भारत की प्रमुख वाणिज्य फसलें कौनसी हैं what are cash crops in india in hindi examples

By   July 11, 2021

what are cash crops in india in hindi examples भारत की प्रमुख वाणिज्य फसलें कौनसी हैं ?
भारत की प्रमुख वाणिज्य फसलें हैं –
(अ) कपास, दालें, जूट और तिलहन
(ब) कपास, तिलहन, जूट और गन्ना
(स) चाय, रबर, तम्बाकू और जूट
(द) आलू, चाय, तम्बाकू और कपास
S.S.C. स्टेनोग्राफर परीक्षा, 2010
उत्तर-(ब)
भारत की प्रमुख वाणिज्य फसलें हैं-कपास, तिलहन, जूट, गन्ना और तम्बाकू इत्यादि जबकि प्रमुख रोपड़ फसलें हैं-चाय, कॉफी नारियल और रबर इत्यादि।
कीमत के संदर्भ में मांग लोच हैः.
(अ) लोच = मांग में: परिवर्तन/कीमत में: परिवर्तन
(ब) लोच = कीमत में: परिवर्तन/मांग में: परिवर्तन
(स) लोच = मांग में: परिवर्तन/पूर्ति में: परिवर्तन
(द) लोच = पूर्ति में: परिवर्तन/ कीमत में: परिवर्तन
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2013
उत्तर-(अ)
‘मांग की कीमत लोच‘ (Price Elasticity of Demand), किसी वस्तु की कीमत में सापेक्ष परिवर्तन की अनुक्रिया में उस वस्तु की खरीदी गई मात्रा में सापेक्ष परिवर्तन की माप को कहते हैं।
मांग लोच गुणांक =
मांगी गई मात्रा में समानुपातिक (प्रतिशत) परिवर्तन / कीमत में समानुपातिक (प्रतिशत) परिवर्तन

एक सूचना प्रौद्योगिकी विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), ‘नेक्स्सट जोन‘ स्थापित किया जा रहा है-
(अ) उत्तर प्रदेश के पनकी में
(ब) महाराष्ट्र के पनवेल में
(स) कर्नाटक के बंगलुरू में
(द) आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में
S.S.C.CPO परीक्षा, 2008
उत्तर-(ब)
सूचना प्रौद्योगिकी विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), ‘नेक्सट जोन‘ की स्थापना में मुंबई स्थित ‘मैराथन रियल्टी‘ (Marathon Realte Ltd.) का योगदान है। यह परियोजना महाराष्ट्र के पनवेल (मुंबई के पास) में स्थित है।
घटिया माल के संबंध में मांग की आय सापेक्षता/लोच कैसी/ कितनी होती है?
(अ) शून्य (ब) ऋणात्मक
(स) असीमित (द) धनात्मक
S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-I) परीक्षा, 2013
उत्तर-(ब)
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
फार्मला 1>e>0 द्वारा दर्शाई गई प्रत्यास्थता (इलास्टिसिटी) (e) क्या है?
(अ) पूरी तरह प्रत्यास्थ (ब) सापेक्षतया प्रत्यास्थ
(स) पूरी तरह अप्रत्यास्थ (द) सापेक्षतया अप्रत्यास्थ
S.S.C.  मल्टी टास्किंग परीक्षा, 2013
उत्तर-(द)
सूत्र प्रत्यास्थता (Elasticity)
E = ∞ पूरी तरह प्रत्यास्थ (Perfectly Elastic)
1<E<∞ सापेक्ष प्रत्यास्थ (Relatively Elastic)
E=1 Unit Elastic
0<E<1 सापेक्षता अप्रत्यास्थ (Relatively Inelastic)
E=0 पूर्ण अप्रत्यास्थ (Perfectly Inelastic)
जब किसी वस्तु की मांग में प्रतिशत परिवर्तन, उसके मूल्य में प्रतिशत परिवर्तन से कम होता है, तो उसकी मांग क्या कहलाती है?
(अ) अत्यधिक लोचदार (ब) बेलोच
(स) सापेक्षतः लोचदार (द) पूर्णतः बेलोच
S.S.C.  मल्टी टास्किंग परीक्षा, 2013
उत्तर-(ब)
मांग के लोच (Elasticity of Demand) की विभिन्न कोटियां (Degrees)ः-
बलोच मांग (Inelastic Demand)- जब वस्तु की कीमत में काफी परिवर्तन होने पर भी उसकी मांग में अपेक्षाकृत मामूली परिवर्तन हो तो मांग बेलोच या लोचहीन होती है (E < ∞ )।
लोचदार मांग (Elastic Demand) – जब वस्तु की कीमत में थोड़े अनुपात में परिवर्तन होने पर उसकी मांग में अपेक्षाकृत काफी आधिक अनुपात में परिवर्तन हो, तो मांग लोचदार होती है (म्झ1)
पूर्ण बलोच मांग (Perfectly Inelastic Demand) – यदि वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर वस्तु की मांगी गई मात्रा में कोई परिवर्तन न हो, तो मांग पूर्ण बेलोच होती है (E=0)।
पूर्ण लोचदार मांग (Perfectly Elastic Demand) – जब वस्तु की कीमत में मामूली परिवर्तन होने पर मांगी गई मात्रा पर अपरिमित प्रभाव पड़े तो मांग पूर्ण लोचदार होती है (E = ∞ )।
समानुपाती मांग लोच (Unit Elasticity of Demand)- जब कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप वस्तु की मांग में उसी अनुपात में परिवर्तन हो तो मांग लोच समानुपाती होती है (E=1)।
वस्तु के मूल्य में अधिक परिवर्तन होने पर उसकी मांग में परिवर्तन नहीं होता। इसे कौन-सी मांग कहा जायेगा?
(अ) लोचदार (ब) बेलोचदार
(स) पूर्णतः बेलोचदार (द) अत्यधिक लोचदार
S.S.C.  मैट्रिक स्तरीय परीक्षा, 2008
उत्तर-(स)
यदि किसी वस्तु के मूल्य में परिवर्तन के बाद भी उसकी मांग ज्यों की त्यों रहे और उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन न हो तो उसकी मांग को पूर्णतया बेलोचदार कहा जाएगा।
निम्नलिखित में से किसको वास्तविक मजदूरी (वेतन) का प्रमुख निर्धारक कहा जाता है?
(अ) अतिरिक्त आमदनी (ब) कार्य की प्रकृति
(स) पदोन्नति की संभावना (द) मुद्रा की क्रय शक्ति
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2008
उत्तर-(द)
मुद्रा की क्रयशक्ति को वास्तविक मजदूरी (वेतन) का प्रमुख निर्धारक कहा जाता है।
श्रमिक की उत्पादकता बढ़ने पर निम्नलिखित में से क्या घटित होता है?
(अ) संतुलन नकदी मजदूरी में गिरावट
(ब) श्रमिक के संतुलन परिणाम में गिरावट
(स) प्रतियोगी फर्मों को अधिक पूंजी के प्रयोग के लिए प्रेरित किया
जाएगा
(द) श्रमिक मांग वक्र दाईं ओर स्थानांतरित हो जाता है
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2014
उत्तर-(द)
यदि अल्पकाल में मजदूरी सीमांत उत्पादकता से कम हुई तो उत्पादक की मजदूरी देने के बाद सीमांत श्रमिक से कुछ अतिरिक्त उत्पादन लाभ के रूप में मिलेगा, परिणामस्वरूप श्रम की मांग बढ़ेगी और श्रमिक मांग वक्र दाईं ओर स्थानांतरित हो जाएगा।
यदि किसी फर्म (कंपनी) द्वारा नियुक्त अमिक शक्ति का केवल कुछ भाग किसी भी समय और बिना वेतन के बर्खास्त किया जा सकता है, तो फर्म द्वारा भुगतान किए जाने वाली कुल मजदूरी और वेतनों को क्या माना जाना चाहिए?
(अ) न तो नियत लागत और न ही परिवर्ती लागत
(ब) परिवर्ती लागत
(स) नियत लागत
(द) अंशतः नियत और अंशतः परिवर्ती लागत
S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-I) परीक्षा, 2014
उत्तर-(द)
वह श्रम शक्ति जो बर्खास्त की जा सकती है, ‘परिवर्ती लागत‘ का प्रतिनिधित्व करती है जबकि जो श्रम शक्ति बर्खास्त नहीं की जा सकती उसकी वेतन ‘नियत लागत‘ का प्रतिनिधित्व करती है।
विदेशी मुद्रा दर का अर्थ वह दर है जिस पर एक देश की मुद्रा का व्यापार किया जाता है-
(अ) विदेशी मुद्रा बाजार में किसी अन्य देश की मुद्रा के लिए
(ब) यू.एस. डॉलर के लिए जो विदेशी मुद्रा बाजार में सबसे प्रबल मुद्रा
है
(स) मुद्राओं के एक नियत समूह के लिए जिसमें डॉलर, येन, यूरो और
पाउंड शामिल हैं
(द) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्धारित किसी अन्य देश की मुद्रा के
लिए
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2006
उत्तर-(अ)
विदेशी मुद्रा दर का अर्थ वह दर है जिस पर एक देश की मुद्रा का व्यापार किया जाता है-विदेशी मुद्रा बाजार में किसी अन्य देश की मुद्रा के लिए। विदेशी विनिमय दर निर्धारण के तीन सिद्धांत मिलते हैं। 1.स्वर्ण समता सिद्धांत, 2. क्रयशक्ति समता सिद्धांत (गुस्ताव कैसल), 3. मांग-पूर्ति सिद्धांत।
दो देशों के बीच वस्तु-विनिमय (एक्सचेंज ऑफ कॉमोडिटीज) को क्या कहा जाता है?
(अ) व्यापार शेष (ब) द्विपक्षीय व्यापार
(स) व्यापार परिणाम (द) बहुपक्षीय व्यापार
S.S.C.  स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2010
उत्तर-(ब)
द्विपक्षीय व्यापार को दो देशों के बीच वस्तु-विनिमय कहा जाता है। द्विपक्षीय व्यापार शर्तों की धारणा में देश के निर्यातों में निहित उत्पादक साधनों की उत्पादकता के साथ-साथ देश के आयातों में प्रयुक्त विदेशी साधनों की उत्पादकता को भी सम्मिलित किया जाता है। मिल मार्शल विश्लेषण प्रस्ताव वक्रों द्वारा निर्धारित व्यापार की शर्ते वस्तुतः व्यापार की वस्तु विनिमल
शर्तों से संबद्ध है।
मद्रास्फीति के समय के दौरान कर की दरों में निम्नलिखित में से क्या होगा?
(अ) वृद्धि (ब) कमी
(स) स्थिर बने रहना (द) घट-बढ़
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2010
उत्तर-(अ)
मुद्रास्फीति के दौरान कर की दरों में कोई भी देश वृद्धि करेगा जिससे मुद्रा की तरलता समाज में कम हो सके।
निम्न में से कौन-सा एक वैकल्पिक धन का उदाहरण है?
(अ) करेंसी नोट (ब) सिक्के
(स) चेक (द) बंधपत्र (बॉण्ड)
S.S.C. स्टेनोग्राफर परीक्षा, 2011
उत्तर-(स)
वैकल्पिक धन या ऐच्छिक धन (व्चजपवदंस डवदमल) वह धन है जिसे स्वीकार करना या न करना प्राप्तकर्ता की इच्छा पर निर्भर करता है। इसमें चेक, बैंक ड्रॉफ्ट, यात्री-चेक, प्रतिज्ञापत्र तथा हुण्डी इत्यादि शामिल होते हैं।
रु. 500 और रु. 1000 के 2005 से पहले के करंसी नोट बदलने की भारतीय रिजर्व बैंक की अंतिम सीमा क्या है?
(अ) 31 दिसंबर, 2015 (ब) 31 मार्च, 2015
(स) 1 जनवरी, 2015 (द) 1 अप्रैल, 2015
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2015
उत्तर-(अ)
रु. 500 और रु. 1000 के वर्ष 2005 से पहले करेंसी नोट बदलने की भारतीय रिजर्व बैंक की अंतिम समय सीमा 31 दिसंबर, 2015 थी। लेकिन 23 दिसंबर, 2015 को भारतीय रिजर्व बैंक ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर 30 जून, 2016 कर दिया है। अतः प्रश्नकाल में विकल्प (अ) सही है।
निम्नलिखित में से कौन-सा अवशिष्ट अर्जन है?
(अ) किराया (ब) लाभ
(स) मजदूरी (द) ब्याज
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2006
उत्तर-(ब)
पद ‘अवशिष्ट अर्जन‘ (Residual Earning) का प्रयोग इक्विटी के संदर्भ में किया जाता है, जहां अवशिष्ट अर्जन एक लाभांश है।
‘सीमांत लागत‘ किसके बराबर होती है?
(अ) मात्रा में परिवर्तन द्वारा विभाजित कुल लागत में परिवर्तन
(ब) कुल लागत तथा अंतिम उत्पादित इकाई के कुल लाभ का अंतर
(स) अंतिम उत्पादित इकाई के कुल लाभ द्वारा विभाजित कुल लागत (द) मात्रा द्वारा विभाजित कुल लागत
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2013
उत्तर-(अ)
Marginal Cost (सीमात लागत) = ∆ Total Cost/ ∆ Out Put
वस्तु x की 9 यूनिटों से कुल उपयोगिता 20 है और 10 यूनिटों से 15 है। 10वीं यूनिट से सीमांत उपयोगिता का परिकलन कीजिए।
(अ) -5 (ब)-0.5
(स) 0.5 (द) 5
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2015
उत्तर-(अ)
एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग के कारण कुल उपयोगिता में हुई वृद्धि ही सीमांत उपयोगिता कहलाती है। इस प्रकार-
= MUn = Tun – Tun-1
= Tu10 – Tu10-1
= Tu10 – Tu9
= 15 – 20 = -5
जहां Mu = सीमांत उपयोगिता, Tu= कुल उपयोगिता
जब किसी वस्तु का उत्पादन एक यूनिट द्वारा बढ़ जाता है, तो कुल लागत में होने वाला योग क्या कहलाता है?
(अ) औसत लागत (ब) सीमांत लागत
(स) कुल लागत (द) निहित लागत
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2012
उत्तर-(ब)
एक अतिरिक्त यूनिट के उत्पादन से कुल लागत में जो वृद्धि होती है अथवा एक अतिरिक्त यूनिट के उत्पादन में जो अतिरिक्त लागत आता है उसे सीमांत लागत (डंतहपदंस ब्वेज) कहते हैं। इस अकार, सीमांत लागत उत्पादन द़1 यूनिट तथा द यूनिट की लागत का अंतर होता है अर्थात MCn = TCn़1 – TCn