भूकंप की परिभाषा क्या है , (earthquake in hindi) , अवकेन्द्र (focus or hypocenter of an earthquake)

By   December 24, 2019
भूकम्प (earthquake) : पृथ्वी में होने वाले कम्पन्न को ही भूकंप कहते है।  भूकम्प के दौरान पृथ्वी के आंतरिक भाग में अचानक ऊर्जा मुक्त होती है जो चारो दिशाओ में भूकम्पीय तरंगो के रूप में फ़ैल जाती है।  यही तरंगे भूमि में कम्पन्न करवाती है।
विज्ञान की जिस शाखा में भूकंप का अध्ययन किया जाता है उसे seismology कहते है।
भूकंप को मापने के लिए जिस यन्त्र का उपयोग किया जाता है उसे seismograph कहते है।

अवकेन्द्र (focus or hypocenter of an earthquake) : यह पृथ्वी के आंतरिक भाग में स्थित वह क्षेत्र होता है जहाँ से भूकम्पीय तरंगे मुक्त होती है।  इसे भूकंप का उद्भव केंद्र कहते है।
अधिकेन्द्र (epicenter of earthquake) : यह पृथ्वी की सतह पर स्थित वह स्थान होता है जहाँ भूकंपीय तरंगे सर्वप्रथम पहुंचती है।  यह अपकेन्द्र के ठीक ऊपर स्थित होता है।
भूकंप के कारण सर्वाधिक विनाश इसी क्षेत्र में होता है।

भूकम्पीय तरंगे (seismic waves)

भूकंपीय तरंगे दो आधार पर बाँटी गयी है –
1. भू-गर्भिक तरंगे
2. धरातलीय तरंगे
1. भू-गर्भिक तरंगे : इस प्रकार की तरंगो को दो भागो में विभक्त किया गया है –
(i) P waves (प्राथमिक तरंगे) (primary wave)
(ii) S waves (द्वितीयक तरंगे) (secondary)
(i) P waves (प्राथमिक तरंगे) (primary wave) : इन्हें प्राथमिक तरंगे भी कहते है।  इन तरंगो की गति सर्वाधिक होती है जो लगभग 6 से 13 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है।
घनत्व बढ़ने के साथ इन तरंगो की गति भी बढती है।
ये अनुदैधर्य तरंगे है।  जिनमे कणों का कम्पन्न तरंग की दिशा में आगे-पीछे होता है।

ये तरंगे सभी माध्यमो में चलती है।

 

(ii) S waves (द्वितीयक तरंगे) (secondary) : इन्हें द्वितीयक तरंगे भी कहते है। इन तरंगो की गति लगभग 4 से 7 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है।
घनत्व बढ़ने के साथ इन तरंगो की गति बढती है। ये तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती है। इन तरंगो के कणों का कम्पन्न तरंग की दिशा के लम्बवत ऊपर निचे होता है। द्वितीयक तरंगे (s तरंगे) केवल ठोस माध्यम में गति कर सकते है। 2. धरातलीय तरंगे : वे तरंगे जो धरातल पर गति करती है , इनमे L तरंगे शामिल है।
(i) L तरंगे (Love waves) : ये धरातलीय तरंगे है , इन्हें “लव तरंगे” भी कहते है।  लव तरंगो की गति सबसे कम होती है , इन तरंगो की गति लगभग 3 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। ये तरंगे पृथ्वी की सतह पर सर्वाधिक विनाश करती है।  ये तरंगे विस्तृत क्षेत्र में फ़ैल जाती है और ये तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती है।

भूकंपीय तरंगो का छाया क्षेत्र (shadow zone of earthquake)

वह क्षेत्र जहाँ भूकम्पीय तरंगे रिकॉर्ड नहीं हो पाती है उस क्षेत्र को भूकंपीय तरंगो का छाया क्षेत्र कहते है।
बाहरी कोर (क्रोड़) के द्रव अवस्था में स्थित होने के कारण छाया क्षेत्र बनता है।
छाया क्षेत्र से पृथ्वी की आंतरिक संरचना के अध्ययन में सहायता मिलती है।

P तरंगो का छाया क्षेत्र (shadow zone of p waves)

P तरंगो का छाया क्षेत्र अधिकेन्द्र से 103 डिग्री से 142 डिग्री की कोणीय दूरी के मध्य पाया जाता है।  इस छाया क्षेत्र का निर्माण इसलिए होता है क्योंकि P तरंगे बाहरी कोर (क्रोड़) में प्रवेश करने पर अपवर्तित (refracted) हो जाती है।

S तरंगो का छाया क्षेत्र (shadow zone of s waves)

S तरंगो का छाया क्षेत्र अधिकेन्द्र से 103 डिग्री के आगे पाया जाता है , इन तरंगो के छाया क्षेत्र का निर्माण इसलिए होता है क्योंकि s तरंगे द्रव माध्यम में प्रवेश नहीं करती है।

भूकंप का मापन या भूकंप मापने के स्केल (scale for earthquake)

भूकम्प के मापन के लिए मुख्य रूप से दो स्केल का उपयोग किया जाता है जो निम्न प्रकार है –
1. रिक्टर स्केल (richter scale) : इस स्केल के द्वारा भूकंप के दौरान मुक्त होने वाली ऊर्जा को मापा जाता है।  यह स्केल भूकंप के परिमाण को दर्शाता है , यह एक मात्रात्मक स्केल है।  इस स्केल में 0 से 9 तक की इकाइयाँ होती है।  इस स्केल में एक इकाई बढ़ने पर भूकंप की ऊर्जा दस गुना बढ़ जाती है अत: यह एक लघुगणक स्केल होता है।  वर्तमान समय में उच्च तीव्रता के भूकंप को मापने के लिए मोमेंट मैग्नित्युड स्केल (moment magnitude scale) का उपयोग किया जाता है।
2. मर्केली स्केल या मरकेली स्केल (mercalli scale) : इस स्केल के द्वारा भूकंप के कारण होने वाली आघात की तीव्रता को मापा जाता है।  यह गुणात्मक स्केल है , इस स्केल में 1 से 12 तक की इकाइयां होती है।  आजकल मॉडिफाइड मर्केली स्केल (modified mercalli scale) का उपयोग किया जाता है।

भूकंप के प्रमुख कारण (reasons of earthquake)

भूकंप के कारणों को मुख्य रूप से दो भागो में विभक्त किया जा सकता है –
1. प्राकृतिक कारण (natural reason)
2. मानव जन्य कारण (anthropogenic)
प्राकृतिक कारणों में निम्न छ: कारण प्रमुख है जो निम्न प्रकार है –
(i) विवर्तनिक गतिविधियाँ : प्लेटो की गति के कारण भूकंप आते है।  अभिसारी प्लेट किनारों पर उच्च , अपसारी प्लेट किनारों पर मध्यम और संरक्षित प्लेट किनारों पर निम्न तीव्रता के भूकंप आते है।
(ii) भ्रंश निर्माण (formation of faults) : भ्रश निर्माण के दौरान पृथ्वी के आंतरिक भाग से अचानक ऊर्जा मुक्त होती है , जिसके कारण भूकंप आते है।
(iii) ज्वालामुखी गतिविधियाँ : विस्फोटक ज्वालामुखी उद्भव होने पर भूकंप आते है।  ज्वालामुखी तप्त स्थलों पर भूकंप का प्रमुख कारण ज्वालामुखी गतिविधियाँ होती है।
(iv) समस्थितीक समायोजन (isostatic adjustment) : पृथ्वी के ऊँचे तथा निचे स्थानों के मध्य एक संतुलन बना रहता है जिसे समस्थितिक कहते है।
जब भी समस्थितिक संतुलन बिगड़ता है तो पृथ्वी रचनात्मक गतिविधियों द्वारा उस संतुलन को पुन: बनाने का प्रयास करती है , इन रचनात्मक गतिविधियों के दौरान भूकंप आते है।
(v) भूपटल का संकुचन सिद्धांत (contraction theory of the earth) : कुछ वैज्ञानिको के अनुसार पृथ्वी निरंतर ठंडी हो रही है जिसके कारण भूपटल का संकुचन होता है।  जब ठन्डे होने की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है तो भू-पटल का संकुचन भी अचानक होता है जिसके कारण भूकम्प आते है।
(vi) प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धांत (elastic rebound theory) :

यह सिद्धांत प्रोफेसर रीड द्वारा दिया गया।  प्रो. रीड के अनुसार चट्टानें रबर की भाँती होती है या खींचती है।  विपरीत दिशा से चट्टानों पर बल लगने पर चट्टने रबर की तरह एक सीमा तक खींचती है और विकृत हो जाने के बाद टूटने पर झटके से पुनः अपना वास्तविक आकार ग्रहण करती है और इस सम्पूर्ण प्रक्रिया के फलस्वरूप भूकंप आते है।

भूकंप के मानवजन्य कारण (anthropogenic reasons earthquake)

मानव द्वारा जनित वे कारण जिनकी वजह से भूकम्प आ सकते है , ये कारण निम्न है –
1. विस्फोट (explosion)
2. बाँध (Dam)
3. खनन (mining)
1. विस्फोट (explosion) : उच्च तीव्रता के रासायनिक और परमाणु विस्फोट करने पर या टेस्टिंग करने की स्थिति में आस-पास के क्षेत्र में भूकंप का अनुभव होता है।
2. बाँध (Dam) : जब बाँध का निर्माण किया जाता है तो उसके साथ जलाशय का भी निर्माण किया जाता है।  कई बार जलाशय के तल की चट्टाने जल के भार के कारण टूटकर अलग हो जाती है जिसके कारण आस-पास के क्षेत्र में भूकंप का अनुभव होता है।
3. खनन (mining) : जब किसी भूमि से अत्यधिक खनन किया जाता है तो अत्यधिक खनन के कारण कई बार ऐसा होता है कि भूमिगत छत ढह जाती है जिसके कारण आसपास के इलाको में भूकंप के झटके महसूस होते है।