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bernal and scott theory in hindi , बर्नल व स्कॉट का सिद्धांत क्या है द्रव अवस्था में अव्यवस्था Disorder in Liquid State
रसायन विज्ञान में B.sc 1st year notes में bernal and scott theory in hindi , बर्नल व स्कॉट का सिद्धांत क्या है द्रव अवस्था में अव्यवस्था Disorder in Liquid State ?
बर्नल व स्कॉट का सिद्धान्त या द्रव अवस्था में अव्यवस्था (Bermal and Scott Theory or Disorder in Liquid State)
जब कोई ठोस पिघलकर द्रव अवस्था में आता है तो गलनांक बिन्दु पर ठोस व द्रव अवस्थाओं में साम्य रहता है, अतः उस समय प्रक्रम की मुक्त ऊर्जा का मान शून्य होता है। अर्थात् ।
G = H – TS = 0 ….(12)
अथवा H =TS
अथवा Hi – Hs,= T (Si /-Ss) …(13)
जहा Hi Hs क्रमशः द्रव तथा ठोस अवस्था की एन्थैल्पी और Si व Ss क्रमशः द्रव तथा ठोस अवस्था की एन्ट्रॉपी को दर्शाते हैं। एन्ट्रॉपी किसी तन्त्र की अव्यवस्था का नाप होती है। क्रिस्टलीय ठोस अवस्था में चूंकि पदार्थ के कण पूर्णतः व्यवस्थित क्रम में होते हैं अतः इनकी एन्ट्रॉपी बहुत कम होती है जबकि द्रव अवस्था में कण एक-दूसरे से दूर-दूर तथा अव्यवस्थित होते हैं अतः द्रवों की एन्ट्रॉपी का मान उच्च होता है।
एक बात स्मरण रखने की है कि क्रिस्टलीय ठोसों के गलनांक तीक्ष्ण (sharp) होते हैं अर्थात ऐसा नहीं होता कि ठोसों के गुण धीरे-धीरे परिवर्तित होकर उनमें द्रव के गुण आते हैं वरन् एक बिन्दु पर तुरन्त ही , गुणों में परिवर्तन होकर ठोस से द्रव अवस्था आ जाती है। ठोस, द्रव व गैस अवस्था के द्विविमीय मॉडल चित्र जे. डी. बर्नेल (J. D. Bernal) ने निम्न प्रकार से दर्शाए
उपर्युक्त चित्र 4.8 (b) में द्रव के एक कण ‘A’ के चारों ओर सामान्य निकटतम पैकिंग व्यवस्था के अनुसार छः कणों के स्थान पर केवल पांच कण व्यवस्थित हैं, इसके बाद कणों को चाहे कितना व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाये, क्रिस्टल संरचना जैसी स्थायी व्यवस्था प्राप्त नहीं की जा सकती अर्थात् एक कण की व्यवस्था गड़बड़ (disturb) होते ही पूरे ठोस की व्यवस्था बिगड़ जाती है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि क्रिस्टलीय ठोसों के गलनांक तीक्ष्ण एवं स्थिर क्यों होते हैं ? गलनांक बिन्दु पर किसी एक कण द्वारा अपनी व्यवस्था के हटते ही पूरा क्रिस्टलीय ठोस पिघलने लगता है क्योंकि क्रिस्टल के किसी एक कण द्वारा उच्चतम गतिज ऊर्जा पाकर अपनी व्यवस्था से हटते ही अव्यवस्था तेजी से पूरे क्रिस्टल में फैल जाती है। एक बात और क्रिस्टल की तुलना में तो द्रव अवस्था में अव्यवस्था काफी है, लेकिन फिर भी कई स्थानों पर कण कुछ-कुछ दूरी तक व्यवस्थित नजर आ रहे हैं जबकि गैस अवस्था में तो कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। अत: गैस अवस्था की तुलना में तो द्रवों की एन्ट्रॉपी का मान काफी कम होता है अर्थात्
हम यह तो नहीं कह सकते कि समस्त क्रिस्टल बिल्कुल आदर्श व्यवस्था में होते हैं और उनमें तनिक भी अव्यवस्था नहीं होती। क्रिस्टलों में भी अव्यवस्था होती है, किन्तु यह इतनी सीमित होती है कि उसे उपेक्षित किया जा सकता है। इस सीमा से अव्यवस्था के बढ़ते ही क्रिस्टल पिघलने लगता है।
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