हिंदी माध्यम नोट्स
जैव विविधता एवं संरक्षण नोट्स कक्षा 12 जीव विज्ञान | biodiversity and conservation class 12 ncert pdf
biodiversity and conservation class 12 ncert pdf in hindi जैव विविधता एवं संरक्षण नोट्स कक्षा 12 जीव विज्ञान download ?
अध्याय-15 जैव विविधता और संरक्षण
जैव विविधता (Biodeversity)
जैव विविधता शब्द का तात्पर्य पृथ्वी पर पाये जाने वाले विभिन्न जीवों की विविधता से हैं
IUCN- International Union For Conservation of Nature & Natural Resources.
के अनुसार-
अब तक ज्ञात जीवों के कुल जातियों की संख्या लगभग 1.7-1.8 मिलियन तक है अभी भी बहुत सी जातियां खोजी नही गई हैं।
सम्पूर्ण जीवों की जातियों में-
70% जन्तु 70% कीड़े मकोड़े
22% – पौधें
8% – सूक्ष्मजीव
यद्पि भारत का क्षेत्रफल विश्व का केवल 2-4% है किन्तु इसमें जैव विविधता सम्पूर्ण विश्व की 81ः है।
जिस कारण ये महाविविधता वाले 12 देशों में शामिल हैं।
जैव विविधता के प्रतिरूप-
जैव विविधता सम्पूर्ण विश्व में समान नही होती है इसका प्रतिरूप निम्न है-
1. अक्षांशीय प्रवणता (Latptuednal gradient) –
नोट- उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र – जीवों की जातियां अधिक
विश्व मेें – दक्षिणी अमेेंरिका में स्थित अमेजन में बहुत सी सबसे ज्यादा जातियां पायी जाती हैं। सामान्यता भू-मध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर जाति विविधता घटती जाती है कुछ अपवादो को छोेड़कर उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में अक्षांशीय सीमा 23/1/2 उत्तर से दक्षिण तक में शीतोष्ण या ध्रुुवीय प्रदेशों से अधिक जातियां पाई जाती हैं।
अमेजन में- 40000 – पौधों की जातियां
3000 – मतस्य जातियां
1300 – पक्षी
427 – स्तनधारी
427 – उभयचर
378 – सरीसृप
125000 से अधिक अकशेरूकी पाये जाते हैं।
2. जातीय क्षेत्र सम्बन्ध (Species- Area Relationship)-
जर्मनी के प्रसिद्ध प्रकृृतिवाद एलैक्जैण्डर वाॅन हम्बोल्ट ने दक्षिणी अमेरिका के वनों के गहन अनवेशण के समय दर्शाया की-
किसी भी दिए गए क्षेत्र की जातिय समृद्धि क्षेत्र के साथ केवल एक सीमा तक ही बढ़ सकती है इनके अनुसार जातीय समृद्धि एवं क्षेत्र के बीच सम्बन्ध एक आयाताकार अतिपरवलय के रूप में होता है।
लघुगणकीय पैमाने पर यह सम्बन्ध एक सीधी रेखा में प्राप्त होता है जिसका समीकरण निम्नवत् है
सवहे त्र सवहब ऱ् सवह।
इसमें S = जातीय समृद्धि
A = क्षेत्र
J = रेखीय ढाल
C = अन्त खण्ड
सामान्य क्षेत्र र्में का मान 0.1 सेे 0.2
महाद्वीप र्में का मान 0.6 से 1.25 होता हैं।
भारत का जैव भौगोलिक क्षेत्र-
यह पादप एवं जन्तुओं के भू-भौगोलिक वितरण से सम्बन्धित हैं।
वलेस ने सम्पूर्ण विश्व को छः भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा-
1.ओरिंयटल 2.पेलिआर्कटिक
3.निआर्कटिक 4.निओ टापिकल
5.इथियोपियन 6.आस्टेलियन
भारत ओरिंयटल परिमंडल में आता है।
भारत को निम्न 10 भौगोलिक क्षेत्रांे में बांटा गया है।
1. टांस हिमालय
2. हिमालय
3. मरूस्थल
4. अद्र्वशुष्क क्षेत्र
5. पश्चिमी घाट
6. दक्षिणी प्रायद्वीप
7. गंगा का मैदानन
8. समुद्री किनारे
9. उत्तरी पूर्वी क्षेत्र
10. द्वीप समूह
1. टांस हिमालय –
इसकेे अन्तर्गत जम्मू कश्मीर, हिमांचल प्रदेश और सिक्किम भू-भाग आते है यहां का भू-भाग शीतोष्ण है यहां के प्रमुख जन्तु बर्फीले तेन्दुऐं, जंगली भेड़ व बकरियां हैं।
2. हिमालय –
इसके तीन प्रमुख भाग पश्चिमी केन्द्रीय नेपाल व पूर्वी क्षेत्र हैं यहां का वातावरण शीतोष्ण व पर्वतीय है यहां जन्तुओं की अच्छी विविधता पाई जाती हैं।
3. मरूस्थल –
इसके अन्तर्गत राजस्थान एवं गुजरात का क्षेत्र आता है वातावरण गर्म, उष्णकटिबन्धीय है यहां के प्रमुख जीव, सर्प, छिपकली, सियार, लोमड़ी व कुछ पक्षी है।
4. अर्द्धशुष्क क्षेत्र –
इसके अन्तर्गत, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्य प्र्रदेश के भू-भाग आते है वातावरण समशीतोष्ण है यहां के वन पर्णपाती प्रकार के हैं।
5. पश्चिमी घाट –
यह महाराष्ट से केरल तक का पश्चिमी किनारा है यहां की वनस्पतियां समृद्ध प्रकार की है यहां पर उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन पाये जाते हैं।
6. दक्षिणी प्रायद्वीप –
यह भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 42 प्रतिशत तक बनाता है यहां के वन सदाबहार पर्णपाती एक कटीली झाड़ी आती है।
7. गंगा का मैदान –
यह उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैला है यहां पर कृषि अधिक होती है एवं शुष्क पर्णपाती एवं सवाना वन पाया जाता है।
8. समुद्री किनारे –
कच्छ एवं बंगाल में दलदल की अधिकता है यहां मेग्र्रो प्रकार के वन पाया जाता यहां सुन्दर वन में बंगाल टाइगर पाया जाता हैं।
9. उत्तरी पूर्वी क्षेत्र –
इसके अन्तर्गत मिजोरम, नागालैण्ड, त्रिपुरा, मेघालय, असम, मणिपुर आदि के भू-भाग आते है यहां विभिन्न प्रकार के वन पाये जाते है।
10. द्वीप समूह –
अंडमान निकोबार द्वीप समूह व लक्षद्वीप समूह हिन्द महासागर में पाये जाते है यहां जैवविविधता अधिक पायी जाती हैं।
जैव विविधता को संकट-
पृथ्वी में जैव सम्पदा भण्डार में तेजी से कमी हो रही है इसके लिए मानव क्रियाकलाप मुख्य रूप उत्तरदायी है प्न्ब्छ के त्मक कंजं इववा (लाल आंकड़ा किताब) के अनुसार पिछलेे पांच सालों में 784 जातियां जिसमेें (338 कशेरूकी, 359 अकशेरूकी व 87 पौधे की जातियां) सम्मिलित हैं लुप्त हो गई है नई लुप्त जातियों में
ऽ माॅरीशस का डोडो पक्षी
ऽ अफ्रीका का क्वैगा
ऽ आस्टेलिया का थाइलेसिन
ऽ रूस की स्टेलर समुुद्री गाय
ऽ कैस्पियन के बाघ के तीन उपजातियां
ऽ पिछले 20 वर्षो में लगभग 27 जातियां लुप्त हो गयी हैं।
जैवविविधता के क्षति या विलुप्ति के कारण –
पृथ्वी से किसी जाति का पूर्ण रूप से अदृश्य हो जाना विलुुप्ति कहलाता है।
विलुप्ति में मानव की भूमिका
मनुष्य जैव मण्डल की सबसे बुद्धिमान एवं विकसित जाति है जो अनेक जीव जातियों उनके अतिदोहन के कारण विलुप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लगभग 10 प्रतिशत जीवित जातियां विलुप्ति के खतरें में हैं।
विलुप्ति में भाग लेने वाले कारक-
1. अवासीय क्षति या विखण्डन-
प्राकृतिक आवासों का विनाश जैव विविधता के लिए भयंकर संकट है। जीव जातियों के आवासों की हानि मनुष्य की अनेक क्रियाओं द्वारा हुई कुछ क्रियाऐं निम्न हैं-
i. विकासीय कार्य-
हवाई अडृे, भवन निर्माण, बोध का निर्माण, सड़क निर्माण, कृषि भूमि रेलवे, लाइन आदि के कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास घटें हैं।
ii. वनोन्मूलन-
वनोन्मूलन के कारण वन्य जीवो को भोजन एवं छीपने के स्थान में कमी आई जिससे प्राकृतिक आवास में कमी हुई है।
iii. प्रदूषण-
प्रदूषण में विभिन्न जीवों के आवासों को विभिन्न प्रकार से दूषित कर दिया है जिससे इनमें रहने वाले जीवों का जीवनकाल कम हो गया है।
2. अतिदोहन-
मानव सदैव भोजन एवं आवास के लिए प्रकृति पर निर्भर रहा है लेकिन जब आवश्यकता लालच में बदल जाती है तो इस प्र्राकृतिक सम्पदा का अति दोहन प्रारम्भ हो जाता है जिससे विशेष जीव प्रभावित होते हैं।
3. शिकार-
मनुष्य जब से असितित्व में आया है उसने वन्य जीव जातियों को भोजन, सुरक्षा, व्यवसाय एवं मनोरंजन के लिए शिकार प्रारम्भ कर दिया।
माॅरीशस का डोडो एवं भारत का चीता अत्यधिक शिकार के कारण विलुप्त हो गये।
4. दावानल-
मानव के क्रिया से या प्राकृतिक कारणों से वनांे में लगने वाली आग वनों को बुरी तरह प्रभावित करती है जिससे वन्य जीव समाप्त हो जाते हैं।
5. विदेशी जातियों द्वारा आक्रमण-
जब बाहरी जातियां अनजाने में या जानबूझकर एक क्षेेत्र में लाईं जाती है तब उनमें से कुछ अक्रामक होकर स्थानीय जातियों मेें कमी या विलुप्ति का कारण बन जाती है।
उदाहरण-
जब नील नदी की नाइपर्च मछली को विक्टोरिया झील में डाला गया तो वहां की सिचलिड मछलियों की लगभग दौ सौ जातियां विलुप्त हो गईं।
6. सहविलुप्तता-
जब एक जाति विलुप्त होती है तो उस पर आश्रित दूसरी जाति भी विलुप्त हो जाती है। जब एक परपोषी मछली की जाति विलुप्त होती है तब उन पर आश्रित परजीवियों का वही भविष्य होता हैं।
IUCN की लाल आंकड़ा श्रेणियां-
प्रकृति एवं प्राकृतिक संशाधनों के संरक्षण के लिए अन्तर्राष्टीय संघ प्न्ब्छ जिसे अब विश्व संलक्षण संघ ;ॅब्न्द्ध कहा जाता है एक लाल आंकड़ा पुस्तक (Red data book) का रख रखाव किया हैं।
जिसमें विभिन्न जातियों के संकट ग्रस्त होने के कारणों एवं निवारणों को शामिल किया गया है इसके निम्न उदेश्य है-
ऽ संकट ग्रस्त जाति विविधता के महत्व एवं इसके प्रति जागृति उत्पन्न करना।
ऽ जैव विविधता में हुई कमी की सूची तैयार करना।
ऽ संकटग्रस्त जीवों की पहचान एवं सूची तैयार करना।
ऽ अन्तर्राष्टीय समझौते के लिए सूचनाएं उपलब्ध करना।
IUCN ने आठ जातियो को लाल सूचियों में सम्मिलित किया है।
1. विलुप्ति
2. वन में विलुुप्ति
3. सूक्ष्म रूप में संकटावन
4. संकटावन
5. अति संवेदनशील
6. कम संकट
7. आकड़ा रहित
8. मूल्यांकन रहित
IUCN की लाल सूची 1963 में शामिल की गया।
जैव विविधता का संरक्षण-
संरक्षण का अर्थ है कि जैव मण्डल के मानवीय प्रयोग की व्यवस्था जिसमें मनुष्य की वर्तमान पीढ़ी को भरपूर लाभ प्राप्त हो तथा इनकों आने वाली पीढ़ी के लिए भी सुरक्षित किया जा सकें।
जैवमण्डल से इसे बिना हानि पहुंचाएं अत्यधिक लाभ प्राप्त करने की तकनीकों का प्रयोग ही संरक्षण है।
जैवविविधता के संरक्षण की विधिया-
निम्न दो विधि-
1. स्वस्थानें संरक्षण (In-setu conservation)
भारत में जैव विविधता सम्बन्ध क्षेत्रों को राष्टीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यांे व जीवमण्डल आरक्षित क्षेत्र के रूप में कानूनी सुुरक्षा प्र्रदान की गयी है।
भारत में-
जैवमण्डल संरक्षित क्षेत्र – 18
राष्टीय उद्यान – 104
वन्यजीव अभ्यारण्य – 515
टाइगर रिजर्व – 40
आदि के रूप में मान्यता प्राप्त है।
स्वः स्थानें संरक्षण वन्य जन्तुओं के प्राकृतिक आवास में किया जाता है अतः इस प्रकार के संरक्षण के लिए प्र्राकृतिक वनों, चारागाहों, मैदानों नदियों झीलों आदि का भी संरक्षण आवश्यक होता हैं।
इसके लिए इन प्राकृतिक स्थानों को निसिद्ध क्षेत्र घोषित किया जाता है।
जो निम्न प्रकार से होते है-
1. राष्टीय उद्यान-
राष्टीय उद्यान वन्य जीवन एवं पारिस्थितिक तंत्र दोनों के संरक्षण के लिए सुनिश्चित होते है अतः इनमें शिकार करना एवं पशु चराना पूर्ण रूपेण वर्जित होता है तथा इसमें व्यक्तिगत्व स्वामित्व नही दिये जाते है इनकी स्थापना एवं नियंत्रण केन्द्र सरकार के अन्तर्गत होती है परन्तु इनकी व्यवस्था सम्बन्धित अधिकार राज्य सरकार के अधीन होता हैं।
2. अभयारण्य-
अभयारण्यांे का उद्देश्य केवल वन्य जीवन का संरक्षण करना होता है अतः इनमें व्यक्तिगत्व स्वामित्व लकड़ी काटने पशुओं को चराने आदि अनुयति इस प्रतिबन्ध के साथ दी जाती है कि इन क्रियाकलापों से वन्य प्राणी प्रभावित न हो इनकी स्थापना एवं नियंत्रण राज्य सरकार करती हैं।
नोट-विश्व का प्रथम राष्टीय उद्यान येलोेस्टोन राष्टीय उद्यान है इसकी स्थापना 1872 ई0 यू.एस.ए में हुई।
भारत का प्रथम राष्टीय उद्यान जिम कार्बेट राष्टीय उद्यान है यह नैनीताल उत्तराखण्ड में स्थित है 1936 ई में स्थापना।
कुछ प्रमुख राष्टीय उद्यान
राष्टीय उद्यान स्थान
1. गिर राष्टीय उद्यान जूनागढ़ गुजरात
बब्बर शेर पाये जाने वाला
2. काजीरंगा राष्टीय उद्यान असम
एक सींग वाला गंैडा
3. कान्हा राष्टीय उद्यान मध्य प्रदेश
4. नन्दा देवी रा0उ0 उत्तराखण्ड
5. मानस रा0उ0 असम
6. धाना रा0उ0 भरतपुर राजस्थान
साइबेरियन सारस पाया
जाता है।
7. रणथम्भौर राजस्थान
3. बाह्य स्थाने संरक्षण-
इस संरक्षण में संकटोपन पौधों तथा जन्तुओं का उनके प्राकृतिक आवास से अलग एक विशेष स्थान पर इनकी अच्छी देखभाल की जाती है औेर सावधानी पूर्वक संरक्षित किया जाता है जन्तु उद्यान वनस्पतिक उद्यान, वन्य जीव पार्को का यही उद्देश्य है ऐसे बहुत से जन्तु है जोे कि वनों में विलुप्त हो गये है लेकिन जन्तु उद्यानों मेें सुरक्षित हैं।
भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव सम्बन्धित प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट टाइगर-
इसे सन् 1973 में आरम्भ किया गया इससे सम्बन्धित राष्टीय उद्यान, जिम कार्बेट राष्टीय उद्यान उत्तराखण्ड व रणधम्भोेर राजस्थान, सबाई माधोपुर, राष्टीय उद्यान, राजस्थान।
सुन्दरवन चीता अभ्यारण पश्चिम बंगाल।
प्रोजेक्ट लाइन-
इसकी स्थापना 1972 में हुई ये गिर राष्टीय उद्यान जूनागढ़ गुजरात में स्थित है बब्बर शेर के लिए यह एक मात्र अभयारण्य हैं।
कस्तूरी हिरण प्रोजेक्ट
इस संरक्षित क्षेेत्र से केदारनाथ प्राणी विहार, मनाली प्राणी विहार आदि सम्बन्धित है।
बर्फीले तेदुएं का प्रोजेक्ट-
पूरा हिमालय इस प्रोजेक्ट से सम्बन्धित होता हैं।
प्रोजेक्ट गैंडा-
1992 में शुरू किया गया सम्बन्धित क्षेत्र-
काजीरंगा रा0उ0
मानस रा0उ0
वन्य जीव संरक्षण के लिए संस्थाएं
A. गैर सरकारी संस्थाएं-
1. बाम्बें नेचुरल हिस्टरी सोसाइटी-
इसकी स्थापना मुम्बई में 1983 ई0 में की गयी। यह सोसाइटी भारत, श्रीलंका के पादप जाति एवं प्राणी जाति के संग्रह तथा शैक्षिणक सूचनाओं से सम्बन्धित क्रिया कलापो का निस्पादन करती हैं।
2. भारतीय वन्य जीवन परिरक्षण सोसाइटी-
इसकी स्थापना देहरादून में की गई यह अनेक शैक्षिणिक क्रिया कलापों के साथ चीतल नामक द्विभाषी त्रेमासी पत्रिका भी निकलती हैै।
B. सरकारी संस्थाएं-
1. जूलाॅजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (JSI)
इसकी स्थापना कोलकता में की गई 1916 ई0 में, इसका उद्देश्य भारतीय प्राणी जाति का सर्वेक्षण, परिवेक्षण एवं अनुसंधान करना हैं।
2. भारतीय वन्य जीव संस्थान-
भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1982 मेें इसकी स्थापन देहरादून में की थी-
इसका प्रमुुख उद्ेदश्य वन्यजीवन क्षेत्र में शोध करना हैं।
3. भारतीय वन्यजीवन परिषद-
इसकी स्थापना 1949 ई0 में की गई। इस परिषद ने 1972 में वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम पारित किया।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…