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वाण्डर वाल्स समीकरण के फैलाव या अनुप्रयोग applications of van der Waals’ Equation in hindi
applications of van der Waals’ Equation in hindi वाण्डर वाल्स समीकरण के फैलाव या अनुप्रयोग क्या है , इसके बारे में विस्तार से जान पाएंगे |
वाण्डर वाल्स समीकरण के फैलाब या अनुप्रयोग (applications of van der Waals’ Equation) :
आदर्श आचरण से विचलन की व्याख्या (Explanation of deviation from ideal behavior) : वाण्डर वाल्स समीकरण के आधार पर वास्तविक गैसों के आचरण और किन्हीं परिस्थितियों में उनके आदर्श व्यवहार से विचलन को आसानी से स्पष्ट किया जा सकता है। वाण्डर वाल्स समीकरण (23) को हल करने से निम्न समीकरण प्राप्त होगी
PV-Pb + a/V – ab/V2 RT …(24)
उपर्युक्त समीकरण में पद का न बहुत कम होता है अतः इसे उपेक्षित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में समीकरण (24) निम्न रूप ले लेगी
PV – Pb + = RT …(25)
आदर्श गैस समीकरण Pi Vi = RT होती है अतः यदि
PV – Pb a/V = Vi Pi …………….(26)
हो तो उस स्थिति में वास्तविक गैसों का आचरण आदर्श हो जाता है। अब हम अलग-अलग ताप व दाव पर वास्तविक गैसों द्वारा आदर्श व्यवहार के विचलन की व्याख्या करेंगे
- अत्यन्त कम दाब पर (At very low pressure) : यदि दाब का मान बहुत ही कम हो तो आयतन का मान बहुत अधिक हो जाता है, ऐसी अवस्था में पद Pb तथा a/V बहुत ही कम हो जायेंगे और इन्हें नगण्य (negligible) मानकर हम उपेक्षित कर सकते हैं, फलस्वरूप समीकरण (26) का निम्न रूप
PV =Pi Vi
हो जायेगा अर्थात् गैस का आचरण आदर्श हो जायेगा।
- कम दाब पर (At low pressure) : यदि गैस के दाब का मान थोड़ा भी अधिक हो जाये तो आयतन का मान काफी कम हो जायेगा और उस स्थिति में पद Pb को तो नगण्य या उपेक्षणीय मान सकते हैं क्योंकि P में तो जरा-सी ही वृद्धि हुई है, लेकिन a/V पद को उपेक्षित नहीं कर सकते क्योंकि V में काफी अधिक कमी हो जायेगी, फलतः समीकरण (26) अग्र रूप ले लेगी
PV + V=Pi Vi – a/V …(27)
अर्थात PV का मान आदर्श गैस के PiVi के मान से कम हो जायेगा। यही कारण है कि अमेगट वर शन्य वायुमण्डलीय दाब पर गैसों का आचरण आदर्श होता है, दाब के थोड़ा-सा बढ़ने पर PV का आदर्श गैस Pi Vi से कम हो जाता है। अतः अमेगट वक्र आदर्श गैस के वक्र से नीचे की ओर चला जा है। यदि दाब को थोड़ा और बढ़ा दिया जाये तो पद Pb का मान बढ़ जायेगा और अब यह उपेक्षणीय नही रहेगा. यही कारण है कि अमेगट वक्र एक निम्नतम (minimum) पर पहुंच कर ऊपर की ओर बटर लगता है।
- उच्च दाब पर (At high pressure) : बहुत अधिक दाब पर V का मान कम हो जायेगा. जबकि का मान p का मान काफी अधिक हो जायगा, उस स्थिति में समीकरण (26) में पद Pb की तुलना में पद अत्यन्त कम हो जाता है जिसे उपेक्षित किया जा सकता है। अतः इस समीकरण का स्वरूप निम्न हो जायेगा
PV- Pb = Pi Vi
अथवा PV =Pi Vi + Pb ….(28)
अर्थात PV का मान आदर्श गैस PM, के मान से अधिक हो जायेगा. यही कारण है कि अमेगट वक्र में उच्च दाब पर वक्र आदर्श गैस से ऊपर की ओर ही बढ़ते जाते हैं। यहां हम देखते हैं कि Pb तथा a/v पद एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कार्यरत हैं, उच्च दाबों पर Pb अधिक प्रभावी होता है और a/v नगण्य, जबकि निम्न दाबों पर Pb तो नगण्य हो जाता है और alv अधिक प्रभावी हो जाता है। अतः ऐसा कोई मध्यवर्ती दाब होना चाहिए, जिस पर दोनों एक-दूसरे के बराबर होकर निरस्त हो जायें और वास्तविक गैस एक आदर्श गैस बन जाये और अमेगट वक्रों से स्पष्ट है कि किसी बिन्दु पर ये वक्र आदर्श गैस वक्र को काटते हैं अर्थात् उन दाबों पर गैसों का आचरण आदर्श हो जाता है।
- उच्च ताप पर (At high temperature) : उच्च ताप पर गैसों के आयतन बहुत अधिक हो जाते हैं अत: a/V व Pb दोनों ही पदों को उपेक्षित किया जा सकता है, अतः
PV =Pi Vi
हो जायेगा और गैसों का व्यवहार आदर्श हो जायेगा। यही कारण है कि ताप बढ़ने के साथ वास्तविक गैसों के वक्र आदर्श गैसों के वक्र के नजदीक आने लगते हैं।
(v) निम्न ताप पर (At low temperature) कम ताप पर गैसों का आयतन बहुत कम होता है अतः a/v का मान बढ़ जाता है अर्थात् (a/V – Pb) का मान भी अधिक हो जायेगा और इस पद को उपेक्षित करना सम्भव नहीं होगा फलतः गैसों का व्यवहार आदर्श व्यवहार से विचलित हो जायेगा।
(2) हाइड्रोजन व हीलियम आदि गैसों का असामान्य आचरण (Exceptional behaviour of hydrogen and helium etc.) हाइड्रोजन व हीलियम आदि निम्न अणु भार वाली गैसों का आचरण अन्य गैसों से अलग होता है, इनके अमेगट वक्र सदैव ही आदर्श गैस के वक्र से ऊपर रहते हैं। इसका कारण यह है कि इनके अणुओं का आकार बहुत छोटा होने के कारण इनके मध्य परस्पर आकर्षण बल बहुत कम रहता है, फलस्वरूप Pb की तुलना में a/V सदैव ही उपेक्षणीय रहता है और वाण्डर वाल्स समीकरण का स्वरूप निम्न हो जाता है
PV = Pi Vi + Pb
अतः PV का मान आदर्श गैस के Pi Vi , से सदैव ही अधिक होता है अतः वक्र आदर्श गैस के वक्र से ऊपर ही रहता है। इस प्रकार हम वाण्डर वाल्स समीकरण की सहायता से समस्त गैसों के वास्तविक व्यवहार की स्पष्ट रूप से व्याख्या कर सकते हैं।
(3) बॉयल ताप TB की गणना करना (Calculation of Boyle’s temperature, TB) – वाण्डर वाल्स स्थिरांकों की सहायता से किसी गैस के लिए बायल ताप को निम्न सूत्र की सहायता से परिकलित किया जा सकता है
Tb = a / bR
इस सूत्र की गणना वाण्डर वाल्स समीकरण से ही हो सकती है।
उदाहरण 3.6. कार्बन डाइ-ऑक्साइड गैस के लिए यह मानते हए बॉयल ताप की गणना करो कि यह कवाण्डर वाल्स गैस है। (a = 3.59 litre2 atm mol-2 तथा b = 0.0427 litre mol-1 )
हल : बॉयल ताप के लिए TB = a/bR
सूत्र में मान रखने पर, TB = (3.59 L2 atm mo1-2 ) /(0.0427 L mol-1 )(0.08206 L atm K-1 mor-1 )
TB =1025K उत्तर
स्वतः हल कीजिए
- यदि 02 वाण्डर वाल्स समीकरण का पालन करे तो इसके लिए बॉयल ताप की गणना कीजिए। (a = 137 पास्कल मी6 मोल2 तथा b=3.18×10-5 m3 mol-1 )
- संकेत: TB a/bR
उत्तर:519K
- एथेन गैस के लिए बॉयल ताप की गणना कीजिए। Determine Boyle’s temperature for ethane gas.
a= 5.489 atmL2 mor-2 ,b= 6.38 L mol-1 )
उत्तर-10.49 K क्रा
दाब संशोधन (Pressure correction) : गैसों के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार गैसों के अण सीधी रेखा में गति करते हुए पात्र की दीवारों से टकराते हैं और टकराकर लौटने के बाद वे फिर सीधी रेखा में गति करते हुए सामने की दीवार से टकराते हैं। टकराने के इस क्रम में पात्र की दीवारों पर ये प्रति इकाई क्षेत्रफल में कितना बल लगाते हैं, वही गैस का दाब होता है। इस पूरे प्रक्रम में हम यह मानते हैं कि अणुओं के मध्य परस्पर कोई आकर्षण बल नहीं होता और अणु अपनी स्वाभाविक गति से गमन कर रहे हैं। यह तथ्य आदर्श गैसों पर तो लागू हो सकती है लेकिन वास्तविक गैसों पर नहीं, क्योंकि वास्तविक गैसों में अणु परस्पर एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और उस आकर्षण के फलस्वरूप गैसों का दाब निश्चित रूप से प्रभावित होता है। इसे हम निम्न प्रकार सिद्ध कर सकते हैं कल्पना करते हैं कि गैस के एक पात्र में गैस के अणु गति कर रहे हैं और पात्र की दीवारों से टकराकर दाब उत्पन्न कर रहे हैं। इनमें से दो अणु A व B की.. गति पर हम विचार करते हैं (चित्र 7)। अण B गैस पात्र के मध्य में है. अतः यह चारों ओर से अणुओं द्वारा घिरा हुआ है जो सब तरफ इसको आकर्षित कर रहे हैं। स्वाभाविक है कि यदि कोई अणु सभी तरफ से बराबर आकर्षण बल से आकर्षित होगा तो उस आकर्षण का प्रभाव शून्य हो जायेगा और अणु अपनी स्वाम गति से ही चलेगा। अब हम अणु A की तरफ ध्यान दें। अणु A पात्र की दीवार से टकराने ही किन्तु इसके पीछे उपस्थित अणु इसे आकर्षित करके इसे पीछे की ओर खीचते हैं फलतः यह अण दीवार से उतने बल से नहीं टकरा सकता जितने बल से वह इन आकर्षणों की अनुपस्थिति में टकरा यही बात सभी अणुओं पर लागू होती है अर्थात् वास्तविक गैसों का दाब आदर्श गैसों से कछ कम
अर्थात् P = Pi – P’
अथवा P = Pi +P’ …(20)
जहां P’ अणुओं के पारस्परिक आकर्षण बल पर निर्भर करता है। एक अणु जितने अधिक । द्वारा घिरा रहेगा, वह उतना ही अधिक आकर्षण बल अनुभव करेगा, अर्थात् P गैस के घनत्व nM/v पर निर्भर करेगा जहां M गैस का अणु भार है जो प्रत्येक गैस के लिए स्थिरांक है। चूंकि सभी अण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं अतः
p’ (n/V)2
p’ = an2 /v2
यहां a एक स्थिरांक है। P का मान समीकरण (20) में रखने पर,
Pi =P + an2 /V2 ….(21)
आदर्श गैस समीकरण Pi Vi = nRT
में समीकरण (21) से Pi का मान व समीकरण (16) से V, का मान रखने पर आदर्श गैस समीकरण संशोधित होकर निम्न रूप ले लेती है (p + an2 + V2 ) (V – nb) = nRT …(22)
इस समीकरण को हम वाण्डर वाल्स समीकरण (van der Waals’ equation) कहते यदि न = 1 हो तो समीकरण (22) निम्न रूप ले लेगी
(p + a/V2 ) (V-b)=RT ……………………(23)
यह समीकरण (23) एक मोल के लिए वाण्डर वाल्स समीकरण है और इसमें a व b वाण्टा स्थिरांक (van der Waals’ constants) कहलाते है और ये गैसों की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। b एक आयतन का पद है अतः इसकी इकाई लिटर प्रति मोल होती है, अधिकांश गैसों के लिए b का मान 20 से 60 मिलीलिटर प्रति मोल होता है। an2 /V2 का पूरा पद अपने आप में एक दाब का पद है जिसकी इकाई, दाब की इकाई अर्थात् ऐटमॉस्फीयर (atmosphere) होनी चाहिए अर्थात्
an2 /V2 = atmosphere
अथवा atmosphere – a(mol)2 / (litre)2
a = atmoshpere litre2 mol-2
अर्थात् a की इकाई ऐटमॉस्फीयर लिटर प्रति मोल होगी। आसानी से संघनित होने वाली गैसों जैस HCI. CS, व CCL की वाष्प, आदि के लिए a का मान काफी अधिक होता है, जबकि हाइड्रोजन, हीलियम आदि जैसी अधिक आदर्श गैसों के लिए a का मान बहुत कम होता है। कछ गैसों के लिए a व b के मान अग्र सारणी में दिये जा रहे हैं
अथवा P+ an2 /V2 = nRT/V – nb
अथवा p = nRT/V – nb – an2 /V2
समीकरण में सारे मान रखने पर , p = 2×0.082×300 4.17×4 /25 -999 – 0.
P=9.32 atmosphere उत्तर
स्वतः हल कीजिए
(i ) 27°C पर 17 ग्राम अमोनिया 5 लिटर के फ्लास्क में भरी हुई है। इस गैस के दाब की कीजिए-10 आदर्श गैस समीकरण द्वारा तथा (ii) वाण्डर वाल्स समीकरण द्वारा। (a = 4 वायम लिटर मोल-b = 0.035 लिटर मोल-1 R = 0.082 लिटर वायुमण्डल)
उत्तर – संकेत
(PV =nRT में यदि n = 1 हो, क्योंकि 17g NH3 = 1 मोल NH3 , तो
P= 4.92 वायुमण्डल
- एक मोल के लिए वाण्डर वाल्स समीकरण होगी : (P + a/V2 ) (V-b) = RT में मान रखकर गणना करने पर,
P= 4.79 वायुमण्डल
(iii ) 1 27°C पर एक मोल कार्बन मोनोऑक्साइड का आयतन 1.5 लिटर है। यदि R का मान लिटर ऐटामॉस्फीयर में लें एवं a तथा b के मान क्रमशः 1.5 atm L mol-1 एवं 0.04 L mol-1 हैं तो in आदर्श गैस समीकरण तथा (ii) वाण्डर वाल्स समीकरण के अनुसार गैस दाब कितना होगा? हल-संकेत : (1) PV = nRT के अनुसार, P = 16.40 atm (ii) P+av-b) =RT के अनुसार, P = 16.18 atm
- 298K ताप पर 5 लिटर के पात्र में रखी गई 22 ग्राम CO2 गैस द्वारा लगाए गए दाब की गणना कीजिए जब (a) गैस आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है। (b) गैस वाण्डर वाल्स समीकरण का पालन करती है। (a = 3.6 atm L2 mol-2 तथा b = 4.26 x10-Lmol-1 )
उत्तर : (a) 24.436 atm; (b) 25.523 atm
उदाहरण 3.5. 48°C पर 1.32 dm’ के एक पात्र में कार्बन डाइ-ऑक्साइड के एक मोल गैस द्वारा। लगाये गये दाब की गणना करो (a) आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करके (b) वाण्डर वाल्स समीकरण का उपयोग करके। वाण्डर वाल्स स्थिरांकों के मान हैं—a = 3.59 dm6 atm. Mol-2 तथा b = 0.0427 dm3 mol-1 |
हल : (a) आदर्श गैस के लिए PV = nRT अथवा p nrt/V दिया गया है, n = 1 mol, T = 48 + 273 = 321 K, V = 1.32 dm’
उपर्युक्त इकाइयों में R = 0.08206 dm3 atm K-1 mol-1
सूत्र में सभी माने रखने पर, P_ (1 mol) (0.08206 dm3 atm K-1 mol-1 )(321 K) /1.32 dm3
P= 19.9 atm उत्तर
(b) वाण्डर वाल्स गैस के लिए
p – nRT/ V- nb – n2 a/V2
समीकरण में मान रखने पर, ( 1 mol) (0.08206 dm3 atm K-1 mo1-1 ) (321) /(1.32 dm3 )-(1mol) (0.0427 dm3 mo1-1 )
-(1 mo1)2 (3.59 dm6 atm mo1-2 ) / (1.32 dm3)2
=20.62 atm -2.06 atm
P= 18.56 atm उत्तर
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