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u एवं v या 1/u एवं 1/v के मध्य ग्राफ खींचकर उत्तल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करना draw graph between u and v in hindi
draw graph between u and v in hindi u एवं v या 1/u एवं 1/v के मध्य ग्राफ खींचकर उत्तल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करना ?
प्रयोग संख्या
Experiment No.
उद्देश्य (Object):
u एवं v अथवा 1/u एवं 1/v के मध्य ग्राफ खींचकर उत्तल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करना।
उपकरण (Apparatus):
प्रकाशीय बेंच, उत्तल लेंस, दो पिन, स्प्रिट लेवल तथा ज् छड़ आदि।
किरण चित्र (Ray diagram):
सिद्धान्त (Theory):
लेंस के लिए बिम्ब दूरी न प्रतिबिम्ब दूरी अ तथा फोकस दूरी में सम्बन्ध है
1f/= 1/v- 1/u ……;1)
उत्तल लेंस के लिए ऋणात्मक तथा अधनात्मक होती है अतः चिन्ह सहित प्रयुक्त करने पर
1/f = 1/v- 1/-u = 1/v़1/u ……;2)
अतः उत्तल लेंस की फोकस दूरीf = uv/uv धनात्मक प्राप्त होती है।
साथ ही समीकरण (2) से स्पष्ट है कि न एवं अ के मध्य ग्राफ एक
समकोणीय अतिपरवलय प्राप्त होता है तथा 1/u एवं 1/v के मध्य ग्राफ एक
सीधी रेखा प्राप्त होती है।
u-v ग्राफ से फोकस दूरी: समीकरण (2) से यदि u-v तब फोकस दूरी
f= u/2 = v/2 ……;3)
अतः यदि दोनों अक्षों पर समान पैमाना लेकर बने न-अ ग्राफ पर मूल बिन्दु से अक्ष के साथ 45° का कोण बनाती हई कटान रेखा खींची जाये तो यह ग्राफ को (2 f , 2 ) f बिन्दु पर काटेगी तथा कटान बिन्दु से न-अक्ष एवं अ अक्ष पर लम्ब डालने पर लम्ब यदि क्रमशः । तथा ठ बिन्दु पर मिलते हैं तो फोकस दूरी
f= OA/2 = OB/2 ……;4)
1/u-1/ v ग्राफ से फोकस दूरी-
यदि समान पैमाना लेकर 1/u एवं 1/v के मध्य ग्राफ खींचा जाये तो यह चित्रानुसर ऋणात्मक ढाल वाली सीधी रेखा प्राप्त होती है यह रेखा बिन्दु C ;1/u,0) पर u/1 अक्ष को तथा बिन्दु D ;0, 1/v) पर 1/v अक्ष को काटेंगी तथा दूरी OC व OD परस्पर समान होंगी।
बिन्दु C के लिए 1f/़ = 0 ़ 1/u = दूरी (OC)
अतः f = 1/OC
तथा बिन्दु क् के लिए 1/f ़ = 1/v ़ 0 = दूरी (OD)
अतः f = 1/OD
प्रयोग विधि (Method):
(I) सर्वप्रथम सूर्य की किरणों द्वारा उत्तल लेंस की लगभग फोकस दूरी ज्ञात कर लेते हैं।
(II) अब स्पिरिट लेवल तथा क्षैतिजकारी पेंचों की सहायता से प्रकाशीय बेंच की लम्बाई को क्षैतिज के समान्तर करते हैं।
. (III) अब ज्-छड़ की सहायता से प्रकाशीय बेंच की बेंच त्रुटि का मापन कर लेते हैं।
(IV) तत्पश्चात् प्रकाशीय बेंच के मध्य में उत्तल लेंस को लेंस स्टैण्ड में लगाते हैं। इस लेंस के एक ओर एक स्टैण्ड में वस्तु पिन AB को तथा दूसरी ओर दूसरे स्टैण्ड में प्रतिबिम्ब पिन CD को लगाकर उनकी ऊँचाइयों को इस प्रकार व्यवस्थित करते हैं कि दोनों पिनों की नॉक एवं लेंस के प्रकाश केन्द्र को मिलाने वाली रेखा प्रकाशीय बेंच की लम्बाई के समान्तर हो जाये।
(अ) अब वस्तु पिन AB के दूसरी ओर से उसका प्रतिबिम्ब देखते हैं तथा वस्तु पिन या लेंस या दोनों को इस प्रकार खिसकाते हैं कि वस्तु पिन का उल्टा और स्पष्ट प्रतिबिम्ब A’B’ दिखाई देने लगे।
(अप) इसके बाद प्रतिबिम्ब पिन ब्क् और उल्टा प्रतिबिम्ब ।श्ठश् की नोंक को स्पर्श कराते हैं इसके लिए आवश्यकतानुसार प्रतिबिम्ब पिन या वस्तु पिन की ऊँचाई को थोड़ा-सा ऊपर या नीचे करते हैं, साथ ही स्लो मोशन स्क्रू का भी उपयोग करते हैं।
(अपप) अब प्रतिबिम्ब पिन को आगे-पीछे खिसकाकर प्रतिबिम्ब पिन ब्क् और उल्टा प्रतिबिम्ब ।श्ठश् के बीच लंबन दूर करते हैं।
(अपपप) फिर वस्तु पिन AB , प्रतिबिम्ब पिन ब्क् तथा लेंस स् की स्थितियां नोट करते हैं।
(पग) अब वस्तु पिन को स्थिर रखकर लेंस की स्थिति को बदल-बदलकर प्रयोग को 5 बार दोहराते हैं तथा प्रेक्षणों को सारणी में नोट करते हैं।
प्रेक्षण (Observations):
(प) लेंस की लगभग फोकस दूरी = …….. सेमी.
(पप) लेंस त्रुटि (यदि है तब) b =Z a ़ …….. सेमी.
(पपप) सारणी:
क्रम संख्या वस्तु पिन की स्थिति ग
(सेमी.) लेंस की स्थिति ल
(सेमी.) प्रतिबिम्ब पिन
की स्थिति ्र
(सेमी.) बिम्ब
दूरी u’ = ;y-x)
(सेमी.) प्रतिबिम्ब
दूरी अश् = (z-y)
(सेमी.) संशोधित
बिम्ब
दूरी u = u’-;़b)
(सेमी.) संशोधित
प्रतिबिम्ब
दूरी v = v’- ;़b)
(सेमी.) 1/u
(सेमी.) – 1 1/v
(सेमी.)-1
गणना (ब्ंसबनसंजपवदे):
(प) न-अ ग्राफ से गणना:
(।) सर्वप्रथम हम ग्-अक्ष पर न तथा ल्-अक्ष पर अ लेकर दोनों अक्षों के लिए समान पैमाना मान कर न तथा अ के प्रेक्षित संशोधित मानों से न- अ आरेख खींचते हैं। यह समकोणीय अतिपरवलय प्राप्त होता है।
( ठ) अब मूल बिन्दु से न अक्ष के साथ 45° का कोण बनाती हुई रेखा खींचते हैं जोकि आलेख को बिन्दु च्( 2एि 2 ि) पर काटती है।
(ब्) कटान बिन्दु से दोनों अक्षों पर लम्ब क्रमशः च्। एवं च्ठ डालते हैं। अतः
2 ि त्र व्। या 2 ि त्र व्ठ
या ि त्र व्।ध्2 या ि त्र व्ठध्2 त्र
ि त्र ़ …….. सेमी.
व्। या व्ठ का मान रखकर फोकस दूरी िज्ञात कर लेते हैं।
(पप) 1ध्न.1ध्अ ग्राफ से गणना:
सर्वप्रथम हम ग्-अक्ष पर नध्1 तथा ल् अक्ष पर 1ध्अ लेकर दोनों अक्षों के लिए समान पैमाना मानते हैं तथा 1ध्न एवं 1ध्अ के प्रेक्षित मानों से आरेख खींचते हैं। यह एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जोकि 1ध्न अक्ष को बिन्दु ब् पर तथा 1ध्अ अक्ष को बिन्दु क् पर काटती है। बिन्दु ब् पर 1ध्अ का तथा बिन्दु क् पर 1ध्न का मान शून्य है अतः
1ध् ित्र व्ब् त्र व्क्
या ित्र 1ध्व्ब् त्र 1ध्व्क् त्र ३३३ण्ण्
व्ब् या व्क् का मान रखकर फोकस दूरी िका मान ज्ञात कर लेते हैं।
परिणाम (त्मेनसज):
दिए गए उत्तल लेंस की फोकस दूरी
(प) न-अ ग्राफ से ……….. सेमी. तथा (पप) 1ध्न.1ध्अ ग्राफ से ………. सेमी. प्राप्त होती है।
सावधानियां (च्तमबंनजपवदे):
वस्तु पिन एवं प्रतिबिम्ब पिन की नोंकें तथा लेंस का मध्य बिन्दु एकसमान ऊँचाई पर होने चाहिए।
प्रकाशीय बैंच पूर्णतः क्षैतिज तथा पिन स्टैण्ड एवं लेंस स्टैण्ड पूर्णतः ऊर्ध्व होने चाहिए।
पिनों की नोंके मोटी नहीं होनी चाहिए।
लम्बन पूर्णतः दूर कर लेना चाहिए।
त्रुटि स्त्रोत (ैवनतबम व िम्ततवत):
1. लेंस मोटा एवं अधिक द्वारक का होने पर सम्बन्ध 1ध् ित्र 1ध्अ.1ध्न यथार्थ नहीं होता। फलतः परिणाम में त्रुटि
आ सकती है।
2. प्रकाशीय बेंच एवं स्टैण्डों के तिरछे होने के कारण त्रुटि हो सकती है।
विवेचना (क्मेबतपचजपवद):
यह विधि संयुग्मी फोकस विधि कहलाती है क्योंकि उत्तल लेंस के लिए न ऋणात्मक होता है, अतः
1ध्त्रि 1ध्अ. .1ध्नत्र 1ध्अ ़ 1ध्न
फलतः न व अ परस्पर व्यतिहारी (म्गबींदहंइसम) होते हैं अर्थात् वस्तु पिन का प्रतिबिम्ब यदि प्रतिबिम्ब पिन के स्थान पर बनता है तो प्रतिबिम्ब पिन का प्रतिबिम्ब वस्तु पिन के स्थान पर बनेगा।
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