JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now

हिंदी माध्यम नोट्स

Categories: इतिहास

सिनेमैटोग्राफी एक्ट क्या है ? cinematograph act 1952 in hindi भारतीय सिनेमेटोग्राफ अधिनियम 1952

भारतीय सिनेमेटोग्राफ अधिनियम 1952 सिनेमैटोग्राफी एक्ट क्या है ? cinematograph act 1952 in hindi ? 

विवादास्पद फिल्मों का दौर
विवादास्पद फिल्मों में से एक फिल्म शेखर कपूर द्वारा 1994 में निर्मित बैंडिट क्वीन है। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को नग्नता और अश्लीलता दर्शाने के कारण प्रतिबंधित कर दिया था।
दीपा मेहता की फिल्म वाॅटर में 1930 के दशक की विधवाओं के जीवन और समाज से उनके बहिष्करण का चित्रण किया गया था, जिसने सदी का सबसे बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। भारत के अनेक सिनेमाघरों में इसे प्रतिबंधित कर दिया था। दीपा मेहता की ही एक और फिल्म फायर, जिसका निर्माण वर्ष 1996 में किया गया था, जिसमें दो भाभियों के बीच, ‘अप्राकृतिक’ समलैंगिक सम्बन्ध दिखाए जाने के आधार पर वह प्रतिबंधित कर दी गयी थी। फिल्म निर्देशिका और दोनों प्रमुख अभिनेत्रियों को शिव सेना इत्यादि जैसे कट्टर हिंदू संगठनों से हत्या की धमकियां भी मिली थी।
मद्रास कैफे जैसी फिल्में जो श्रीलंका के गृह युद्ध पर आधारित थी उसे श्रीलंकाई सरकार के कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा और उसे श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम के कुछ भागों में प्रतिबंधित कर दिया गया। एक और निर्देशक अनुराग कश्यप ने भी बहुत विवादास्पद फिल्म निर्माण किये हैं। उनकी फिल्म पांच को सेंसर बोर्ड ने प्रतिबंधित कर दिया था क्योंकि इसमें ड्रग्स का अत्यधिक दुरुपयोग, हिंसा और अभद्र भाषा का चित्रण किया गया था। एक और फिल्म ब्लैक फाईडे जो मुंबई के बम्ब विस्फोटों पर आधारित थी, उस पर बम्बई उच्च न्यायालय ने प्रतिबंध लगा दिया था। परन्तु मुकदमा समाप्त होने के पश्चात् इसके लिए सीमित सिनेमाघरों में प्रदर्शन की अनुमति मिल गयी थी। वर्तमान समय में भी, भारत सरकार ने कई फिल्मों को धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाने के कारण प्रतिबंधित कर दिया है। वर्ष 2014 में, बाबा राम रहीम की फिल्म मैसेंजर आॅफ गाॅड ने भी उत्तर भारत में बहुत अव्यवस्था का वातावरण पैदा किया था। इसी प्रकार से मुस्लिम समूहों ने तमिलनाडु के कुछ भागों में कमल हसन की फिल्म विश्वरूपम को लेकर बवाल खड़ा कर दिया था, क्योंकि कथित रूप से इसने उनकी भावनाओं को आहत पहुंचाया था। परन्तु भारतीय सेंसर बोर्ड ने इसके प्रदर्शन की अनुमति प्रदान कर दी थी, यद्यपि इसके विरुद्ध हिंसा की घटनाओं की रिपोर्ट भी आई थी। इसी प्रकार परजानिया (2005), जो गुजरात के दंगों पर आधारित थी, को भले ही राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ, पर उसका प्रदर्शन गुजरात और भारत के कुछ सिनेमाघरों में नहीं हुआ था।
विवादास्पद फिल्मों की वजह से केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड या ‘सेंसर बोर्ड’ हाल के दिनों में बहुत चर्चा में रहा है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां और उनकी एक विचारधारा के प्रति आस्था विवादास्पद रही है। अभिरुचि, नैतिकता और सार्वजनिक भावना की परिभाषा और व्याख्या को लेकर गम्भीर प्रश्न उठाये गये हैं। यह सर्वविदित है कि समय के साथ सामाजिक प्राथमिकताओं में परिवर्तन आते हैं, इसलिए ब्ठथ्ब् को इन परिवर्तनों को समझना चाहिए और उनकी कार्यशैली में बहुत अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है। एक वास्तविक, जीवंत लोकतंत्र की रचना के लिए कलात्मक रचनात्मकता और स्वतन्त्रता को प्रोत्साहित करना ही होगा।

भारतीय सिनेमेटोग्राफ अधिनियम 1952
फिल्मों को प्रमाणित करने के लिए भारत सरकार ने भारतीय सिनेमेटोग्राफ अधिनियम, 1952 पारित किया। इसका मुख्य कार्य सेंसर बोर्ड आॅफ फिल्म सर्टिपिफकेशन (सी.बी.एफ.सी.) या भारत के सेंसर बोर्ड का संविधान और कार्यशैली का निर्धारण करना था।
इस अधिनियम के तहत सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष और कार्य निष्पादन में उनकी सहायता के लिए एक सदस्य मंडल (बारह से कम नहीं और पचीस से अधिक नहीं) की नियुक्ति का प्रावधान है। बोर्ड को एक फिल्म की समीक्षा करने के पश्चात् यह निर्णय लेना होता है कि अमुक फिल्म को किसी भौगोलिक क्षेत्र, आयु वर्ग, धार्मिक वर्ग या राजनीतिक समूह के प्रति अपमान/अभद्रता के आधार पर प्रदर्शन से रोका जा सकता है या नहीं। यह आवेदक की फिल्म को प्रमाणित करने से पहले उसमें परिवर्तन या कांट-छांट करने का निर्देश भी दे सकते है। यदि वांछित परिवर्तन नहीं किये जाते हैं तो, सेंसर बोर्ड उस फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर सकता है।
यद्यपि फिल्मों को प्रमाणित करने का विषय केन्द्रीय सरकार के आधीन विषय है, परन्तु सेंसरशिप को लागू करने का कार्य राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्रा में आता है। फिल्मों का प्रमाणीकरण निम्नलिखित आधार पर होता हैः

श्रेणी प्रामाणिकता
यू (U) व्यापक प्रदर्शन
ए (A) केवल वयस्कों के लिए सीमित प्रदर्शन
वर्ष 1983 में सिनेमाटोग्राफ (प्रमाणिकता) नियमों में सुधार किया गया और उनमे वर्तमान श्रेणियों में दो अन्य श्रेणियाँ भी जोड़ी गयी हैं, जो इस प्रकार हैंः
यूए (U/A) असीमित व्यापक प्रदर्शन, परन्तु 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता पिता की निगरानी आवश्यक
एस (S) केवल विशेषज्ञ दर्शकों जैसे डाक्टर, इंजीनियर इत्यादि के लिए प्रदर्शन।

1952 के इस अधिनियम में एक और प्रमुख प्रावधान है फिल्म सर्टिफिकेशन एपेलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना ;थ्ब्।ज्द्ध के बारे में। इसकी स्थापना इस अधिनियम के अनुच्छेद 5D के अंतर्गत की गयी है, जिसका गठन विशेष रूप से सेंसर बोर्ड (सी.बी.एपफ.सी.) के निर्णय से असंतुष्ट पक्षों की अपील सुनने के लिए किया गया था, जो अपनी फिल्म की पुनः समीक्षा की मांग कर सकते हैं। 1952 के अध्निियम के तहत 3 साल से कम उम्र के बच्चे माता-पिता के संरक्षण में “A” एवं “S” श्रेणी की फिल्म भी देख सकते हैं।

दक्षिण भारतीय सिनेमा
दक्षिण भारतीय सिनेमा को एकल उद्योग के रूप में दक्षिण भारत के पांच फिल्म उद्योगों, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और टुलू (तटीय कर्नाटक) फिल्म उद्योगों को सामूहिक रूप से संदर्भित करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। 2010 के आंकड़ों के अनुसार अन्य सभी भारतीय भाषाओं में 588 फिल्मों की तुलना में दक्षिण भारतीय भाषाओँ में 723 फिल्मों का निर्माण किया गया था।
तेलुगु और तमिल फिल्म उद्योग उनमें सबसे बड़े हैं। एक ओर जहां कन्नड़ और तेलुगु फिल्में घरेलू दर्शकों के लिए बनाई जाती हैं, वहीं तमिल और मलयालम फिल्मों की मांग विदेशों में बड़ी संख्या में बसे प्रवासियों में भी है। दक्षिण भारतीय सिनेमा ने साहित्य, पौराणिक कथाओं, लोककथाओं के विभिन्न श्रेष्ठ कृतियों के विषयों को अपनाया है।
तेलुगु सिनेमा ने पौराणिक विषयों पर आधारित कई फिल्मों का निर्माण किया है। आंध्रप्रदेश में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों की कहानियां बहुत लोकप्रिय हैं। एन.टी. रामाराव प्रमुख रूप से अपनी कृष्ण, राम, शिव, अर्जुन और भीम जैसी भूमिकाओं की प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध थे। एन.टी. आर ने अपने कैरियर में 17 फिल्मों में कृष्ण की भूमिका निभाई थी। वह एक सफल राजनेता भी बने।
पौराणिक कथाओं की प्रस्तुति कन्नड़ और तमिल फिल्मों में भी पायी गयी हैं। सफल पौराणिक फिल्मों में ‘बाबरूवाहन’ और ‘रामनजनेय युद्ध’ हैं, जिनमें महान अभिनेता राजकुमार नायक की भूमिका में थे। प्रख्यात निर्देशक ऐ.पी. नागराजन द्वारा निर्देशित तमिल पिफल्म ‘थिरुविलाइयादल’ बहुत सफल फिल्म थी। प्रशंसित अभिनेता शिवाजी गणेशन ने इस उत्कृष्ट फिल्म में शिव की भूमिका बहुत कुशलता से निभाई थी।
हालाँकि सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर आधारित फिल्में भी दक्षिण भारतीय सिनेमा के एक प्रमुख घटक हैं। कथानकों में सम्मलित मुद्ये – भ्रष्टाचार, असंयमित सत्ता विन्यास, व्याप्त सामजिक संरचनाएं और उसकी समस्याएं, बेरोजगारी, दहेज, पुनर्विवाह, महिलाओं पर हिंसा आदि का अनावरण किया और उनके प्रति लोगों के विचारों को चुनौती दी और पुनः सोचने को विवश किया। 1940-1960 के दशक की पिफल्मों में राजनीतिक झलक भी थी, जिन्हें प्रचार के लिए उपयोग किया गया था।
विषयों (थीम) में प्रेम, बदला, अपराध, अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष, पारिवारिक ड्रामा आदि भी सम्मलित थे। इस प्रकार की फिल्मों के अभिनेता मोटे तौर पर दो प्रकार के होते है – आवमक और ठिठोलिए (काॅमिकल)। हास्यपूर्ण चरित्र को प्रायः मुख्य पात्र के मित्र के रूप में ही प्रस्तुत किया जाता है। पात्रों ने अपना कट्टर वर्गीकरण बरकरार रखा है जैसे, नायक, नायिका, खलनायक और जोकर। हाल में सशक्त महिला चरित्रों को भी प्रस्तुत किया गया है।
उल्लेखनीय महानायकों की उदहारणात्मक सूची में सम्मलित हैंः एम.जी. रामचंद्रन, एन.टी. रामाराव, शिवाजी गणेशन, जेमिनी गणेशन, राजकुमार, विष्णुवर्धन, रजनीकांत, थिलकन, प्रेम नजीर, मोहन लाल, कमल हासन, म्म्मूटी, अजीथ कुमार, चिरंजीवी, महेश बाबू, जोसपफ विजय एवं कई अन्य ।

Sbistudy

Recent Posts

Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic

Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…

2 weeks ago

Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)

Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…

2 weeks ago

Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise

Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…

2 weeks ago

Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th

Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…

2 weeks ago

विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features

continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…

2 weeks ago

भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC

भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…

2 weeks ago
All Rights ReservedView Non-AMP Version
X

Headline

You can control the ways in which we improve and personalize your experience. Please choose whether you wish to allow the following:

Privacy Settings
JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now