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क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोस की परिभाषा क्या है | (crystalline and non crystalline solids) क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर
ठोस : वे पदार्थ जिनका आयतन , आकार , द्रव्यमान स्थिर रहे और इनके कण अर्थात अणु , परमाणु या आयन की स्थिति समय के साथ नियत रहे , कणों के मध्य की दूरी बहुत कम हो , अन्तराण्विक बल अधिकतम हो तो ऐसे पदार्थों को ठोस कहते है।
ठोस दो प्रकार के होते है –
1. क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solids)
2. अक्रिस्टलीय ठोस (non crystalline solids)
1. क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solids)
2. अक्रिस्टलीय ठोस (non crystalline solids)
अक्रिस्टलीय ठोसों में अतिशीतित द्रव का गुण पाया जाता है अर्थात ये ठोस द्रव की तरह बहने का गुण का प्रदर्शित करते है लेकिन इन ठोसों में यह बहने का गुण कम पाया जाता है।
इनमें शीतलन वक्र सतत पाया जाता है।
इनमें गलनांक का मान निश्चित नहीं होता है।
अक्रिस्टलीय ठोस प्राय द्रवों को अचानक और तेजी से ठंडा करने पर बने ठोस होते है और इन्हें उच्च ताप देने पर ये पिघलना शुरू हो सकते है।
उदाहरण : रबर , कांच और प्लास्टिक आदि अक्रिस्टलीय ठोस के उदाहरण है।
क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर (Difference Between Crystalline and Non Crystalline Solids)
| क्रिस्टलीय ठोस | अक्रिस्टलीय ठोस |
| क्रिस्टलीय ठोसों में अवयवी कणों की निश्चित व्यवस्था होती है। | अक्रिस्टलीय ठोसों में अवयवी कणों की निश्चित व्यवस्था नहीं होती है। |
| इनकी ज्यामिति और आकृति निश्चित होती है। | इनकी ज्यामिति और आकृति निश्चित नहीं होती है। |
| इन ठोसों का गलनांक निश्चित होता है अर्थात ये एक निश्चित ताप पर पिघल जाते है। | इन ठोसों का गलनांक निश्चित नहीं होता है , इनके लिए गलनांक ताप की एक रेंज होती है और इस रेंज में ये ठोस पिघलते है। |
| इन ठोसों में अवयवी कणों की व्यवस्था दीर्घ परासी होती है। | इन ठोसों में अवयवी कणों की व्यवस्था लघु परासी होती है। |
| ये ठोस सम दैशिक होते है अर्थात इन ठोसों में सभी दिशाओं में समान भौतिक गुण पाए जाते है। | ये ठोस विषम दैशिक होते है अर्थात इन ठोस में सभी दिशाओं में अलग अलग भौतिक गुण पाए जा सकते है। |
| इन्हें वास्तविक ठोस कहते है। | इन्हें अतिशीतित ठोस या आभासी ठोस कहा जाता है। |
| उदाहरण : क्वार्टज़ , हीरा , NaCl आदि। | उदाहरण : काँच , जेल , प्लास्टिक , पॉलीमर आदि। |
क्रिस्टलीय ठोस और अक्रिस्टलीय ठोस (crystalline solid and amorphous solids in hindi)
ठोसों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है।
1. क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solids)
2. अक्रिस्टलीय ठोस (amorphous solids)
1. क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solids) :
- क्रिस्टलीय ठोसो में अवयवी कणों (अणु , परमाणु या आयन) की एक निश्चित तथा नियमित व्यवस्था होती है।
- अवयवी कणों की यह व्यवस्था दीर्घ परासी होती है अर्थात कणों की व्यवस्था का एक निश्चित पैटर्न होता है तथा इस पैटर्न की सम्पूर्ण क्रिस्टल में समान अंतराल पर पुनरावृत्ति होती है।
उदाहरण के लिए NaCl , KCl , Na2SO4 , K2CO3 , Fe , Au , Cu , क्वार्ट्ज आदि।
- क्रिस्टलीय ठोसों के गलनांक निश्चित होते है तथा उनके शीतलन वक्र असंतत होते है।
- क्रिस्टलीय ठोस वास्तविक ठोस (true solids) कहलाते है।
- क्रिस्टलीय ठोस साधारणतया लघु क्रिस्टलों की बहुत अधिक संख्या का समूह होता है।
- क्रिस्टलीय ठोस विषम दैशिक (anisotropic) प्रकृति के होते है।
2. अक्रिस्टलीय ठोस (amorphous solids) :
- अक्रिस्टलीय ठोसों में अवयवी कणों की कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होती तथा न ही कोई निश्चित ज्यामिति और आकृति होती है।
- इन ठोसों में अवयवी कणों की व्यवस्था लघु परासी होती है।
- इन ठोसों में अवयवी कणों की व्यवस्था का एक अनियमित पैटर्न होता है जिनकी पुनरावृति कम दूरी तक ही पायी जाती है।
- अक्रिस्टलीय ठोसों के गलनांक निश्चित नहीं होते है। इनके शीतलन वक्र सतत होते है।
- अक्रिस्टलीय ठोसों की संरचना द्रवों के समान होती है , इनमें द्रवों के समान बहने (प्रवाह) की प्रकृति होती है लेकिन प्रवाह बहुत ही मंद होता है इसलिए इन्हें अतिशितित द्रव (supercooled liquid) अथवा आभासी ठोस (pseudo solid) कहा जाता है।
- अक्रिस्टलीय ठोस समदैशिक प्रकृति के होते है।
- कुछ अक्रिस्टलीय ठोसों को पिघलाकर धीरे धीरे ठण्डा होने पर वे क्रिस्टलीय ठोस में परिवर्तित हो जाते है।
- कांच अक्रिस्टलीय ठोस है। इनका उपयोग घरेलू तथा प्रयोगशाला के उपकरण बनाने , लैंस , सजावटी सामान आदि बनाने में किया जाता है।
- प्राकृतिक तथा संश्लेषित दोनों प्रकार के रबर अक्रिस्टलीय ठोस है। इनका उपयोग टायर , ट्यूब , जूते , खिलौने आदि बनाने में किया जाता है।
- अक्रिस्टलीय सिलिकोन द्वारा सूर्य के प्रकाश को विद्युत में बदलने हेतु इनका उपयोग फोटो वोल्टिक सेल में किया जाता है।
- संश्लेषित बहुलक अक्रिस्टलीय होते है और इनका विभिन्न क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोग होता है।
क्रिस्टलीय ठोस एवं अक्रिस्टलीय ठोसों के गुणों में अन्तर (difference between crystalline and amorphous solid in hindi)
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