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EFFECT OF FEEDBACK ON INPUT RESISTANCE in hindi निवेश प्रतिरोध पर पुनर्निवेश का प्रभाव क्या है ?
निवेश प्रतिरोध पर पुनर्निवेश का प्रभाव क्या है ? EFFECT OF FEEDBACK ON INPUT RESISTANCE in hindi ?
निवेश प्रतिरोध पर पुनर्निवेश का प्रभाव (EFFECT OF FEED BACK ON INPUT RESISTANCE)
पुनर्निवेशी प्रवर्धक का निवेश प्रतिरोध ( व्यापक रूप में प्रतिबाधा ) निवेशी परिपथ में बाह्य संकेत और पुनर्निवेशी संकेत की मिश्रण विधि पर निर्भर होता है । यह पुनर्निवेशी संकेत की निर्गम परिपथ में प्रतिचयन विधि पर निर्भर नहीं होता है। अतः हम श्रेणी निवेश व पार्श्वपथ निवेश के लिये पुनर्निवेश के प्रभाव का अध्ययन करेंगे। मान लीजिये : प्रवर्धक (पुनर्निवेश रहित) का निवेश प्रतिरोध R है व उसकी लब्धि A है ।
पुनर्निवेश रहित प्रवर्धक के लिये Ii = Ii = Vi/Ri ………………..(1)
ऋणात्मक पार्श्वपथ पुनर्निवेश होने पर,
Ii = Ii + If……. …(2)
यदि अब परिणामी निवेश प्रतिरोध R है तो
अर्थात् पार्श्व पथ ऋणात्मक पुनर्निवेश से प्रवर्धक का निवेश प्रतिरोध कम हो जाता है, Ri <Ri ऋणात्मक पुनर्निवेश के विभिन्न प्रभावों का सारांश निम्न सारणी में दिया गया है-
वोल्टता तथा धारा पुनर्निवेश परिपथ (VOLTAGE AND CURRENT FEED BACK CIRCUTT)
(i) वोल्टता पुनर्निवेश श्रेणी निवेश परिपथ (उत्सर्जक अनुगामी प्रवर्धक ) (Voltage feed back series input circuits (emitter follower amplifier))
चित्र (5.9-1) में दर्शाया गया परिपथ उत्सर्जक अनुगामी (emitter follower) का है जिस में उत्सर्जक प्रतिरोध (emitter resistance) Re के सिरों से निर्गम वोल्टता (output voltage) Vo प्राप्त की जाती है और इसकी वोल्टता श्रेणी पुनर्निवेशन द्वारा ट्रॉजिस्टर के आधार पर संकेत वोल्टता के साथ निवेश कर दिया जाता है।
पुनर्निवेश सिद्धान्त (feed back theory) का उपयोग करते हुए इसकी वोल्टता लब्धि, निवेश प्रतिरोध तथा निर्गम प्रतिरोध ज्ञात कर सकते हैं।
इस उभयनिष्ठ उत्सर्जक ( CE) प्रवर्धक का – पैरामीटर मॉडल का उपयोग करते हुए तुल्य परिपथ ( equivalent circuit) चित्र (5.9-2 ) में दिखाया गया है। पुनर्निवेश रहित (without feed back) परिपथ की वोल्टता लब्धि ज्ञात करने के लिए निवेशी परिपथ में ट्रॉजिस्टर के उत्सर्जक E को भू सम्पर्कित मान लेते हैं
जो 1 से कम है। (Rs + hie) का मान. hfe Re की तुलना में अत्यल्प होता है, अतः Af = 11
(b) निवेश प्रतिरोध ( Input Resistance) पुनर्निवेश रहित प्रवर्धक का निवेश प्रतिरोध
(c) निर्गम प्रतिरोध (Output Resistance)—– निर्गम टर्मिनलों के मध्य प्रवर्धक की ओर देखते हुए तथा निविष्ट संकेत शून्य मान कर प्राप्त प्रतिरोध निर्गम प्रतिरोध होगा। इस परिपथ में Re लोड प्रतिरोध का कार्य करता है। निर्गम प्रतिरोध की गणना में लोड प्रतिरोध अनन्त अर्थात् निर्गम टर्मिनल खुले माने जाते हैं। दिये हुए परिपथ में Re को अनन्त माने तो पुनर्निवेशी अवस्था में निर्गम प्रतिरोध हो जायेगा। अतः गणना में Re को लगा मान कर अंतिम सूत्र में Re का सीमान्त मान प्राप्त करते हैं।
पुनर्निवेश रहित परिपथ में निर्गम प्रतिरोध Re होगा
(ii) वोल्टता पुनर्निवेश पार्श्व पथ निवेश परिपथ (स्थिर बायस प्रवर्धक परिपथ) (Voltage feed back shunt input circuit (Fixed bias amplifer)) उभयनिष्ठ उत्सर्जक प्रवधर्क का एक अन्य परिपथ चित्र (5.9-3) में दर्शाया गया है जिसमें ट्रॉजिस्टर के संग्राहक तथा आधार के बीच लगाये गये प्रतिरोध Rf द्वारा वोल्टता का पार्श्व पथ (shunt) विधि द्वारा पुनर्निवेश किया गया है। यह परिपथ स्थिर बायस प्रवर्धक परिपथ के अनुरूप है।
पुनर्निवेश सिद्धान्तं का उपयोग करते हुए यहाँ हम इसकी वोल्टता लब्धि, निवेश तथा निर्गम प्रतिरोध ज्ञात करते हैं। यह माना गया है कि Rf >> RL तथा आन्तरिक वोल्टता लब्धि A अत्यधिक है।
इस परिपथ का – पैरामीटर तुल्य परिपथ चित्र (5.9-4) में दर्शाया गया है।
B सन्धि पर किरचॉफ का नियम लगाने पर
Ii + If = Ib
यदि प्रवर्धक की आन्तरिक वोल्टता लब्धि A का मान बहुत अधिक है तो आधार धारा Ib का मान नगण्य होता है। अतः
Ii = – If …………………….(12)
तुल्य परिपथ चित्र (5.9–4) से
चूँकि Vbe का मान नगण्य है। समीकरण ( 14 ) से पुनर्निवेश धारा If लोड वोल्टता Vo के अनुक्रमानुपाती है तथा इसे निवेश के पार्श्व पथ से प्रवेश कराया जाता है इसलिए स्थिर बायस प्रवर्धक परिपथ वोल्टता पार्श्व पथ परिपथ कहलाता है। निवेश परिपथ से
(पुनर्निवेश परिपथ, अर्थात् प्रतिरोध R से अग्र दिशा में संकेत प्रवाह नगण्य मानते हुए)
तथा निर्गत वोल्टता Vo = – gm VbeRL
Vbe का मान रखने पर
बिना पुनर्निवेश के प्रवर्धक की आन्तरिक वोल्टता लब्धि
(a) वोल्टता लब्धि (Voltage gain)- पुनर्निवेश सहित प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि
यदि परिपथ में hieRLRs/(Rs + hie ) Rf का मान 1 के सापेक्ष अधिक हो तो 1 को नगण्य माना जा सकता है।
Af = – Rf/Rs
(b) निवेश प्रतिरोध (Input resistance)- वोल्टता पार्श्व पथ प्रवर्धक का निवेश प्रतिरोध
(c) निर्गम प्रतिरोध (Output resistance) बिना पुनर्निवेश वाले (CE) प्रवर्धक परिपथ का निर्गम प्रतिरोध (RL) की उपस्थिति में)
(iii) धारा पुनर्निवेश श्रेणी निवेश परिपथ ( उत्सर्जक बायस प्रवर्धक ) (Current feed back series input circuit (emitter bias amplifer))-
चित्र (5.9-5 ) में प्रदर्शित परिपथ एक उभयनिष्ठ उत्सर्जक (CE) विधा में उत्सर्जक बायस प्रवर्धक का परिपथ है जिसमें उत्सर्जक प्रतिरोध RE ट्रॉजिस्टर के प्रचालन बिन्दु (operating point) को स्थायित्व (stability) प्रदान करने के काम आता है। इस परिपथ में प्रतिरोध R के सिरों पर वोल्टता V जैसा कि चित्र (5.9-5) में दिखाया गया है, का निवेश परिपथ में पुनर्निवेश होता है। परिपथ चित्र से
VbE = VI – Vf … (22)
प्रवर्धक में Rb प्रतिरोध बायस धारा (bias current) की पूर्ति करता है। इसका मान बहुत अधिक लेते हैं इसलिए इसका प्रभाव परिपथ में नगण्य होता है। तुल्य परिपथ चित्र (5.9-6) में दिखाया गया है।
तुल्य परिपथ चित्र (5.9-6) से, पुनर्निवेश वोल्टता
समीकरण (22) पुनर्निवेश वोल्टता Vf के श्रेणी म में पुनर्निवेश को व्यक्त करता है तथा समीकरण (23) Vf के लोड धारा के अनुक्रमानुपाती संबंध को व्यक्त करता है। इसलिए यह परिपथ धारा पुनर्निवेश श्रेणी निवेश परिपथ current feed back series input circuit) कहलाता है।अतः उपरोक्त प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि, निवेश तथा निर्गम प्रतिरोध पुनर्निवेश सिद्धान्त का उपयोग करते हुए ज्ञात कर सकते हैं।
(a) वोल्टता लब्धि (Voltage gain)-
पुनर्निवेश सहित प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि
Af = A = 1- AB
समीकरण (26) व (27) से A व B का मान रखने पर
(b) निवेश प्रतिरोध ( Input resistance ) – चित्र (5.9-7) से बिना पुनर्निवेश के निवेश प्रतिरोध
श्रेणी पुनर्निवेश प्रवर्धक का निवेश प्रतिरोध
समीकरण ( 26 ), ( 27 ) व (29) रखने पर
(c) निर्गम प्रतिरोध (Output resistance)– जब पुनर्निवेश को हटाने के लिए RE = 0 करते हैं तो यह CE प्रवर्धक बन जाता है। जिसका निर्गम प्रतिरोध
इसका मान Ro से बहुत अधिक आता है अतः प्रवर्धक का निर्गम प्रतिरोध बहुत अधिक होता है|
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