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प्रति सूक्ष्म जीवी (antimicrobial) , प्रतिएलर्जी या प्रतिहिस्टामीन , प्रतिनिषेचक औषधियां (antifertility drugs)
प्रति सूक्ष्म जीवी (antimicrobial) : वे रासायनिक पदार्थ जिनका प्रयोग सूक्ष्म जीव जैसे कवक , जीवाणु व फफूंद आदि को नष्ट करने के लिए किया जाता है , प्रति सूक्ष्म जीवी कहलाते है।
(a) जीवाणुनाशी
(b) जीवाणुरोधी
(c) प्रतिजैविक
(a) जीवाणुनाशी : वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग जीवाणु का नाश करने के लिए किया जाता है , जीवाणुनाशी कहलाते है।
(b) जीवाणुरोधी : वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग जीवाणु की वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है जीवाणुरोधी कहलाते है।
(c) प्रतिजैविक :
परिभाषा : वे रासायनिक पदार्थ जिन्हें कवक , जीवाणु व फफूंद से प्राप्त किया जाता है तथा इन्ही हानिकारक कवक , जीवाणु व फफूंद को नष्ट किया जाता है , प्रतिजैविक कहलाते है।
सर्वप्रथम १९वीं शताब्दी में पार्ल एलिर्श नामक वैज्ञानिक ने सिफलिश रोग के कारक स्पाईरोकिट जीवाणु को मारने के लिए निम्न प्रतिजैविक औषधियाँ खोजी।
इनकी औषधियां एजो-एन्जको से समानता रखती है , जो निम्न है –
उदाहरण : सिल्वरसेन , प्रोटोसिल
इन्होने प्रोटोसिल को मानव के लिए प्रयुक्त करने पर यह मानव शरीर में जाकर सल्फेनिलेमाईड में बदल जाती है तथा यह मानव के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध नहीं हुई।
इस खोज के लिए पार्ल एर्लिश को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
प्रथम प्रतिजैविक औषधि का विस्तृत वर्णन निम्न है –
सन 1929
वैज्ञानिक का नाम : एलेक्सजेंडर फ्लेमिंग
प्रथम प्रतिजैविक या औषधि का स्रोत : पेनीसिलीनियम नोटेडम फफूंद
प्रथम प्रतिजैविक औषधि का नाम : पेनीसिलीन
पुरस्कार : नोबल पुरस्कार १९४५
अब तक छ: पेनीसेनिल खोजी जा चुकी है।
सबसे अधिक मात्रा में पेनीसिनिल -G
पेनिसिनिल का उपयोग फेंफड़ो , निमोनिया व फोड़ो में प्रयुक्त किया जाता है।
(ii) स्ट्रेप्टोमायसीन : यह एक ब्रांड स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक औषधि है।
इसका उपयोग तपेदिक , निमोनिया व मस्तिष्क ज्वर में प्रयुक्त की जाती है।
(iii) टेट्रा साइक्लिन : इसे दो भागो में बांटा गया –
(a) टेरा मायसीन : इसे टाइफाइड के उपचार में प्रयुक्त करते है।
(b) ओरियोमायसीन : इसे आँख के संक्रमण के उपचार में प्रयुक्त करते है।
(iv) क्लोरो मायसीटिन : इसका व्यापारिक नाम क्लोरो मायसिटीन है।
इसका उपयोग टाइफाइड , निमोनिया व मस्तिष्क ज्वर में किया जाता है।
(v) सल्फा औषधि : प्रतिजैविक औषधियां की खोज से पहले इनका ही उपयोग किया जाता था।
यह कोकाई संक्रमण के उपचार में सबसे अधिक मात्रा में प्रयुक्त होते थे।
यह औषधियाँ सल्फेनिलेमाइड।
sulphanilamide
sulfadiazine
sulphapyridine
प्रश्न : उपयोग के आधार पर प्रतिजैविक औषधियों को कितने भागो में बांटा गया है ? समझाइये।
उत्तर : (a) विस्तृत स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक : वे प्रतिजैविक औषधियाँ जो ग्रेम ग्राही से ग्रेम अग्राही तक की परास के सभी जीवाणुओं को नष्ट करती है , विस्तृत स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक कहलाती है।
उदाहरण : एमोग्सिलिन , एमिपसिलिन
(b) सिंकर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक : वे प्रतिजैविक औषधियां जो ग्रेम ग्राही से ग्रेम अग्राही जीवाणु को मारती है , सिंकर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक औषधियाँ कहलाती है।
उदाहरण : पेनिसिलिन -G
(c) सिमित स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक : वे प्रतिजैविक औषधियां जो एक जीवाणु या एक रोग पर प्रयुक्त की जाती है , उन्हें सिमित स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक औषधियां कहते है।
प्रश्न : जीवाणुनाशी प्रतिजैविक व जीवाणुरोधी प्रतिजैविक औषधियाँ के उदाहरण दीजिये।
उत्तर : जीवाणुनाशी प्रतिजैविक : पेनिसिलिन , ओफ्लोक्सामीन , एमिनो ग्लाइकोसाइड्स
जीवाणुरोधी प्रतिजैविक : क्लोरेम्पेनिकोल , एरिथ्रोमायसीन , टेट्रा साइक्लिनस
6. प्रतिएलर्जी या प्रतिहिस्टामीन
प्रतिनिषेचक औषधियां (antifertility drugs) : वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग जनन व उत्पादकता को कम करने के लिए किया जाता है , प्रतिनिशेचक औषधियां कहलाती है।
यह विश्व में जनसंख्या वृद्धि को कम करने के लिए प्रयुक्त की जाती है।
प्रतिनिषेचक औषधियाँ निम्न है –
उदाहरण :
- मटर का तेल
- विनोले का तेल
- गाजर के बीज
- सोयाबीन
- मटर के तेल में मेटा xylo हाइड्रो क़ुइनोने प्रतिनिशेचक का कार्य करता है।
- विनोले के तेल में गासीपोल प्रतिनिषेचक पाया जाता है।
- गर्भ निरोधक गोलियां भी प्रति निषेचक का कार्य करती है।
- मादाओ द्वारा स्त्रावित एस्ट्रोजन व प्रतिएस्ट्रोन हार्मोन के बने निम्न व्युत्पन्न भी प्रतिनिषेचक का कार्य करते है।
- नार एथीन ड्रोन
- एथिलीन एक्स्ट्रा डाई ऑल (नोवेस्ट्रोल)
प्रति अम्ल (anti acid) : वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग हमारे शरीर में अमाशय में अम्लीयता की मात्रा को कम करने के लिए जिन पदार्थो का उपयोग किया जाता है , उन्हें प्रति अम्ल कहते है।
हमारे द्वारा अनियंत्रित खाद्य पदार्थ के सेवन जैसे चाय , कॉफ़ी , मूर्बा आचार व एलोपेथिक दवाइयां आदि के अधिक सेवन से अम्लीयता उत्पन्न हो जाती है।
आमाशय में जठर ग्रंथि द्वारा जठर रस में अधिक े स्त्रावण के कारण अम्लीयता उत्पन्न हो जाती है।
प्रति अम्ल औषधियाँ निम्न है –
उदाहरण :
- Mg(OH)2 milk of megnasia (MOM)
- · MgCO3
- · Tri silicate of megnasium
- · Al(OH)3
- · Al2(PO4)3
- · NaHCO3
- · ENO
- · ओमेप्रेजोल व लेन्सोप्रेजॉल का उपयोग भी प्रति अम्ल के रूप में किया जाता है |
- सिमेटेडीन (टेगमेंट) व रेनीनिडीन (जेनटेक भी प्रति अम्ल औषधियाँ है। )
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