँति कार्य करता है। इस प्रकार त्रिसंयोजी तत्व अशुद्धि से मादित अर्ध-चालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक होल होते हैं। इस प्रकार के अर्धचालक में वैद्युत चालन मुख्यतः धनावेशित (positively charged) आवेश वाहकों के कारण होने से इसे P अर्ध-चालक कहते हैं।
NP अर्धचालकों में आवेश घनत्व (CHARGE DENSITY IN N AND P SEMICONDUCTORS)
प्राय: नैज अर्धचालक में अत्यल्प मात्रा में तृतीय एवं पंचम संयोजी तत्व की अशुद्धि मिलायी जाती है। अत्यल्प अशुद्धि के अपमिश्रण (doping) से नैज अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन-होल के उत्पादन व पुनर्योजन प्रक्रम पर नगण्य प्रभाव पड़ता है अर्थात् नै अर्धचालक के इलेक्ट्रॉन – होल युग्म के साम्यावस्था समीकरण में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
..
np =ni2 ………………………(1)
यहाँ n व p क्रमशः चालन बैण्ड में इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व (संख्या प्रति एकांक आयतन) तथा संयोजकता बैण्ड में होलों का संख्या घनत्व है। यदि अर्धचालक में अधिसंख्य वाहकों की संख्या में अपमिश्रण द्वारा नैज़ मान (intrinsic value) से अधिक वृद्धि की जाती है तो अल्प संख्यक आवेश वाहकों की संख्या में स्वत: कमी हो जाती है। उदाहरणस्वरूप N-अर्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन अधिक संख्या में उपलब्ध होने से वे नैज अर्धचालक की अपेक्षाकृत अधिक होलों का विलोपन कर देंगे और होल संख्या घनत्व कम हो जायेगा । इसी प्रकार P-अर्धचालक में नैज अर्ध-चालक की अपेक्षा मुक्त इलेक्ट्रॉन संख्या घनत्व कम हो जायेगा ।
आवेश वाहकों की संख्या में परिवर्तन को ज्ञात करने के लिए माना अर्ध चालक में सभी अशुद्धि परमाणु आयनित रूप में उपस्थित है तथा दाता (donor) एवं ग्राही (acceptor) परमाणुओं की संख्या क्रमश: ND व NA हैं। अर्धचालक की विद्युत उदासीनता (electrical neutrality) को निम्न समीकरण से व्यक्त करने पर
P + ND = n + NA………………….(2)
इस समीकरण के बायें तरफ का पद संयोजकता बैण्ड में होल तथा दाता आयनित परमाणु से संलग्न धन आवेश के कुल धनावेश (net positive charge) को व्यक्त करता है तथा दायें तरफ का पद चालन बैण्ड में इलेक्ट्रॉन तथा ग्राही परमाणु से संलग्न कुल ऋणात्मक आवेश (net negative charge) को व्यक्त करता है।
समीकरण (1) से n = ni2 /p तथा p = ni2/n
ये मान समीकरण (2) में रखने पर p या n में निम्न द्विघात समीकरण (quadratic equations) प्राप्त होते हैं –
n2 + (Na – ND) n – n2i = 0
तथा p2 + (ND – ND) P – n2i = 0
इनको हल करने पर,
द्विघात समीकरण के दूसरे हल (solution) से n व p के मान ऋणात्मक आते हैं इसलिए इन हलों को छोड़ दिया है।
स्थिति (i)–यदि अर्धचालक नैज प्रकृति का है तो NA = ND = 0
n = p = ni
स्थिति (ii)-N अर्धचालक के लिए NA = 0
यहाँ पादांक (subscript) n, N प्रकार के अर्धचालक को व्यक्त करता है। N अर्धचालक के दाता इलेक्ट्रॉनों की संख्या ND अर्धचालक के नैज मान से बहुत अधिक रखी जाती है जिससे ND>> ni । अत: समीकरण (5) व (6) में द्विपद सन्निकटन (binomial approximation) का उपयोग
इन समीकरणों से स्पष्ट है कि ND >> ni होने के कारण N अर्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या दाता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के लगभग समान होती है तथा होलों की संख्या बहुत कम होती है इस प्रकार N अर्धचालक में दाता इलेक्ट्रॉन मुख्य आवेश वाहक का कार्य करते हैं। – स्थिति (iii)- P अर्धचालक के लिए ND = 0
यहाँ पादांक P, P प्रकार अर्धचालक को व्यक्त करते हैं।P अर्धचालक में ग्राही होलों की संख्या N अर्थ चालक के नैज मान Pi = ni बहुत अधिक रखी जाती है ताकि NA >> ni हो । द्विपद सन्निकटन का उपयोग करते
अतः P अर्धचालक में NA>> ni होने के कारण होलों की संख्या ग्राही होलों (acceptor holes ) की संख्या के लगभग बराबर होती है और मुक्त इलेक्ट्रॉन की संख्या होलों की संख्या के अपेक्षाकृत बहुत कम होती है। इस प्रकार P अर्धचालक में होल मुख्य आवेश वाहक का कार्य करते हैं।
N व P अर्धचालकों में फर्मी स्तर (FERMI LEVEL IN N AND P SEMICONDUCTORS)
यदि ताप जनित मुक्त इलेक्ट्रॉन व होल यथेष्ट संख्या में न हो, जैसा कि वास्तविकता में होता है तो N- अर्धचालक में चालन बैंड में इलेक्ट्रॉन संख्या घनत्व सक्रियित दाता परमाणु घनत्व के तुल्य होती है व P- अर्ध-चालक में संयोजकता बैंड में होल-संख्या घनत्व ग्राही परमाणु घनत्व के तुल्य होती है (समी. 2.11-7 व 2.11-12)। अतः
nn = ND तथा Pp = NA ……………………..(1)
फर्मों-डिराक वितरण के अनुसार, जैसा कि N अर्धचालक के लिये सिद्ध किया है (खण्ड 2.8), उसी प्रकार
जहाँ Ecn, N– अर्ध-चालक में चालन बैंड का निम्नतम स्तर है व Efn, N – अर्ध-चालक में फर्मी स्तर है। इसी प्रकार P- अर्धचालक के लिये
जहाँ Efp Evp क्रमश: P -अर्धचालक में फर्मी स्तर व संयोजकता बैंड का उच्चतम स्तर है। समीकरण (2) से
इसी प्रकार समीकरण (3) से, P- अर्धचालक में फर्मी स्तर
इस प्रकार N– अर्धचालक में फर्मी स्तर चालन बैंड के निम्नतम स्तर से कुछ नीचे (कम ऊर्जा की स्थिति पर) होगा। दाता परमाणु घनत्व ND बढ़ने के साथ वह स्तर Ecn के निकट आता जायेगा व ताप बढ़न से दूर हटता जायेगा। उच्चतम स्तर से कुछ ऊपर ( अधिक ऊर्जा की स्थिति पर ) होगा। P- अर्ध चालक में फर्मी स्तर संयोजकता बैंड ग्राही परमाणु घनत्व बढ़ने से Efp Evp के निकट आयेगा व ताप बढ़ने से यह दूर हटेगा। N व P अर्धचालक में फर्मों स्तर की स्थितियाँ चित्र (2.12 – 1 ) में प्रदर्शित की गई है।
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