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उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग , स्थायित्व Properties and Uses

Properties and Use of Sub-Covalent Compounds उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग : औषधि के रूप में (As medicine) : सिस –  प्लेटिनम का उपयोग ट्यूमर के निदान में किया जाता है शरीर में कॉपर की अधिकता को कम करने के लिए d- पेनिसिल एमीन से क्रिया की जाती है लेड ( शीशा) के विषैले… Continue reading »

धातु कार्बोनिल यौगिकों में बंधन Bonding between metal carbonyl compounds

Carbonyl compounds कार्बोनिल यौगिक : धातु व कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की क्रिया से बने ऑक्साइड को कार्बोनिल यौगिक कहते है।  संक्रमण धातुएँ इस प्रकार के यौगिक बनाती है। उदाहरण : [Ni(CO4)] टेट्रा कार्बोनिल निकैलेट (0) धातु कार्बोनिल यौगिकों में बंधन (Bonding between metal carbonyl compounds): धातु कार्बोनिल यौगिकों में अभिक्रिया शीलता बंधन अन्योन्य क्रिया 1. लिगेंड के… Continue reading »

स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी spectral chemical series in hindi

spectral chemical series in hindi स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी : लिगेंड को क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा अर्थार्थ ▲0 के बढ़ते क्रम में रखने पर जो श्रेणी प्राप्त होती है उसे स्पेक्ट्रमी रासायनिक  श्रेणी कहते हैं | I < Br– < SCN– < Cl– < S2- < F– < OH– < C2O42- < H2O < –NCS  < EDTA4-… Continue reading »

Valence bond theory (VBT) की कमियां drawbacks in hindi

VBT (Valence bond theory) की कमियां : यह सिद्धांत पूर्व अनुमानों पर आधारित है इस सिद्धांत में धातु आयन की प्रकृति पर अधिक ध्यान दिया जाता है जब की  लिगेंड की प्रकृति पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता यह संकुल यौगिकों के रंग तथा स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं करता यह सिद्धांत संकुल यौगिकों के उष्मागतिकी… Continue reading »

वेर्नेर सिद्धांत , संयोजकता बंध सिद्धांत (Connective bond theory) , (werner theory)

(Connective bond theory) (werner theory) वेर्नेर सिद्धांत संयोजकता बंध सिद्धांत उपसहसंयोजक यौगिकों में बंधन :उपसहसंयोजक यौगिकों में बंध की प्रकृति वह गुणों की व्याख्या करने के लिए निम्न सिद्धांत दिए गए |  वेर्नेर सिद्धांत (werner theory): इस सिद्धांत के मुख्य बिंदु निम्न है उपसहसंयोजक यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु की दो प्रकार की संयोजकता होती है ,… Continue reading »

समावयवता की परिभाषा क्या है , प्रकार , वर्गीकरण

समावयवता : वे यौगिक जिनके अणुसूत्र समान होते है परन्तु उसमे उपस्थित समूहों की व्यवस्था भिन्न भिन्न होती है , जिससे उनके गुण भी भिन्न भिन्न होते है।  वे एक दूसरे के समावयवी कहलाते है इस गुण को समावयवता कहते है। समावयवता का वर्गीकरण : समावयवता सरंचना समावयवता त्रिविम समावयवता सरंचना समावयवता आयनन बंधनी उपसहसंयोजन… Continue reading »

संकुल यौगिकों का सूत्र लिखना Write a formula for package compounds

Write a formula for package compounds संकुल यौगिकों का सूत्र लिखना : संकुल यौगिक का सूत्र लिखते समय निम्न पद काम में आते है संकुल यौगिक में सबसे पहले धनायन व ऋणायन की पहचान करते है। सरल धनायन अथवा सरल ऋणायन का सूत्र आवेश सहित लिखते है। संकुल आयन का सूत्र बड़े कोष्ठक के अंदर… Continue reading »

उपसहसंयोजक यौगिकों का नामकरण Naming Sub-coordinator compounds

Naming Sub-coordinator compounds उपसहसंयोजक यौगिकों का नामकरण : उपसहसंयोजक यौगिकों का IUPAC नाम देने के लिए निम्न नियम काम में आते हैं | आईयूपीएसी नाम लिखते समय धनायन को पहले तथा ऋण आयन को बाद में लिखा जाता है | नाम ने लिखते समय धनायन तथा ऋण आयन की संख्या का उल्लेख नहीं करते |… Continue reading »

कीलेट  लिगेंड ,समन्वय मंडल , उपसहसंयोजन संख्या , होमोलेप्टिक , हेट्रो लेप्टिक संकुल

कीलेट  लिगेंड (Kettle ligand):   द्वि दंतुर या बहु दंतुर लिगेंड केंद्रीय धातु परमाणु से जुड़कर पांच या छह सदस्य वलय बनाते हैं ,  इस वलय  को कीलेट  लिगेंड कहते हैं तथा बने  योगिक को कीलेट योगिक कहते हैं | कीलेट  लिगेंड निम्न है en,  OX , EDTA4- , gly उदाहरण : [Cu(en2)]2+ समन्वय मंडल… Continue reading »

द्विकलवण , संकुल या उपसहसंयोजक यौगिक , Ligand definition लिगेंड का वर्गीकरण

double salt Ligand definition and types संकुल या उपसहसंयोजक यौगिक , लिगेंड का वर्गीकरण द्विकलवण (double salt) :  वे योगात्मक योगिक जो ठोस अवस्था में क्वाथी होते हैं परंतु जलीय विलयन में पूर्ण रुप से आयनित हो जाते हैं उन्हें द्विक लवण कहते हैं इन्हें जालक लवण भी कहते हैं |  कार्नेलाइट KCl.MgCl2.6H2O पोटाश एलम या… Continue reading »