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संख्या पद्धति किसे कहते हैं शोर्ट ट्रिक , संख्या पद्धति नोट्स PDF SSC GD प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संख्या प्रणाली नोट्स
मूलभूत गणित के संख्या पद्धति किसे कहते हैं शोर्ट ट्रिक , संख्या पद्धति नोट्स PDF SSC GD प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संख्या प्रणाली नोट्स ?
संख्या-प्रणाली (Number System) : Decimal Number System से परिचित हैं जिसमें 0 से 9 तक के ……9 होते है। इस संख्या-प्रणाली का आधार (base) 10 होता है क्योंकि इसमें कुल दस संकेत या अंक होते हैं। दशमलव संख्या-प्रणाली में लिखी गई किसी भी संख्या का मान निम्नालाखत पा गुण या अर्थ रखता है:
(1) संकेत मान (Symbol Value) : ये 0 से 9 तक के अंक होते हैं।
(2) स्थानीय मान (Positional Value) : संख्या के दायीं से बायीं दिशा में आधार (Base) 10 की। घात (Power) के क्रम में वृद्धि। जैसे—हजार, सैकड़ा, दहाई, इकाई आदि।। ये क्रमशः इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं- हजार – सैकड़ा – दहाई – इकाई । ऋणात्मक अंकों की स्थिति संख्या के दायें से बायें चलती है और 0 (शन्य) से प्रारम्भ होती है। जैसे …….. -3-2-1-0 प्रत्येक अंक का स्थानीय मान उसके आधार या बेस (Base) पर अंक की स्थिति की संख्या की घात (Power) लगाकर प्राप्त किया जाता है और उस अंक का मान, अंक और स्थानीय मान के गुणनफल के बराबर होता है। किसी दी गई संख्या का मान उसके अंकों के मानों के योग के बराबर होता है।
उदाहरणार्थ : दशमलव संख्या 365 का अर्थ है:
|
नोट : किसी भी संख्या की घात शून्य होने पर उसका मान 1 प्राप्त होता है इसलिए 10 = 1 होगा। इस प्रकार संख्या में प्रत्येक अंक का मान निम्नलिखित पर आश्रित होता है ।
- अंक (Digit)
- संख्या में अंक की स्थिति
- संख्या-प्रणाली का आधार (Base of Number System) गणित के विकास के साथ अनेक संख्या प्रणालियां व्यवहार में आई हैं। प्रत्येक संख्या-प्रणाली में प्रयुक्त अंकों की संख्या अलग-अलग होती है जिससे उनके आधार (Base) भी विविध होते हैं। संख्या-प्रणाली का नाम भी उसमें प्रयुक्त अंकों की संख्या के आधार पर होता है। कुछ प्रचलित संख्या-प्रणालियां हैं—दशमलव संख्या-प्रणाली, बाइनरी संख्या प्रणाली या द्वि-आधारी संख्या प्रणाली, अष्ट-आधारी संख्या प्रणाली या ऑक्टल संख्या-प्रणाली (Octal Number System), हेक्साडेसीमल संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System) इत्यादि।
बाइनरी संख्या-प्रणाली या द्वि-आधारी संख्या-प्रणाली : इस संख्या-प्रणाली में दो अंक होते हैं, 0 (शून्य) और 1, कुल अंकों की संख्या 2 है इसलिए इस संख्या-प्रणाली का आधार या बेस (Base) 2 होता है। बाइनरी संख्या-प्रणाली में 0 और 1 के अंकों को बाइनरी अक (Binary Digit) या बिट (Bit) कहते हैं। Bit (बिट) Binary Digit का संक्षिप्त रूप (Short Form है। आठ बिट्स (Bits) के समूह को बाइट (Byte) कहते हैं। एक बाइट (Byte) के अर्ध भाग (4 बिट) को निबल (Nibble) कहते हैं। किसी भी बाइनरी संख्या को दशमलव संख्या में परिवर्तित किया जा सकता है। इसी प्रकार किसी भी दशमलव संख्या को बाइनरी संख्या में परिवर्तित किया जा सकता है। इस प्रणाली में अंक और स्थानीय मान दशमलव संख्या-प्रणाली के समान ही होते हैं लेकिन इनका आधार या बेस (Base) 2 होता है क्योंकि इसमें दो अंक होते हैं 0 और 1, जिसमें पहले अंक (सबसे दाएं) का स्थानीय मान 2 = 1 और दाएं से दूसरे अंक का स्थानीय मान 2′ = 2 होगा। इस प्रकार उत्तरोत्तर दाएं से बाएं बढ़ने पर स्थानीय मान इस प्रकार होंगे—… 16 6-8 – 4 – 2 – 1
उदाहरणार्थ—कोई बाइनरी संख्या 110011 है तो यह निम्न प्रकार अर्थ रखती है :
| संख्या | अंको के मान | दायें से बायें अंको की | स्थानीय मान | दशमलव संख्या के अंको का मान |
| 1 | 1 | 0 | 20 | 1 x 20 = 1 |
| 1 | 1 | 1 | 21 | 1 x 21 = 2
|
| 0 | 0 | 2 | 22 | 0 x 22 = 0
|
| 0 | 0 | 3 | 23 | 0 x 23 = 0
|
| 1 | 1 | 4 | 24 | 1 x 24 = 16
|
| 1 | 1 | 5 | 25 | 1 x 25 = 32
|
| योग = 51 |
नोट-किसी भी संख्या को प्रदर्शित करते समय उसका आधार व्यक्त करने के लिए संख्या को कोष्ठको में बन्द करके दाईं ओर नीचे उसका आधार (Base) लिख दिया जाता है, इससे हम यह जान लेते हैं कि दी गई संख्या किस संख्या-प्रणाली की है।] 1. बाइनरी संख्या को दशमलव संख्या में परिवर्तित करना (Converting a Binary Number to a Decimal Number)–बाइनरी संख्या को दशमलव संख्या में परिवर्तित करने के लिए बाइनरी संख्या के प्रत्येक अंक को उसके स्थानीय मान (Positional Value) से गुणा करके गुणनफलों का योग प्राप्त करते हैं। यह गुणनफलों का योग ही उस बाइनरी संख्या की दशमलव संख्या (Decimal Number) होगा। उदाहरण 2.1. बाइनरी संख्या 1011001 को दशमलव संख्या में परिवर्तित करो।
- दशमलव संख्या को बाइनरी संख्या में परिवर्तित करना (Converting a Decimal Number to a. Binary Number) – दशमलव संख्या को बाइनरी संख्या में परिवर्तित करने के लिए बाइनरी संख्या-प्रणाली के आधार 2 का उपयोग करते हैं। इसके लिए निम्नलिखित पद (Steps) हैं : 1(1) दी गई दशमलव संख्या में बाइनरी संख्या-प्रणाली के आधार 2 का भाग देते हैं। (2) भागफल को संख्या के नीचे और शेषफल (Remainder) को दाईं ओर लिखते हैं। (3) पद (2) में प्राप्त भागफल में पुन: 2 का भाग देकर नए भागफल को पिछले भागफल के नीचे और शेषफल (Remainder) को दाईं ओर लिखते हैं। (4) इसी प्रकार पद 1 से 3 तक की क्रिया तब तक दोहराते हैं जब तक कि भागफल का मान 0 (शून्य) प्राप्त न हो जाए। (5) प्राप्त 1 और 0 के शेषफलों को नीचे से ऊपर के क्रम में लिखते हैं। यही एकत्रित शेषफल दी गई दशमलव संख्या की बाइनरी-परिवर्तित संख्या है। उदाहरण 2. दशमलव संख्या 89 को बाइनरी संख्या में परिवर्तित कीजिए।
अष्ट-आधारी संख्या-प्रणाली या ऑक्टल संख्या प्रणाली (OCTAL NUMBER SYSTEM) : इस संख्या-प्रणाली में कुल 8 अंक (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7) होते हैं। इसलिए इस संख्या-प्रणाली का आधार 8 होता है। ऑक्टल संख्या के प्रत्येक अंक का स्थानीय मान निम्न प्रकार होता है
84 83 82 81 80
4096 512 64 8 1
बाइनरी संख्या कम्प्यूटर द्वारा आसानी से समझी जा सकती है, लेकिन बड़ी बाइनरी संख्याओं का उपयोग करने में प्रोग्रामर्स (Programmers) को परेशानी आती थी। इसलिए उन्होंने एक समाधान निकाला जिसमें बाइनरी संख्या के तीन अंकों का समूह एक इकाई (Unit) द्वारा व्यक्त किया जा सकता था। ऑक्टल संख्या-प्रणाली का एक अंक (0 से 7) तीन बाइनरी अंकों के समूह को व्यक्त करता है। अंकों को दाईं से बाईं ओर समूहित किया जाता है।
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