जीवन अवधि परिभाषा तथा जीवनकाल श्रेणी Life term definition and lifetime range

Life term definition and lifetime range जीवन अवधि परिभाषा तथा जीवनकाल श्रेणी जीवन- अवधि:- किसी जीव के जन्म को लेकर प्राकृतिक मृत्यु की अवधि को जीवन अवधि कहते है। किसी जीव की जीवन अवधि का उसके आकार से कोई सम्बद्ध नहीं होता है जैसे:- फसली पादप(Cropped crop)    –      4-6 माह गुलाब (Rose)        –      10 वर्ष केला(banana)          –      25 वर्ष बरगद(Banyan)         –      300-500 वर्ष मनुष्य (humans) :-      100 वर्ष तोता (Parrot)  :-      150 वर्ष मगरमच्छ(crocodile)      :- 55 वर्ष कछुआ (tortoise) :-      150 वर्ष व्हेल(Whale)    :-      40 वर्ष हाथी(elephant)    :-      75 वर्ष बिल्ली(cat) … Continue reading »

पर्यावरण के मुद्दे  (Environmental Issues) 12 वीं नोट्स हिंदी में

Environmental Issues notes in hindi 12th class पर्यावरण के मुद्दे  (Environmental Issues) 12 वीं नोट्स हिंदी में प्रदूषण(pollution) क्या है , वायु प्रदूषण परिभाषा , कारण , कारक , प्रभाव , रोकथाम के उपाय    शोर (ध्वनि) प्रदूषण क्या है , परिभाषा , कारण , प्रभाव , रोकथाम , नियम noise pollution in hindi   जल प्रदूषण क्या… Continue reading »

वनोन्मूलन क्या है , परिभाषा , deforestation के कारण, प्रभाव , रोकथाम के उपाय

deforestation definition causes effects preventions वनोन्मूलन क्या है , परिभाषा  कारण, प्रभाव , रोकथाम के उपाय वनोन्मूलन(Vannomoolan):- वनोन्मूलन के कारण शीतोषण क्षेत्रों के वनों में 1 प्रतिशत तथा उष्ण कटिबन्धीय वनों में 40 प्रतिशत की कमी आयी है। भारत में वनों का प्रतिशत:- 20 वीं सदी के प्रारंभ में 30 प्रतिशत 20 वीं सदी के अन्त में 19.4 प्रतिशत वन होने चाहिए राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में 33 प्रतिशत और पहाडी क्षेत्रों में 67 प्रतिशत वनोन्मूलन के कारण(Causes of deforestation):- 1     कृषि के कारण वनों का काटा जाना, सर्वाधिक नुकसान काटों और जमाओं झूम कृषि के कारण हुआ है। 2     अवाधिक चराई 3     सिंचाई के गलत तरीके 4     वृक्ष एवं वनोत्पाद प्राप्त करने के लिएवनों का काटा जाना 5     जनसंख्या वृद्धि के कारण अवासीय बस्तियाँ, सडक आदि बनाने के कारण प्रभाव(effects):- 1     वातावरण में CO2 की सान्द्रता बढना। 2     वैश्विक उष्णता में वृद्धि। 3     जल-चक्र का अनियमित होना। 4     मृदा अपरदन एवं मृरूस्थलीकरण। 5     जैव विविधता में कमी 6     परितंत्र असन्तुलित रोकथाम के उपाय(Preventions):-      पुर्नवनीकरण:- काटे गये स्थान पर पुनः वृक्ष लगाना वन संरक्षण हेतु सामाजिक प्रयास – एक अध्ययन(Social efforts for forest conservation – a study):- 1773 में खेजडल जोधपुर की अमृता देवी विश्नोई ने अपने परिवार एवं सैकडों लोगों के साथ पेडों को बचाने के लिए अपनी जाने दी।      सरकार द्वारा अमृता देवी विश्नोई वन संरक्षण पुरस्कार दिया जाता है      1974 में हिमालय के गढवाल क्षेत्र में पेडों की रक्षा के लिए चिपको आन्दोलन चलाया गया।      इसी प्रकार सरकार ने सामाजिक भागीदारी बढाने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन की नीति प्रारंभ की । सके तहत वनो की सुरक्षा का जिम्मा स्थानीय समुदाय का होगा तथा इसके बदले में वे वनोत्पाद प्राप्त कर सकेगें। Share on: WhatsApp

संसाधनो के अनुचित अनुरक्षण व प्रयोग द्वारा निम्नीकरण maintenance and use of resources

(Degradation by improper maintenance and use of resources) संसाधनो के अनुचित अनुरक्षण व प्रयोग द्वारा निम्नीकरण:- प्रदूषण के साथ-2 प्राकृतिक संसाधनों के सही तरीके से प्रयोग न करने के कारण भी इनका निम्नीकरण होता है जैसे:- 1     मृदा अपरदन व मृरूथलीकरण:- मनुष्य के निम्न क्रियाकलापो के कारण मृदा अपसदन होता है। 1     कृर्षि के कारण वनों को काटा जाना 2     नगरीकरण 3     सिंचाई के गलत तरीके 4     अबाधिक चराई इस प्रकार उपरोक्त कारणों से शुष्क मृदा खण्ड बन जाते है तथा इनके मिलने से मरूस्थल का निर्माण होता है। जलाक्रांति व मृदा लवणता (Hydrochloric and soil salinity) : जल के विकास की उचित व्यवस्था के बिना सिंचाई के द्वारा मृदा जलाक्रान्त हो जाती है। ऐसी मृदा में भूमि की सतह एवं पौधों की जडों पर अत्यधिक मात्रा में लवण जमा हो जाते है। इससे पौधों की वृद्धि रूक जाती है तथा कृषि पर हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते है। मृदा लवणीयता की समस्या हरित क्रान्ति के कारण ही उत्पन्न हुई है। Share on: WhatsApp

ओजोन अवक्षय परत व इसके प्रभाव कारण ,  प्रभाव रोकथाम के उपाय Ozone depletion layer

Ozone depletion layer ओजोन अवक्षय परत व इसके प्रभाव , कारण ,  प्रभाव(effects) , रोकथाम के उपाय/प्रयास क्षोभमण्डल में मौसम संबंधी परिवर्तन होते है। जबकि समताप मण्डल में ताप लगभग स्थिर रहता है। तथा इसमें अच्छा ओजोन पाया जाता है जो हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से हमारी रक्षा करता है ओजोन परत की मोटाई इकाई डॉबसन यूनिट (du) है।  ओजोन अवक्षय परत व इसका कारण:- ओजोन परत की मोटाई में कमी आने के कारण ओजोन स्थिर पतला होता जाता है इस क्रियाको ओजोन अवक्षय कहते है। अटाँर्कटिका क्षेत्र में ओजोन की खतबस्तुत अधिक पतली हो गयी है तथा इसे ओमोन छिद्र कहते है। पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में ओजोन आॅक्सीजन में विघटित होती रहती है तथा पुनः ओजोन का निर्माण भी होता रहता है। O3  ⇌  O2  + O  (UV की उपस्थिति में ) CFC से UV की उपस्थिति में क्लोरीन मुक्त होती है जो ओजोन के अपघटन में उत्प्रेरक के रूप में काम आती है CFC की उपस्थिति में यह एक सतत् एवं स्थाई किया है इस प्रकार ओजोन परत की मोटाई में कमी आ जाती है। CFC → Cl उत्प्रेरक प्रभाव(effects):- छोटी तरंग दैध्र्य की पराबैंगनी किरणें ओजोन परत के द्वारा अवशोषित हो जाती है किन्तु न्ट.ठ किरणें ओजोन परत के पतले होने के कारण पृथ्वी की सतह तक पहुंचती है तथा हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करती है जो निम्न है:- 1     क्षतिग्रस्त हो जाता है तथा इसमें उत्परिवर्तन हो सकता है 2     त्वचा कैसर हो सकता है। 3     हिम अंधता मोतियाबिद हो जाता है। तथा काॅर्निया क्षतिग्रस्त हो सकता है।  रोकथाम के उपाय/प्रयास(Prevention measures / efforts):- ओजोन अबक्षय को रोकने के लिए अन्र्तराष्ट्रीय प्रयास किये गये। माॅस्ट्रियल कना में 1987 में एक अन्तराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किये गये जिसे माॅस्ट्रियल प्रोटोकाल कहते है। यह संधि 1999 में लागू हुई तथा इसमें विकसित एवं विकासशील देशों के लिए अलग-2 मानक रखते हुये यह तय किया गया कि व अन्य ओजोन अवक्षयाकारी तत्वों के उत्सर्जन में कमी की जाये। Share on: WhatsApp

ग्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effect) पौध घर प्रभाव क्या है , रोकथाम के उपाय

(Green House Effect in hindi ) ग्रीन हाउस प्रभाव पौध घर प्रभाव रोकथाम के उपाय शीत ऋतु में काँच के बने पौध घर के समान की पृथ्वी की सतह एवं वायुमण्डल के वर्न हो जाने की क्रिया को ग्रीन हाउस प्रभाव (हरित ग्रह प्रभाव) कहते है। हरित ग्रह प्रभाव उत्पन्न करने वाली गैसों को ग्रीन हाउस गैसे कहते है। ये गैसे पृथ्वी की सतह को लौटाने वाले विकिरणों को अवशोषित कर लेती है तथा पुनः पृथ्वी की सतह की ओर लौटा देती है जिससे पृथ्वी की सतह एवं वायुमण्डल गर्म हो जाता है ग्रीन हाउस गैसे एवं उनकी प्रतिशत मात्रा। चित्र  प्रभाव(Effects):- 1     हानिकारक वातावरणीय प्रभाव उत्पन्न होना। 2     विचित्र जलवायु परिवत्रन अलमिनो प्रभाव 3     वैश्विक ऊष्णता में वृद्धि एसोबल वार्मिग- गत शताब्दी में विश्व का तापमान 0.60 डिग्री सेंटीग्रेट बढा है। यही स्थिति रही तो 2100 तक तापमान में 1.40 से 5.80 डिग्री सेंटीग्रेट तक वृद्धि हो सकती है यदि ग्रीन हाउस प्रभाव न हो तो पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 150 डिग्री सेंटीग्रेट के स्थान पर .180 डिग्री सेंटीग्रेट होता है। 3    ध्रुवों की बर्फ पर पिघलना 4     नदियों में बाढ आना। 5     समुद्र के किनारे स्थित शहरो के ढूबने का खतरा।  रोकथाम के उपाय(ways of Prevention):- 1     जीवशनीय ईधन का प्रयोग कम करना। 2     उर्जा दक्षता में सुधार करना। 3     जनोन्मूलन रोकना। 4     वृक्षारोपण करना। 5     जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित रोकना 6    अंतराष्ट्रीय प्रयास करना। यह भी जाने – नाभिकीय रसायन व उसके प्रभाव Share on: WhatsApp

नाभिकीय रसायन व उसके प्रभाव Nuclear chemicals and its effects in hindi

Nuclear chemicals and its effects प्रभाव निपटान का तरीका नाभिकीय रसायन व उसके प्रभाव :- नाभिकीय रसायन या परमाणु ऊर्जा के उपयोग की समस्या:- 1     आकस्मिक रिसाव जैसे:- थीमाइल आइलैण्ड अमेरिका, चेरनोबिल खस फुकुशिमा       जापान 2     सुरक्षित निपटान की समस्या  प्रभाव(effects):- नाभिकीय रसायनों के कारण हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते है इनसे उच्च दर से उत्परिवर्तन होते है। इनकी अधिक मात्रा घातक होती है तथा कम मात्रा में उत्पन्न होने वाले नाभिकीय विकिरण अनेक विकार उत्पन्न करते है जिनमे कैंसर मुख्य है। निपटान का तरीका(ways of disposal):-  परमाणु भट्टियों को उपयोग के पश्चात् अच्छी तरह से कवचित पात्रों में बंद करके चट्टानों के नीचे पृथ्वी में 500 मीटर की गहराई में दबा देना चाहिए। यह भी जाने …. ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है ? Share on: WhatsApp

कृषि रसायन व उसके प्रभाव & जैव-कृषि एक अध्ययन bio-agriculture Chemistry in hindi

bio-agriculture Chemistry in hindi कृषि रसायन व उसके प्रभाव & जैव-कृषि एक अध्ययन , महत्व कृषि रसायन व उसके प्रभाव(Agricultural Chemistry and Its Effects):- विभिन्न प्रकार के पीडकनाशी एवं रासायनिक उर्वरकशुदा के परितंत्र को असन्तुलित करते है ये लक्ष्य जीवों के साथ-2 उपलक्ष्य जीवों को भी मार देते है, इनसे मृदा अन उपजाऊ हो जाती है तथा ये जलीय परितंत्र में पहुंचकर जैव-आवर्धन के द्वारा हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करते है। जैव-कृषि एक अध्ययन(A study of bio-agriculture):- चक्रिय एवं शून्य अपशिष्ट उत्पाद वाली कृषि को एकीकृत जैव-कृषि कहते है। इसमें कृषि कार्यो के साथ-2 पशुपालन, मधुमक्खी पालन, जल संग्रहण, कम्पोस्ट निर्माण आदि किये जाते है।  महत्व(Importance):- 1     इसमें अपशिष्ट उत्पाद नगणय होते है। 2     एक प्रक्रम का अपशिष्ट उत्पाद अन्य प्रक्रम में पोषक पदार्थो के रूप में प्रयुक्त होता है। 3     संसाधनों का अधिकतम उपयोग संभव होता है। यह बहुत ईमाइती एवं लम्बे समय तक चलने वाल प्रक्रम है। 4     रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती है। 5     सोनीपत हरियाणा के किसान रमेश चन्द डागर ने एकीकृत कृषि को अपनाया। तथा इसके लाभ प्राप्त किये — ने एकीकृत कृषि को अपनाया। तथा इसके लाभप्राप्त किये उसने अन्य किसानों को भी इससे फायदा पहुंचाने के लिए एक किसान कल्ब बनाया जिसके 5000 से अधिक सदस्य बने। ग्रीन हाउस प्रभाव ? Share on: WhatsApp

इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट क्या है , परिभाषा , तरीके e (electronic) waste in hindi

e (electronic) waste इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट क्या है , परिभाषा , तरीके:- कम्प्यूटर, मोबाइल, घडी आदि इलेक्ट्रानिक सामान आदि जो मरम्मत योग्य नहीं होता है उसे म्.ूंेजम कहते है। विकसित देश ऐसे इलेक्ट्राॅनिक अपशिष्टों को विकाशील देशों को निर्यात कर देते है अधिकाँश भागों को निकालने के बाद विकासशील देशों में बैच दिया जाता है। शेष भागों का पुनः चक्रण करते है तथा उनसे उपयोगी धातुएं सोना, चाँदी, ताबा आदि पुनः प्राप्त कर लेते है। विकासशील देश ऐसे अपशिष्टों को लेण्डफिल्स में गाढ़ देते है या भस्माक की सहायता से उन्हें नष्ट कर देते है। इन्हें पर्यावरण अनुकूल तरीके से पुनः चक्रण भी किया जा सकता है। Share on: WhatsApp

प्लास्टिक के उपचार संबंधी एक अध्ययन & अस्पताल के अपशिष्ट A plastic treatment study

अस्पताल के अपशिष्ट(Hospital waste) प्लास्टिक के उपचार संबंधी एक अध्ययन(A plastic treatment study):- बैंगलोर निवासी अहमदाबाद 51 वर्ष जो लगभग 20 वर्षो से बोरे बेचने का व्यवसाय कर रहे थे उन्होने लगभग 8 वर्ष पूर्व प्लास्टिक अपशिष्ट के निपटान का एक सुरक्षित तरीका खोज निकाला। उसने प्लास्टिक नाम दिया इसे बिटूेन के साथ लाकर इनका उपयोग सडक निर्माण में किया तथा 2000 तक लगीाग 40 किमी सडक का निर्माण किया इस कार्य में उन्होंने R.V. engineering college एवं banglore city corporation (BMC) का सहयोग प्राप्त किया। महत्व(Importance):- 1     बिटूमेन का जल निबर्बण्ड गुण बढ गया। 2     सडक तीन गुना मजबूत बनी। 3     कचरा बीनने वालों को 40 से 1 किलोग्राम के स्थान पर 6/किलोग्राम मिलने लगा। 4     प्लास्टिक के दमघोटू प्रभाव से छुटकारा। अस्पताल के अपशिष्ट(Hospital waste):- अस्पताल के उपशिष्ट में विसंक्रमाक, रूई, पट्टी, रूइयाँ, खाली बोतले, हानिकारक रसायन, रोगजनक सूक्ष्म जीव आदि होते है। इनके निपटान के लिए भस्मक (एन्सीनिरेटर) का प्रयोग किया जाना चाहिए। Share on: WhatsApp