प्रोटीन विकृतीकरण , denaturation of proteins , गोलाकार प्रोटीन (दानेदार) , रेशेदार , ग्लुको , न्युक्लियो , क्रोमो प्रोटीन

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denaturation of proteins , प्रोटीन विकृतीकरण , गोलाकार प्रोटीन (दानेदार) , रेशेदार , ग्लुको , न्युक्लियो , क्रोमो प्रोटीन :-

प्रोटीन की संरचना (structure of protein) : इसे निम्न प्रकार बनाया जाता है –

[A] प्रोटीन की प्राथमिक संरचना

[B] प्रोटीन की द्वितीयक संरचना

[i] α – हेलिक्स संरचना

[ii] β- प्लेटेड शीट संरचना

[C] प्रोटीन की तृतीयक संरचना

[D] प्रोटीन की चतुर्धातुक संरचना

[A] प्रोटीन की प्राथमिक संरचना :

प्रश्न : प्रोटीन की प्राथमिक संरचना किसे कहते है , समझाइये।

उत्तर : विभिन्न अमीनो अम्ल की संख्या व उनके जुड़े के अनुक्रम को व्यक्त करना , प्रोटीन की प्राथमिक संरचना कहलाती है।

सर्वप्रथम 1952 व 1984 में फ्रेडरिक सेंगर नामक वैज्ञानिक ने हीमोग्लोबिनइन्सुलिन में एमिनो अम्ल का एक निश्चित क्रम ज्ञात किया।

उदाहरण : हीमोग्लोबिन में 574 अमीनो अम्ल एक निश्चित क्रम में जुड़े होते है , यदि इनमे से एक भी एमिनो अम्ल का क्रम परिवर्तित हो जाता है तो सिकिल सेल एनीमिया नामक रोग हो जाता है।

इस रोग में गोलाकार आरबीसी जल निष्कासित कर हसियाकार हो जाती है। इस रोग से ग्रसित बच्चा रोता है तो उसकी आवाज बिल्ली के समान होती है।

एमिनो अम्ल की श्रृंखला – val-his-leu-thr-pro-glu-glu-lys

हीमोग्लोबिन में सिकल सेल अनीमिया – val-his-leu-thr-pro-val-glu-lys

अमीनो अम्लो की खोज के लिए फ्रेडरिक सेंगर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

[B] प्रोटीन की द्वितीयक संरचना : वे प्रोटीन जिनमे पोलीपेप्टाइड इकाइयाँ एक दूसरे से अंतरआण्विक बलों द्वारा जुड़कर जिस प्रोटीन का निर्माण करती है उसे प्रोटीन की द्वितीयक संरचना कहते है।

इन्हें निम्न भागो में बांटा गया है –

[i] α – हेलिक्स संरचना

[ii] β- प्लेटेड शीट संरचना

[i] α – हेलिक्स संरचना : सर्वप्रथम प्रोटीन के इस मॉडल को लिनियस पालिंग के द्वारा 1951 में दिया गया।

वे द्वितीयक प्रोटीन जिनमे पोली पेप्टाइड इकाइयाँ एक दूसरे से सर्पिलाकार अन्तराआण्विक बलों द्वारा जुड़कर रिबन के समान संरचना बनाते है तो इसे प्रोटीन की α – हेलिक्स संरचना कहते है।

  • यह प्रोटीन सर्पिलाकार रिबन के समान होती है।
  • यह प्रोटीन दृढ होता है।
  •  यह प्रोटीन दक्षिणावृत होता है।
  • इस प्रोटीन में मुक्त घूर्णन नहीं पाया जाता है।

उदाहरण : बाल , ऊन

[ii] β- प्लेटेड शीट संरचना या लहरियेदार : वे द्वितीयक प्रोटीन जिनमे पोली पेप्टाइड इकाईयाँ परतों के रूप में अंतराण्विक बलों से जुड़कर जिस प्रोटीन का निर्माण करते है उसे प्रोटीन की परतीय संरचना कहते है।

इस प्रोटीन को β-लहरियेदार प्रोटीन के नाम से भी जाना जाता है।

( i) यह प्रोटीन परतों में पाया जाता है।

(ii) यह प्रोटीन मुलायम होता है।

(iii) इस प्रोटीन में परते एक दुसरे के साथ समानान्तर व प्रतिसमानान्तर रूप में पायी जाती है।

(iv) इसमें परतें एक दूसरे पर फिसलती है।

उदाहरण : रेशम

[C] प्रोटीन की तृतीयक संरचना : वे प्रोटीन जिनमे पोलीपेप्टाइड इकाइयों अंतर आण्विक बलों द्वारा जुड़कर फोल्ड्स और लूप बनाती है जो आपस में त्रिविम संरचना द्वारा जुड़कर जिस प्रोटीन का निर्माण करती ई , उसे प्रोटीन की तृतीयक संरचना कहते है।

उदाहरण : गोलाकार प्रोटीन , रेशेदार प्रोटीन

[D] प्रोटीन की चतुष्क संरचना : वे प्रोटीन जिनमे पोली पेप्टाइड इकाइयां अंतर आण्विक बलों द्वारा उप इकाइयों का निर्माण करती है। यह उप इकाइयाँ आपस में त्रिविम संरचना द्वारा जुड़कर जिस प्रोटीन का निर्माण करती है।

उसे प्रोटीन की चतुष्क संरचना कहते है।

इस प्रोटीन में अंगो का निर्माण होता है।

उदाहरण : नाख़ून का निर्माण

प्रश्न : प्रोटीन को आण्विक संरचना के आधार पर कितने भागों में बाँटा गया है ? समझाइये। 

उत्तर : आणविक संरचना के आधार पर प्रोटीन को निम्न दो भागों में बांटा गया है –

(i) गोलाकार प्रोटीन (दानेदार प्रोटीन)

(ii) रेशेदार प्रोटीन

 गोलाकार प्रोटीन  रेशेदार प्रोटीन
 1. यह गोल प्रोटीन होता है।  यह रेशा प्रोटीन होता है।
 2. यह जल में विलेय होता है।  यह जल में अविलेय होता है।
 3. यह अम्ल , क्षार और लवण में विलेय होता है।  यह अम्ल , क्षार और लवण में अविलेय होता है।
 4. यह मुलायम प्रोटीन होता है।  यह दृढ प्रोटीन होता है।
 5. दुर्बल अन्तराण्विक बल पाया जाता है।  इनमे प्रबल अंतराआण्विक बल पाया जाता है।
 उदाहरण : एल्युमिन (अंडे का तरल प्रोटीन) , हार्मोन (इंसुलिन) , हीमोग्लोबिन  उदाहरण : मायोसिन (माँसपेशियाँ) , किरेटीन (बाल , नाख़ून व त्वचा)

प्रश्न : जल अपघटन के आधार पर प्रोटीन कितने प्रकार के होते है ? समझाइये।

उत्तर : जल अपघटन के आधार पर प्रोटीन निम्न दो प्रकार के होते है –

  1. सरल प्रोटीन
  2. संयुक्त प्रोटीन
  3. सरल प्रोटीन: वे प्रोटीन जो जल अपघटित होकर एमिनो अम्ल देते है , सरल प्रोटीन कहलाते है।

उदाहरण : एल्युमिन (अंडे का तरल प्रोटीन)

  1. संयुक्त प्रोटीन: वे प्रोटीन जिनमे प्रोटीन के साथ साथ अप्रोटीन भाग भी पाया जाता है। तो उन्हें संयुक्त प्रोटीन कहते है।

प्रोटीन में पाए जाने वाले अप्रोटीन भाग को प्रोस्थेटिक समूह के नाम से जाना जाता है।

यह निम्न प्रकार के होते है –

(A) ग्लुको प्रोटीन : इसमें प्रोस्थेटिक समूह के रूप में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।

उदाहरण : मायसीन

(B) न्युक्लियो प्रोटीन : इसमें प्रोस्थेटिक समूह के रूप में न्यूक्लिक अम्ल पाए जाते है।

उदाहरण : डीएनए ,  RNA

(C) क्रोमो प्रोटीन : इसमें प्रोस्थेटिक समूह के रूप में वर्णक पाए जाते है।

उदाहरण : हीमोग्लोबिन , क्लोरोफिल

प्रश्न : प्रोटीन का विकृतिकरण किसे कहते है ?

उत्तर : प्रोटीन को अम्ल , क्षार , लवण या धातु के साथ गर्म करने पर यह रबड़ के समान संरचना में बदल जाता है तथा इसमें उपस्थित जल अधिशोषित हो जाता है।

विकृतिकरण में होने वाले परिवर्तन :

  1. विकृतीकरण की क्रिया में प्रोटीन की प्राथमिक संरचना में कोई परिवर्तन नहीं होता परन्तु प्रोटीन की अद्वितीयक व तृतीयक संरचनाएं टूट जाती है।

यह एक अनुत्क्रमणीय क्रिया है।

इसमें एंजाइम निष्क्रिय हो जाते है।

इस क्रिया में जैव सक्रियता नष्ट हो जाती है।

उदाहरण : अंडे को गर्म करने पर इसमें उपस्थित तरल प्रोटीन रबड़ के समान संरचना में बदल जाते है तथा इसमें उपस्थित जल अधिशोषित हो जाता है। इसकी प्राथमिक प्रोटीन संरचना में कोई परिवर्तन नहीं होता है परन्तु द्वितीयक व तृतीयक प्रोटीन संरचनायें टूट जाती है।

विकृतिकरण के उपयोग : हमारे शरीर में रक्त सीरम के विकृतीकरण द्वारा शरीर में ग्लूकोज व यूरिया की मात्रा का पता लगाया जाता है।