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नॉन स्टाइकियोमीट्री दोष (non stoichiometric defects in solids in hindi)

(non stoichiometric defects in solids in hindi) नॉन स्टाइकियोमीट्री दोष : वे यौगिक जिनमें धनायन तथा ऋणायन का अनुपात इनके अणुसूत्र द्वारा प्रदर्शित अनुपात के बराबर न हो अर्थात यौगिक में धनायन और ऋणायन का अनुपात वही नहीं हो जो अणु सूत्र में प्रदर्शित है अर्थात अणुसूत्र में धनायन और ऋणायन का अनुपात भिन्न हो और यौगिक में धनायन और ऋणायन का अनुपात अलग हो , ऐसे यौगिकों को नॉन स्टाइकियोमितीय यौगिक कहते है इन यौगिकों को बर्थोलाइड यौगिक भी कहा जाता है।
इन यौगिकों में धनायन की संख्या निश्चित संख्या से या तो कम होती है या अधिक होती है लेकिन फिर भी क्रिस्टल उदासीन बना रहता है इसके लिए क्रिस्टल में इलेक्ट्रॉन आ जाते है या कोई धनायन आ जाता है तो जिससे क्रिस्टल उदासीन बना रहा है।
इन अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन या धनायन की उपस्थिति से क्रिस्टल में दोष उत्पन्न हो जाता है इसे ही नॉन स्टाइकियोमीट्री दोष कहते है।
यह दोष सामान्यत: उन यौगिकों में देखा जाता है जो परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते है।
नॉन स्टाइकियोमीट्री दोष दो प्रकार का होता है –
1. धातु आधिक्य दोष (metal excess defect)
2. धातु अभाव दोष (metal deficiency defect)
अब हम इन दोनों प्रकार के नॉन स्टाइकियोमीट्री दोष को विस्तार से अध्ययन करते है।

1. धातु आधिक्य दोष (metal excess defect)

जब किसी क्रिस्टल में कुछ ऋणायन क्रिस्टल छोड़कर चले जाते है और विद्युत उदासीनता बनाये रखने के लिए उनके स्थान पर इलेक्ट्रॉन आ जाते है तो इस प्रकार क्रिस्टल में धन आयन की मात्रा अधिक हो जाती है , इस प्रकार के दोष को धातु आधिक्य दोष कहते है या धनायन आधिक्य दोष भी कहते है।

या जब किसी क्रिस्टल के अंतराकाशी स्थान में कुछ अतिरिक्त धनायन आ जाता है और क्रिस्टल की उदासीनता बनाये रखने के लिए उसके अनुपात में इलेक्ट्रॉन भी आ जाता है तो इस स्थिति में जो दोष उत्पन्न होता है उसे भी धातु आधिक्य दोष या धनायन आधिक्य दोष कहते है।

2. धातु अभाव दोष (metal deficiency defect)

जब किसी क्रिस्टल में धनायन का अपने स्थान से रिक्त हो जाने से या अंतराकाशी स्थान पर कुछ ऋण आवेश आ जाने से क्रिस्टल में ऋणायन की अधिकता और धन आयन की कमी हो जाती है ऐसे दोष को धातु अभाव या धनायन अभाव दोष कहते है।
जब किसी क्रिस्टल जालक में से कुछ धन आयन अपना स्थान छोड़कर गायब हो जाते है जिससे उनके स्थान पर होल बन जाता है और क्रिस्टल में धनायन की संख्या कम हो जाती है ऐसे दोष को धातु अभाव या धनायन अभाव दोष कहते है।
विद्युत उदासीनता बनाये रखने के लिए अन्य धन आयनों पर कुछ अतिरक्त धनावेश आ जाता है जिससे क्रिस्टल में विद्युत उदासीनता बनी रहती है।
या
जब किसी क्रिस्टल जालक में अंतराकाशी स्थान पर कुछ अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन आ जाते है और विद्युत उदासीनता बनाये रखने के लिए अन्य धन कणों पर धन आयन बढ़ जाता है तो इस प्रकार के दोष को भी धातु आभाव या धनायन अभाव दोष कहते है।