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देशांतरण के कारण क्या है | देशांतरण के परिणाम बताइये causes of longitude in sociology in hindi

causes of longitude in sociology in hindi देशांतरण के कारण क्या है | देशांतरण के परिणाम बताइये ?

देशांतरण के कारण
यह जानना आवश्यक है कि क्यों कुछ लोग देशांतरण करते हैं, जबकि अन्य नहीं । महत्वपूर्ण कारक जो लोगों को देशांतरण करने के लिए प्रेरित करते हैं, को चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है: आर्थिक कारक, जनसांख्यिकी कारक, सामाजिक-सांस्कृतिक कारक और राजनीतिक कारक।

 आर्थिक
वस्तुतः, स्वैच्छिक देशांतरण का मुख्य कारण आर्थिक होता है । अधिकांश विकासशील देशों में निम्न कृषि आय, कृषिजन्य रोजगार और अर्धरोजगार आदि मुख्य कारक हैं जो देशांतरितों को रोजगार के बेहतर अवसरों के क्षेत्र की ओर प्रेरित करते हैं । जनसंख्या दबाव और परिणामी उच्च जन-भूमि औसत को गरीबी के एक महत्वपूर्ण कारकों के रूप में देखा जाता है जिसके कारण बाह्य देशांतरण होता है । इस प्रकार, लगभग हर अध्ययन यह इंगित करता है कि अधिकांश देशांतरित बेहतर आर्थिक अवसरों की खोज में ही निकले होते हैं । यह आंतरिक और अन्तर्राष्ट्रीय दोनों ही देशांतरणों के लिए एक समान सच है।

सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारकों, जो देशांतरण को प्रेरित करते हैं, को ‘‘स्थान छोड़ने के कारक‘‘ और ‘‘लोगों को आकर्षित करने के कारक‘‘ के रूप में परिभाषित किया जाता है । दूसरे शब्दों में इनके द्वारा यह जाना जाता है कि लोग जन्म स्थान छोड़कर, परिस्थितियों की बाध्यता द्वारा स्थान छोड़ने के बाद जाते हैं या वे नये स्थान के आकर्षक परिस्थितियों द्वारा सम्मोहित होकर देशांतरण करते हैं। आइए, इन कारकों की थोड़ी विस्तार से चर्चा करें ।

प) स्थान छोड़ने के कारक
स्थान छोड़ने के कारक वे हैं, जो विभिन्न कारणों से व्यक्ति को जन्म स्थान को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर जाने को बाध्य करते हैं । उदाहरण के लिए, गरीबीजन्य विपरीत आर्थिक स्थिति, निम्न उत्पादकता, बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों की समाप्ति और प्राकृतिक आपदाएं लोगों को बेहतर आर्थिक अवसरों की खोज में घर छोड़ने को बाध्य कर सकते हैं । अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रायोजित एक अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि श्रमिकों को कृषि कार्य छोड़कर अन्य रोजगार पेशे की तलाश में जाने का मुख्य कारक, उनकी गरीबी है। क्योंकि सामान्यतया कृषि में अर्थतंत्र के किसी अन्य क्षेत्र के मुकाबले आमदनी कम होती है। योजना आयोग के अनुमान के अनुसार ग्रामीण जनसंख्या का एक-तिहाई से ज्यादा भाग गरीबी रेखा के नीचे गुजर कर रहा है। जनसंख्या में हुई तीव्र वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति उपलब्ध कृषि क्षेत्र में कमी हुई और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारों और अर्ध-बेरोजगारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण लोग शहर की ओर ठेले जा रहे हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में आमदनी के वैकल्पिक साधनों की अनुपलब्धता भी देशांतरण का अन्य कारण है । इसके साथ-साथ संयुक्त पारिवारिक व्यवस्था और तत्संबंधी नियम जो संपत्ति के विभाजन पर रोक लगाए होते हैं, भी युवकों को काम की तलाश में शहरों की ओर देशांतरण करने का बाध्य करते हैं । यहाँ तक कि खेतों के उपविभाजन, जिससे इतने छोटे टुकड़े बनते हैं, जिस पर एक परिवार बसर नहीं कर सकता है, देशांतरण को बढ़ावा देता है ।

पप) लोगों को आकर्षित करने के कारक
लोगों को आकर्षित करने के कारक उन कारकों को कहते हैं, जो किसी क्षेत्र विशेष में देशांतरितों को आकर्षित करते हैं, यथा – बेहतर रोजगार के अवसर, उच्च मजदूरी दर, बेहतर काम की स्थितियाँ और जीवन की बेहतर सुविधाएँ इत्यादि । जब उद्योग, वाणिज्य और व्यापार का त्वरित विकास होता है, तो सामान्यतया नगर की ओर देशांतरण होता है। हाल के वर्षों में भारतीयों की संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और अब मध्य-पूर्व में बड़ी संख्या में लोगों के देशांतरण का कारण बेहतर रोजगार के अवसरों का उपलब्ध होना है। उच्च मजदूरी और जीवन की बेहतर सुविधाएँ, विभिन्न प्रकार के पेशों में अपने रुचि के अनुकूल काम पसंद करने की सुविधा आदि जीवन स्तर को ऊँचा उठाने में मदद करते हैं। कभी-कभी बेहतर सांस्कृतिक और अनुरजनिक प्रकारों और शहर की चकाचैंध भी देशांतरितों को नगरों की ओर आकर्षित करती हैं। तथापि, लोगों को आकर्षित करने के कारक मात्र ग्रामीण-शहरी देशांतरण में ही नहीं, अपितु अन्य प्रकार के आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय देशांतरण में भी प्रभावकारी होते हैं ।

कभी-कभी एक प्रश्न पूछा जाता है कि कौन-सा कारक ज्यादा महत्वपूर्ण है – स्थान छोड़ने के कारक या लोगों को आकर्षित करने के कारक । कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि स्थान छोड़ने के कारक या लोगों को आकर्षित करने के कारक की अपेक्षा अधिक शक्तिवान हैं क्योंकि शहरी आकर्षणों की अपेक्षा ग्रामीण समस्याएँ ही जनसंख्या के विस्थापन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती हैं । दूसरी ओर, वे जो लोगों को आकर्षित करने के कारकों को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं, शहरी पूँजी निवेश और परिणामी बढ़ते रोजगार और व्यापारिक अवसरों और शहरी जीवन क्रम के बढ़ते आकर्षण पर ज्यादा जोर देते हैं।

स्थान छोड़ने के कारक और लोगों को आकर्षित करने के कारकों को देशांतरण की धारणाओं के लिए वर्गीकृत करना देशांतरण के निर्धारकों के विश्लेषण में लाभकारी है, किंतु सिर्फ इन्हीं कारकों के माध्यम से तमाम देशांतरणकारी गतियों को व्याख्यायित नहीं किया जा सकता है । तथापि, कभी-कभी देशांतरण स्थान छोड़ने के कारक और लोगों को आकर्षित करने के कारकों से पृथक-पृथक प्रभावित न होकर संयुक्त रूप से प्रभावित होते हैं।

पपप) वापस भेजने वाले कारक
भारत में, और अन्य विकासशील देशों में भी, अन्य महत्वपूर्ण कारक जो देशांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं -‘‘वापस भेजने वाले कारक‘‘ हैं । भारत में, आशीष बोस के अनुसार, शहरी श्रम शक्ति अत्यधिक है और शहरी बेरोजगारी की दर काफी है और अर्ध बेरोजगारों की लम्बी कतारें हैं । ये सभी कारक ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में आने वाले देशांतरितों की नयी धारा को विपरीत रूप से प्रभावित करते हैं । वे इन्हें ‘‘वापस भेजने वाले कारक‘‘ के रूप में अभिहित करते हैं। वे कहते हैं कि अगर शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नये अवसर उत्पन्न होते हैं, और अगर किसी विशेष कुशलता की स्थिति नहीं हो, तो प्रथम व्यक्ति जो इसे हस्तगत करेगा वह है -शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाला सीमान्त रोजगार।

 सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक
ढकेलते और घींचते कारकों के अतिरिक्त देशांतरण में सामाजिक और सांस्कृतिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं । कभी-कभी पारिवारिक विग्रह भी देशांतरण का कारण बनता है। विकसित संचार व्यवस्थाएँ, यथा – परिवहन, रेडियो और दूरदर्शन का प्रभाव, सिनेमा, शहरीकृत शिक्षा और परिणामी प्रवृत्तियों और मूल्यों में परिवर्तन भी देशांतरण को बढ़ावा देते हैं ।

कभी-कभी राजनीतिक कारक भी देशांतरण को बढ़ावा या निरुत्साहित करते हैं। उदाहरण के लिए, हमारे देश में, ‘‘स्थानीय लोगों के लिए कार्यनीति‘‘ का राज्य सरकारों द्वारा स्वीकरण निश्चित रूप से अन्य राज्यों से देशांतरण को प्रभावित करेगा। बम्बई में शिव सेना का उत्थान और इसका देशांतरितों के प्रति घृणा और स्थानीय विशिष्ट राष्ट्रीयता के नाम पर यदा-कदा उभरती हिंसा, एक महत्वपूर्ण घटना है। कलकत्ता में भी बंगाली-मारवाड़ी संघर्ष का दूरगामी परिणाम होगा और अब आसाम और तमिलनाडु अन्य ऐसे उदाहरण हैं। इस प्रकार, राजनीतिक प्रवृत्ति और लोगों की दृष्टि भी बहुत हद तक देशांतरण को प्रभावित करती हैं। पंजाब और कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के कारण भी देशांतरण हुए हैं।

कोष्ठक 1ः देशांतरण के कारण
जनगणना के आँकड़ों का विश्लेषण
भारतीय जनगणना में देशांतरण के कारणों का आँकड़ा सर्वप्रथम 1981 की जनगणना में संग्रह किया गया। ये कारण निम्नांकित तालिका में दिए जा रहे हैं:
तालिका 1ः प्रत्येक लिंग का स्थायी देशांतरण वितरण प्रतिशत देशांतरण के कारणों के द्वारा, भारत, 1981
लिंग देशांतरण के कुल ग्रामीण से शहरी से शहरी से शहरी से
लिए कारण ग्रामीण ग्रामीण शहरी ग्रामीण
पुरुष रोजगार 30.79 19.49 47.49 41.12 27.00
शिक्षा 5.15 4.18 8.07 5.20 3.17
संबंधित 30.57 33.74 23.54 31.52 31.89
विवाह 3.05 5.46 1.17 0.99 2.23
अन्य 30.44 37.12 19.73 21.18 35.73
100.00 100.00 100.00 100.00 100.00
स्त्री रोजगार 1.92 1.13 4.20 4.46 3.34
शिक्षा 0.88 0.43 2.58 2.21 1.00
संबंधित 14.72 8.64 29.27 35.89 21.23
विवाह 72.34 81.73 51.53 43.56 59.33
अन्य 10.14 8.07 12.42 13.88 15.10
100.00 100.00 100.00 100.00 100.00
पुरुष देशांतरितों के ग्रामीण से शहरी और शहरी से शहरी आँकड़ों से यह स्पष्ट है कि रोजगार सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। इन देशांतरण धाराओं के अनुसार शिक्षा मात्र 3 से 8 प्रतिशत देशांतरण का कारण है। औरतों में, जैसा कि अनुमानित था, विवाह देशांतरण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है और उसके बाद संबंधित देशांतरण। रोजगार और शिक्षा औरतों के बहुत थोड़े देशांतरण का कारण है।

आर्थिक कारकों के अतिरिक्त, कभी-कभी शैक्षणिक अवसरों की कमी, चिकित्सकीय सुविधाएँ और पारंपरिक ग्रामीण संरचना की रुकावटों से बाहर निकलने की इच्छा के साथ-साथ अन्य सुविधाएँ भी लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों से बाहर ढकेलती हैं । तथापि, ढकेले जाने वाली स्थितियों से उत्पन्न सभी देशांतरण ग्रामीण क्षेत्रों में ही सीमित नहीं है, लोग अविकसित और अल्प समृद्ध से विकसित और समृद्ध क्षेत्रों की ओर देशांतरण करते रहे हैं।

अभ्यास
यह पता लगाइए कि आपके पड़ोस के दो परिवारों में, जब वे यहाँ आये तो कितने सदस्य शहर के बाहर पैदा हुए हैं और उनके यहाँ आने के पीछे क्या कारण थे? तब इन स्थितियों से देशांतरणों के कारणों और प्रकारों का विस्तारित करने की कोशिश करें। अपनी टिप्पणी की, अगर हो सके तो, अध्ययन केंद्र के अन्य छात्रों के साथ तुलना करें।

बोध प्रश्न 2
सही उत्तर पर टिक ( ) का निशान लगाइए ।
प) ग्रामीण लोगों के बाह्य देशांतरण के महत्वपूर्ण कारणों में एक हैः
क) जनसंख्या का बढ़ता दबाव
ख) ग्रामीण गरीबी
ग) ग्रामीण बेरोजगारी
घ) उपर्युक्त सभी ।
पप) कारक जो देशांतरण के लिए देशांतरितों को आकर्षित करते हैंः
क) ठेलते कारक
ख) घींचते कारक
ग) पीछे ठेलते कारक
घ) उपर्युक्त सभी।
पपप) निम्नांकित में से कौन देशांतरण का एक प्रकार नहीं है?
क) ग्रामीण से ग्रामीण
ख) ग्रामीण से शहरी
ग) शहरी से शहरी
घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।

बोध प्रश्न 2 उत्तर
क) घ
ख) ख
ग) घ

देशांतरण के परिणाम
देशांतरण के विभिन्न परिणाम होते हैं। तथापि, इस इकाई में चर्चित कुछ महत्वपूर्ण परिणाम हैं – आर्थिक, जनसांख्यिकी, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक। ये परिणाम लाभप्रद और नुकसानदेह, दोनों हैं । इनमें से कुछ छोड़े गए स्थान को और कुछ गंतव्य स्थान को प्रभावित करते हैं।

आर्थिक
अधिक श्रमिकों वाले प्रदेश से देशांतरण उस प्रदेश के श्रम की औसत उत्पादकता को बढ़ाने में मदद करते हैं क्योंकि इससे श्रम के कुशल और बेहतर उपयोग करने की प्रवृत्ति का विकास होता है । दूसरी ओर, ऐसी धारणा है कि देशांतरण उत्प्रवासन प्रदेश को विपरीत रूप से प्रभावित करता है और आप्रवासन क्षेत्र को लाभ पहुंचाता है और अपेक्षाकृत कम विकसित प्रदेश से विकसित प्रदेशों में कुशल लोगों के देशांतरण के कारण प्रादेशिक असमानता में वृद्धि होती है। किंतु अगर ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक अवसरों का अभाव है, तो अधिक समाज के उद्यमी सदस्यों के बहिर्गमन को नुकसान नहीं माना जा सकता है । जब तक देशांतरण अतिरिक्त श्रम को आकर्षित करता रहता है, यह उत्प्रवासन क्षेत्र को लाभ ही पहुँचाता है । इसका प्रतिकूल प्रभाव तभी पड़ता है, जब प्रदेश की प्रगति की कीमत पर मानव संसाधनों का उत्सारण होता है । अन्य महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि जब देशांतरण बेरोजगारों और अर्ध-बेरोजगारों का होता है तो यह क्षेत्र के बाकी बचे लोगों की स्थिति को सुधारने में मदद करता है क्योंकि प्रति व्यक्ति खपत में, देशांतरण के कारण वृद्धि होती है।

तथापि, श्रम शक्ति भेजने वाला क्षेत्र आर्क रूप से लाभान्वित होता है और क्योंकि देशांतरित पैसों के साथ लौटते हैं । भारत में, ग्रामीण आबादी का शहरों में आने के कारण शहरों से गाँवों की ओर धन गमन का स्थिर मार्ग प्रशस्त हुआ है। अधिकांश देशांतरित अकेले पुरुष होते हैं जो शहरी रोजगार प्राप्ति के बाद अपनी आमदनी का एक हिस्सा अन्य साधनों पर पल रहे अपने ग्रामीण परिवार के भरण-पोषण के लिए भेजते हैं । साथ ही, यह परिवार के बचत को भी प्रभावित करता है क्योंकि कभी-कभी देशांतरित अपने साथ पैसा (पारिवारिक बचत) लेकर जाते हैं, जो उनकी यात्रा और नये स्थान पर जाकर रहने के लिए आवश्यक होता है । हाल के समय में, मध्य-पूर्व में देशांतरण में हुई अचानक वृद्धि के कारण हमारे देश में विदेशी मुद्रा के प्रेषण में अत्यधिक वृद्धि हुई है । 1979 में यह पाया गया कि केरल जैसे छोटे राज्य का वार्षिक प्रेषण 4000 मिलियन रुपया था ।

खाड़ी देशों से आते पैसों के कारण गृह-निर्माण, कृषि-भूमि की खरीद और व्यापार और उद्योगों में निवेश हुआ । इसने पारिवारिक खपत बढ़ाने में भी योगदान दिया है । पैसे बच्चों की शिक्षा पर भी खर्च किए जाते रहे हैं । दूसरी ओर, लोगों के बहिर्गमन ने श्रम शक्ति के अभाव की स्थिति उत्पन्न कर मजदूरी में वृद्धि कर दी है ।

 जनसांख्यिकी
देशांतरण का, छोड़ते और गंतव्य प्रदेशों के उम्र, लिंग और पेशागत संयोजन पर सीधा असर पड़ता है। अविवाहित युवकों के देशांतरण के फलस्वरूप लिंग अनुपात में असंतुलन आया है। गाँवों से युवकों का पलायन अन्य समूहों, यथा – औरत, बच्चों और बूढ़ों के अनुपात की वृद्धि करता है । इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म दर में कमी आने की प्रवृत्ति आती है । ग्रामीण पुरुषों का अपनी पत्नी से लंबे समय के लिए पृथकता भी जन्म दरों में कमी का कारण बनती है।

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक
शहरी जीवन देशांतरितों में कतिपय सामाजिक परिवर्तन लाते हैं । ऐसे देशांतरित जो समय-समय पर लौटकर अपने जन्म स्थान जाते रहते हैं या किसी प्रकार के संपर्क में रहते हैं, के द्वारा भी कुछ नवीन विचार ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचते रहते हैं। अनेक अध्ययन लौटते देशांतरितों की गत्यात्मकता को तकनीकी परिवर्तन का कारण मानते हैं जो अपने साथ पैसा, ज्ञान और विभिन्न उत्पादन तकनीकों का अनुभव लाते हैं। जो कृषि का मशीनीकरण और व्यापारीकरण कर सकता है। एक बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, सेवानिवृत्ति के बाद अपने गाँवों को जाते हैं और इनका अपने गाँवों में प्रयोग करते हैं । शहरी और विभिन्न संस्कृतियों का संपर्क भी देशांतरितों की प्रवृत्ति में परिवर्तन का कारण होता है और उन्हें अधिक आधुनिक अभिविन्यास और उपभोक्ता संस्कृति का विकास करने को प्रेरित करता है।

दूसरी ओर देशांतरण जिसके कारण परिवार के वयस्क पुरुष लंबे समय के लिए परिवार से बाहर रहते हैं, बहुधा परिवार के विखंडन का कारण बन जाता है और औरतों और बच्चों को विभिन्न प्रकार के काम करने पड़ते हैं और परिवार के नीति निर्धारण में भागीदारी करनी पड़ती है । अध्ययनों ने केरल में परिवारों से पुरुषों की अनुपस्थिति के अनेक दुखद परिणाम दिखाए हैं। न्यूरोसिस, हिस्टीरिया और कुण्ठा देशांतरित पुरुषों की स्त्रियों में वृद्धि करता है । खाड़ी धूम ने परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य की बलि ली है।

बोध प्रश्न 3
प) किस प्रकार मजदूर भेजने वाला प्रदेश देशांतरण की प्रक्रिया से लाभान्वित होता है? लगभग सात पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
पप) देशांतरण के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक परिणामों के बारे में लिखिए। लगभग सात पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
पपप) सही उत्तर पर टिक () का निशान लगाइए ।
शरणार्थियों का विशाल संख्या में बहिर्गमनः
क) गन्तव्य देश के लिए कोई समस्या उत्पन्न नहीं कर सकता है।
ख) गन्तव्य देश के लिए आर्थिक समस्या उत्पन्न कर सकता है।
ग) गन्तव्य देश के लिए मात्र स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी समस्या उत्पन्न कर सकता है।
घ) शरणार्थियों के आयतन के अनुसार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है ।

 शरणार्थियों और विस्थापितों की समस्याएँ
कभी-कभी राजनीतिक और धार्मिक बाधाओं या युद्ध के कारण लोग बाध्य होकर पलायन करते हैं। ऐसी गलियाँ लोगों को पड़ोसी देशों की ओर ले जाकर शरणार्थी के रूप में खड़ा कर देती हैं। संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज ऐसे हर व्यक्ति को शरणार्थी घोषित करता है, जो ‘‘जाति, धर्म राष्ट्रीयता, किसी खास सामाजिक समूह या राजनीतिक धारणा की सदस्यता के कारण अत्याचार के भय से अपनी राष्ट्रीयता के देश से बाहर है और जो उपर्युक्त भय के कारण पुनः उसी देश में वापस जाने से कतराता है‘‘। (सं.रा. 1984) ।

इस प्रकार, बड़ी संख्या में लोगों का अंतर्राष्ट्रीय पलायन राजनीतिक, धार्मिक या जातीय चरित्र की बाध्यता के कारण हुआ है । शायद इस सदी का सबसे बड़ा पलायन भारतीय उपमहाद्वीप में ही हुआ है। 1947 में देश का भारतीय गणराज्य और पाकिस्तान के विभाजन ने प्रत्येक देश में एक दूसरे से बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करने को बाध्य किया । अनुमानतः लगभग 7 मिलियन लोग भारत से पाकिस्तान गए और लगभग 8 मिलियन पाकिस्तान से भारत आए। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के कारण भी बड़ी संख्या में लोग पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में शरणार्थी बनकर आए और प्रदेश के लिए एक स्थायी समस्या बनकर रह गए हैं । ठीक उसी प्रकार जैसे बिहारी मुसलमानों की समस्या पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए है ।

इतिहास के कुछ सर्वाधिक विशाल बलात अंतर्राष्ट्रीय देशांतरण एशिया में हाल के समय में हुए हैं। उदाहरण के लिए, 1975 के बाद के बारह वर्षों में लगभग 1.7 मिलियन से अधिक शरणार्थियों ने वियतनाम, कंपूचिया और लाओस से पलायन किया है। 1979 की रूस के अफगानिस्तान में हस्तक्षेप के फलस्वरूप 2.7 मिलियन लोग भागकर पाकिस्तन में और 1.5 मिलियन ईरान में स्थायी तौर पर रहने को चले गए । इनमें से अधिकांश अब तक पड़ोसी देशों में तंबुओं में रह रहे हैं । हाल में, श्रीलंका में उत्पन्न राजनीतिक व्यवधानों के कारण बड़ी संख्या में तमिल भारत आए हैं और तमिलनाडु में रह रहे हैं ।

यह देखा जाता है कि मानवता के आधार पर अक्सर शरणार्थियों को विभिन्न देशों की सरकार द्वारा आश्रय दिया जाता है । तथापि, शरणार्थियों का अचानक वेग स्थानीय समाज पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न करता है । इसके कारण आवश्यक वस्तुओं की कमी, पारिस्थितिकी असंतुलन और स्वास्थ्यजन्य विपदाएँ शरण देने वाले देश के समक्ष समस्या बनकर खड़ी होती है। विशाल आकार और विभिन्न आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक आयाम अनेक समस्याओं को उत्पन्न करते हैं, खासकर गंतव्य देश के लिए । कभी-कभी वे गंतव्य देश में राजनीतिक अशांति उत्पन्न कर देते हैं । वे समूहों का निर्माण कर स्वयं को संगठित करते हैं और सरकार को छूट देने के लिए दबाव डालते हैं । उदाहरण के लिए, इंग्लैण्ड, कनाडा और श्रीलंका देशांतरण के कारण जातीय संकट का सामना कर रहे हैं। कभी-कभी यह स्थानीय लोगों और देशांतरितों के मध्य भिड़त भी करा देता है । श्रीलंका इसका ज्वलंत उदाहरण है ।

देशांतरण नीति
भारत में अंतर्राष्ट्रीय और आंतरिक देशांतरण के प्रतिमान को नियंत्रित करने के संबंध में अल्प ध्यान दिया गया है । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश में आप्रवासियों और उत्प्रवासियों का नवीनतम आँकड़ा भी उपलब्ध नहीं है, यद्यपि अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय देशांतरण पारपत्र और वीजा अनुमति इत्यादि के द्वारा नियंत्रित होता है । विभिन्न मंचों से भारत से मेघा-उत्सारण से संबंधित प्रश्न उठाए गए हैं, किंतु इसे रोकने के संदर्भ में कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है क्योंकि देश में पर्याप्त संख्या में शिक्षित बेरोजगार पड़े हुए हैं । यह भी हाल ही की घटना है कि भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने भारतीय उत्प्रवासियों के हित की रक्षा के लिए एक सेल की स्थापना की है जो अन्य देशों में, खासकर मध्य-पूर्व में कुशल श्रमिक, अर्ध-कुशल श्रमिक और अकुशल श्रमिक की तरह कार्यरत है।

राष्ट्रीय स्तर पर सरकार ने आंतरिक देशांतरण से संबंधित समस्याओं के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई है और इस प्रकार किसी नीति का निर्माण नहीं हो पाया है । यद्यपि ग्रामीण से ग्रामीण देशांतरण जैसा कि पूर्व में बताया गया है, ने पुरुषों और स्त्रियों में देशांतरण की मुख्य धारा का निर्माण किया है । यद्यपि 1981 की जनगणना के अतिरिक्त इस देशांतरण को प्रभावित करते कारकों के संबंध में अति अल्प जानकारी है । चूँकि ग्रामीण से ग्रामीण देशांतरण का अधिकांश भाग संबंधित या अस्पष्ट कारणों से है, इसे ज्यादा स्पष्टता के साथ समझना आवश्यक है ।

देश के विभिन्न भागों में, खासकर उन भागों में जो हरित क्रांति से गुजर रहे हैं, कृषि श्रमिकों का मौसमी देशांतरण बड़ी संख्या में होता है । इन देशांतरितों के आयतन और उनके ठहरने की अवधि के बारे में कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीण से शहरी देशांतरण, ग्रामीण से ग्रामीण देशांतरण के बाद सबसे अधिक संख्या में होता है और यह शहरीकरण नीतियों और कार्यक्रमों द्वारा प्रभावित होता है। चैथी और पाँचवीं पंचवर्षीय योजनाओं में आर्थिक गतिविधियों के स्थानिक वितरण के सामंजस्य पर बल दिया गया था और बड़े नगरों के अनियंत्रित विकास को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था ।

नगरों (मिलियन आबादी से ऊपर) के त्वरित विकास से उत्पन्न समस्याओं को स्वीकारते हुए सरकार अब ऐसी नीतियों को लागू करना चाह रही है, जो बड़े नगरों की ओर देशांतरण को नियंत्रित करने में सहयोगी होंगी । 1980 के दशक में छोटे शहरों के पर्याप्त संरचनात्मक और अन्य सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया था ताकि वे ग्रामीण प्रदेशों के विकास और सेवा केंद्र के रूप में अपनी भूमिका अदा कर सकें। योजना आयोग ने छोटे और मध्य दर्जे के शहरों में नये उद्योगों और अन्य वाणिज्यिक और पेशागत संस्थानों की आवश्यकता पर बल दिया । इस खंड की इकाई 6 में हम इन समस्याओं की विस्तार से समीक्षा करेंगे।

इस प्रकार, किसी विशेष देशांतरण नीति के अभाव में भविष्य के देशांतरण प्रवाह की दिशा के बारे में भविष्यवाणी करना कठिन है । तथापि, सरकार की छोटे, मध्यम और माध्यमिक नगरों के विकास पर बल देने की नीति को देखते हुए यह आशा की जाती है कि माध्यमिक नगर और मध्यम शहर भविष्य में अधिक देशांतरितों को आकर्षित कर पाएंगे । यद्यपि बढ़ते उद्योगों के साथ औद्योगिक नगर नये देशांतरितों को आकर्षित करते ही रहेंगे, शिक्षित युवक-युवतियों में छोटे शहरों और नगरों में सफेदपोश काम पाने की अधिक प्रवृत्ति रहेगी।

बोध प्रश्न 4
सही उत्तर पर टिक ( ) का निशान लगाएँ ।
प) हाल के वर्षों में भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने भारतीय उत्प्रवासियों के हित की रक्षार्थ एक सेल की स्थापना की है, जो कार्यरत हैः
क) दूसरे देशों में सिर्फ कुशल श्रमिकों के रूप में।
ख) दूसरे देशों में सिर्फ अकुशल श्रमिकों के रूप में।
ग) दूसरे देशों में सिर्फ अर्ध-कुशल श्रमिकों के रूप में।
घ) उपर्युक्त सभी ।
पप) सरकार की छोटे, मध्यम और मध्यस्थ नगरों को विकसित करने की प्रवृत्ति से यह आशा की जाती है किः
क) मध्यस्थ नगर भविष्य में अधिक देशांतरितों को आकर्षित करेंगे और बड़े नगरों का महत्व कम होता जाएगा।
ख) यद्यपि बड़े नगर देशांतरितों को आकर्षित करते रहेंगे किंतु शिक्षित युवक-युवतियों में छोटे शहरों और नगरों में सफेदपोश कार्य पाने की प्रवृत्ति अधिक होगी ।
ग) भविष्य में ग्रामीण से शहरी देशांतरण रुक जाएगा ।
घ) उपर्युक्त सभी सही हैं।

बोध प्रश्न 4 उत्तर
प) घ
पप) ख

Sbistudy

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