f ब्लॉक के तत्व (f block elements in hindi) , लेंथेनॉइड श्रेणी , एक्टिनॉइड श्रेणी , गुण , संकुचन

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f ब्लॉक के तत्व (f block elements in hindi) : ऐसे तत्व जिनमे अंतिम इलेक्ट्रोन आंतरिक (n-2)f कक्षको में भरे जाते है , f ब्लॉक के तत्व कहलाते है।

इन्हें आंतरिक संक्रमण तत्व या दुर्बल मृदा तत्व भी कहते है।
f ब्लॉक के तत्वों का स्थान आवर्त सारणी के तीसरे वर्ग में है तथा यह तत्व छठे व सातवें आवर्त में पाए जाते है।  स्थानाभाव के कारण इन्हें आवर्त सारणी में नीचे की ओर अलग से दर्शाया है।

f-block की श्रेणियाँ 

इसमें दो श्रेणियाँ पायी जाती है –
(i) लेंथेनॉइड श्रेणी 
(ii) एक्टिनॉइड श्रेणी 
(i) लेंथेनॉइड श्रेणी : इस श्रेणी में 14 तत्व पाए जाते है , यह तत्व लेथेनम (La) के बाद प्रारंभ होते है।  इसलिए इन्हें लेन्थेनाइड तत्व कहते है या लेंथेनॉन कहा जाता है।  इन्हें Ln संकेत से दर्शाते है।  इनमे अंतिम इलेक्ट्रॉन 4f कक्षको में भरे जाते है। 

 

(ii) एक्टिनॉइड श्रेणी : इस श्रेणी में भी 14 तत्व पाए जाते है।  यह तत्व एक्टिनियम (Ac) के बाद प्रारंभ होते है इसलिए इन्हे एक्टिनॉइड तत्व या एक्टिनॉन कहा जाता है। 
इन्हें An संकेत से दर्शाते है। 
इनमे अंतिम इलेक्ट्रॉन 5f कक्षको में भरे जाते है , इसमें पाए जाने वाले तत्व इस प्रकार है –
प्रश्न 1 : d ब्लॉक के तत्वों को संक्रमण तत्व एवं f-block के तत्वों को आन्तरिक संक्रमण तत्व कहते है , क्यों ?
उत्तर : क्योंकि d ब्लॉक के तत्वों में बाह्यतम nS व (n-1)d कक्षको के मध्य इलेक्ट्रोन का संक्रमण होता है इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व कहते है। 
जबकि f ब्लॉक के तत्वों में आन्तरिक (n-1)d व (n-2)f कक्षको के मध्य इलेक्ट्रोन का संक्रमण होता है इसलिए इन्हें आन्तरिक संक्रमण तत्व कहते है। 

लेन्थेनॉइड तत्वों के गुण 

1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :-
परमाणु क्रमांक
तत्व चिन्ह
तत्व का पूरा नाम
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
58
Ce
Cerium
[Xe] 4f1 5d1 6s2
59
Pr
Praseodymium
[Xe] 4f3 5d0 6s2
60
Nd
Neodymium
[Xe] 4f4 5d0 6s2
61
Pm
Promethium
[Xe] 4f5 5d0 6s2
62
Sm
Samarium
[Xe] 4f6 5d0 6s2
63
Eu
Europium
[Xe] 4f7 5d0 6s2
64
Gd
Godalinium
[Xe] 4f7 5d1 6s2
65
Tb
Terbium
[Xe] 4f9 5d0 6s2
66
Dy
Dysprosium
[Xe] 4f10 5d0 6s2
67
Ho
Holmium
[Xe] 4f11 5d0 6s2
68
Er
Erbium
[Xe] 4f12 5d0 6s2
69
Tm
Thulium
[Xe] 4f13 5d0 6s2
70
Yb
Yetterbium
[Xe] 4f14 5d0 6s2
71
Lu
Lutetium
[Xe] 4f14 5d1 6s2
लेन्थेनाइड तत्वों का अंतिम सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4f1-14 5d0-1 6s2 है।
 लेन्थेनम (La) का अंतिम इलेक्ट्रोनिक विन्यास [Xe] 4f0 5d1 6s2 है।  इसमें अंतिम इलेक्ट्रॉन 5d कक्षक में भरा जाता है अत: इस इलेक्ट्रोन को भरते ही 4f कक्षकों की ऊर्जा 5d कक्षको से कम हो जाती है , इस कारण आगे आने वाले तत्वों मे 5d के बजाय 4f कक्षको में इलेक्ट्रॉन भरे जाते है। 
गॉडलिनियम (Gd) व लुटेटियम (Lu) में क्रमशः 4f7 4f14 विन्यास के स्थायित्व के कारण 5d कक्षक में भी इलेक्ट्रोन उपस्थित होता है। 
लेन्थेनाइड तत्वों में प्रथम तीन कोश (1, 2,3) पूर्ण भरे होते है जबकि अन्तिम तीन कोश (4,5,6) अपूर्ण भरे होते है। 

2. ऑक्सीकरण अवस्था 

लेन्थेनाइड तत्व सामान्यत: +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है।  इसके अलावा कुछ तत्व +2 व +4 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते है , जैसे Ce व Tb , +4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है क्योंकि यह चार इलेक्ट्रोन त्यागकर क्रमशः 4f0 4f7 स्थायी विन्यास प्राप्त करते है। 
Eu व Yb दोनों +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है क्योकि यह दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर क्रमशः 4f7 4f14 स्थायी विन्यास प्राप्त करते है। 

3. परमाणु आकार (लेन्थेनाइड संकुचन)

लेन्थेनाइड तत्वों में Ce से Lu तक चलने पर परमाण्विक आकार।  आयनिक आकार में क्रमिक रूप से कमी होती है।  इसे ही लेन्थेनाइड संकुचन कहते है। 
लेन्थेनाइड संकुचन का कारण : क्योंकि लेन्थेनाइड तत्वों मे अंतिम इलेक्ट्रोन आन्तरिक 4f कक्षको में भरे जाते है।  यह 4f कक्षको के इलेक्ट्रोन बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रोन को बहुत कम प्रतिकर्षित करते है अर्थात इनका परिरक्षण प्रभाव बहुत दुर्बल लगता है अत: Ce से Lu तक चलने पर परमाणु क्रमांक बढने से प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है अत: इस प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान परिरक्षण प्रभाव से अधिक होने के कारण लेन्थेनाइड तत्वों के आकार में संकुचन होता है। 

लेन्थेनाइड संकुचन के प्रभाव या परिणाम 

i. लेन्थेनाइड संकुचन के कारण d-ब्लॉक की 5d श्रेणी के तत्वों का आकार 4d श्रेणी के तत्वों के लगभग बराबर हो जाता है। 
ii. लेन्थेनाइड संकुचन के कारण Ce से Lu तक चलने पर इनके हाइड्रोक्साइडो की क्षारीय प्रवृत्ति घटती है क्योंकि Ce से Lu तक चलने पर धनायनिक आकार कम होने के कारण OH ऋण आयन को ध्रुवित करने की क्षमता बढ़ जाती है अर्थात Ce से Lu तक चलने पर इनके हाइड्रोक्साइड की OH आयन त्यागने की प्रवृति कम हो जाती है। 
इस कारण क्षारीय प्रवृत्ति भी कम हो जाती है इसलिए Ce(OH)3 अधिक क्षारीय है एवं Lu(OH)3 कम क्षारीय है। 
iii. लेन्थेनाइड तत्वों में परमाणु आकार में बहुत कम अन्तर होने पर भी इनकी विलेयता एवं संकुल यौगिक बनाने की प्रवृति में भिन्नता आ जाती है , इस भिन्नता के कारण आयन विनिमय विधि द्वारा लेन्थेनाइड तत्वों का पृथक्करण आसानी से किया जा सकता है। 

5. रासायनिक अभिक्रियाशीलता 

लेन्थेनाइड तत्वों की प्रथम तीन आयनन एन्थैल्पीयो का योग बहुत कम होने के कारण ये तीन इलेक्ट्रोन त्यागकर सामान्यत: +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है।  इस कारण इनमे निम्न रासायनिक गुण पाए जाते है। 
i. अपचायक : लेन्थेनाइड तत्व आसानी से तीन इलेक्ट्रोन त्यागकर ओक्सिकृत हो जाते है अत: इनमे अपचायक गुण पाया जाता है। 
Ln → Ln3+ + 3e
ii. विद्युत धनी प्रकृति : लेन्थेनोइड तत्वों की इलेक्ट्रोन त्यागने की प्रवृति के कारण यह विद्युत धनी प्रकृति के होते है। 
जल से अभिक्रिया : लेन्थेनाइड तत्व जल से क्रिया करके हाइड्रोक्साइड बनाते है एवं H2 गैस मुक्त करते है।  यह तत्व गर्म जल से अभिक्रिया तीव्र गति से एवं ठण्डे जल से अभिक्रिया मंद गति से करते है। 
2Ln + 3HOH → 2Ln(OH)3 + 3H2
Hसे क्रिया : लेन्थेनाइड तत्व H2 से क्रिया करके नॉनस्टाइकियोमीट्रिक यौगिक बनाते है। 
Ln + H2 → LnH2
2Ln + 3H2 → 2LnH3
O2 , X2 , N , S , C से क्रिया
4Ln + 3O2 → 2Ln2O3
2Ln + 3X2 → 2LnX3
2Ln + N2 → 2LnN
2Ln + 3S → Ln2S

Ln + 2C → LnC2

लेन्थेनोइड धातुओ के उपयोग 

लेन्थेनोइड धातुएँ चाँदी के समान श्वेत रंग की एवं नर्म होती है।  यह वायु की उपस्थिति में बदरंग हो जाती है , इन धातुओ के उपयोग निम्न है –
i. लेन्थेनोइड तत्वों से बनी एक मिश्र धातु जिसे ‘मिश धातु’ कहा जाता है , इस मिश धातु का रासायनिक संगठन निम्न प्रकार है –
Ce (40%) + La + Nd(44%) + Fe(5%) + सूक्ष्म मात्रा में S , C , Ca , Si , Al है। 
ii. मिश धातु का उपयोग सिगरेट एवं गैस के लाइटर बनाने में , लाइट फैकने में , बंदूक की गोली एवं गोले बनाने में किया जाता है। 
iii. 3% मिश धातु + Mg (मैग्नीशियम) से बनी मिश्र धातु का उपयोग जेट विमानों के पुर्जे बनाने में। 
iv. Pr व Nd धातुओ के ऑक्साइडो का उपयोग धुप के चश्मे के रंगीन लेंस बनाने में किया जाता है। 
v. Ce के लवणों का उपयोग सूती कपड़ो की रंगाई एवं उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है। 
vi. सीरियम सल्फेट का उपयोग आयतनमितिय अनुमापन में किया जाता है। 
viiइन . तत्वों की लोह चुम्बकीय एवं अनुचुम्बकीय धातुओ का उपयोग चुम्बक एवं इलेक्ट्रॉनिक यंत्र बनाने में किया जाता है।

एक्टिनाइड तत्वों के गुण 

1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :-
 
परमाणु क्रमांक
तत्व चिन्ह
तत्व का पूरा नाम
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
90
Th
Thorium
[Rn] 5f0 6d2 7s2
91
Pa
Protactenium
[Rn] 5f2 6d1 7s2
92
U
Urenium
[Rn] 5f3 6d1 7s2
93
Np
Neptunium
[Rn] 5f4 6d1 7s2
94
Pu
Plutonium
[Rn] 5f6 6d0 7s2
95
Am
Americium
[Rn] 5f7 6d0 7s2
96
Cm
Curium
[Rn] 5f7 6d1 7s2
97
Bk
Berkelium
[Rn] 5f9 6d0 7s2
98
CF
Californium
[Rn] 5f10 6d0 7s2
99
Es
Einestinium
[Rn] 5f11 6d0 7s2
100
Fm
Fermium
[Rn] 5f12 6d0 7s2
101
Md
Mendalevium
[Rn] 5f13 6d0 7s2
102
No
Nobelium
[Rn] 5f14 6d0 7s2
103
Lr
Lowerencium
[Rn] 5f14 6d1 7s2
 
एक्टिनोइड तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Rn] 5f0-14 6d0-2 7s2 है।
एक्टिनॉइड तत्वों में 5f व 6d कक्षकों के मध्य ऊर्जा का अन्तर कम होने के कारण इनमे इलेक्ट्रॉन स्थायित्व के आधार पर भरे जाते है। 
एक्टिनॉइड श्रेणी में सभी रेडियो एक्टिव तत्व है , परमाणु क्रमांक बढाने पर इनका स्थायित्व कम होता है। 
प्रश्न 1 : परायुरेनियम तत्व (transuranic elements) किसे कहते है ?
उत्तर : एक्टिनोइड श्रेणी में युरेनियम (U) के बाद आने वाले सभी तत्व कृत्रिम व अस्थायी होते है।  यह प्रकृति में नहीं पाए जाते है , इन्हें परायुरेनियम तत्व या अतिभारी तत्व (super heavy elements) कहते है। 

2. ऑक्सीकरण अवस्था 

एक्टिनाइड तत्व सामान्यत: +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है , इसके अलावा ये +4 , +5 , +6 , +7 तक ऑक्सीकरण अवस्था दर्शा सकते है। 
Th = +4 
Pa = +5
U = +6 
Np = +7

3. परमाणु आकार (एक्टिनॉइड संकुचन)

एक्टिनाइड श्रेणी में Th से Lr तक चलने पर परमाणु आकार घटता है।  इसे ही एक्टिनाइड संकुचन कहते है। 
एक्टिनाइड संकुचन का कारण 5f कक्षको में उपस्थित इलेक्ट्रॉन द्वारा दर्शाया गया दुर्बल परिरक्षण प्रभाव है। 
लैंथेनाइड संकुचन की तुलना में एक्टिनाइड तत्वों में संकुचन अधिक होता है क्योंकि 4f कक्षको के इलेक्ट्रोन की तुलना में 5f कक्षको के इलेक्ट्रोन अधिक दुर्बल परिरक्षण प्रभाव दर्शाते है। 

लैन्थेनाइडो व एक्टिनाइडो तत्वों की तुलना 

लैन्थेनाइड
एक्टिनाइड
1.       यह तत्व सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +3 के अलावा +2 व ऑक्सीकरण अवस्था O.S. दर्शाते है |
यह तत्व सामान्य O.S. (ऑक्सीकरण अवस्था) +3 के अलावा +4 , +5 , +6 व +7 तक O.S. दर्शाते है .
2.       इन तत्वों में प्रोमिथियम के अलावा कोई रेडियो एक्टिव तत्व नहीं है |
इनमे सभी रेडिओ एक्टिव तत्व है |
3.       लैन्थेनाइड तत्वों में संकुचन कम होता है |
एक्टिनाइड तत्वों में संकुचन अधिक होता है |
4.       इनसे बने यौगिक कम क्षारीय होते है |
इनसे बने यौगिक अधिक क्षारीय होते है |
5.       इनमे संकुल यौगिक बनाने की प्रवृति कम होती है |
इनमे संकुल यौगिक बनाने की प्रवृति अधिक होती है |
6.       यह ऑक्सो आयन नहीं बनाते है |
यह ओक्सो आयन बनाता है जैसे VO+ , VO2+ , P4O2+
7.       इनके अधिकतर त्रिधनात्मक आयन रंगहीन होते है |
इनके अधिकतर त्रिधनात्मक एवं चतुर्धनात्मक आयन रंगीन होते है |
प्रश्न 1 : Ti4+ आयन रंगहीन होता है क्यों ?
उत्तर : Ti4+ = [Ar] 3d0 4S0
 Ti4+  के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अयुग्मित इलेक्ट्रोन अनुपस्थित होते है।  इस कारण यह रंगहीन होता है। 
प्रश्न 2 : Sc के सभी यौगिक रंगहीन होते है , क्यों ?
उत्तर : Sc3+ = [Ar] 3d0 4S0
Sc केवल +3 ऑक्सीकरण अवस्था में यौगिक बनाता है अत: Sc3+ के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास  [Ar] 3d0 4S0 में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होने के कारण इससे बने यौगिक रंगहीन होते है। 
प्रश्न 3 : Gd में अयुग्मित इलेक्ट्रोन की संख्या बताइये। 
उत्तर : 
Gd = [Xe] 4f7 5d1  6S2
अयुग्मित इलेक्ट्रोन की संख्या  = 8 है। 
प्रश्न 4 : Ag (47) व Au (79) के आयनन विभव के मान लगभग समान है क्यों ?
उत्तर : Ag , 4d श्रेणी का सदस्य है एवं Au , 5d श्रेणी का सदस्य है अत: Au में आंतरिक f कक्षको में उपस्थित इलेक्ट्रॉन के दुर्बल परिरक्षण के कारण लैंथेनाइड संकुचन का प्रभाव पाया जाता है इस कारण Ag व Au का आकार लगभग बराबर होता है अत: आकार बराबर होने के कारण इनके आयनन विभव / आयनन एन्थैल्पी के माना बराबर होते है। 
प्रश्न 5: Cr2+ व Fe2+ में से प्रबल अपचायक कौनसा है तथा क्यों ?
उत्तर : Cr2+ व Fe2+ में से Cr2+ प्रबल अपचायक है –
Cr2+ = [Ar] 3d4 4S0
Fe2+ = [Ar] 3d6 4S0
Cr2+ एक इलेक्ट्रोन त्यागकर 3d4 से 3d3 विन्यास प्राप्त करता है जबकि Fe2+  एक इलेक्ट्रोन त्यागकर 3d6 से 3d5 विन्यास प्राप्त करता है। 
जल जैसे माध्यम में Cr का 3d3 विन्यास 3d5 की तुलना में बहुत अधिक स्थायी होता है।  [C.F.T के आधार पर इसके  3dविन्यास में t2g कक्षक अर्द्धपूरित होने के कारण ]
अत: Fe2+ की तुलना में Cr2+ आसानी से इलेक्ट्रोन त्यागकर ऑक्सीकृत हो जाता है।  इसलिए Cr2+ प्रबल अपचायक की भाँती व्यवहार करता है।