सरकारी पत्र या शासकीय पत्र | प्रकार | कैसे लिखते है | सरकारी पत्र का प्रारूप तैयार कीजिए प्रमुख विशेषताएं

By  

सरकारी पत्र का प्रारूप तैयार कीजिए प्रमुख विशेषताएं ? सरकारी पत्र या शासकीय पत्र | प्रकार | कैसे लिखते है ?

सरकारी पत्र या शासकीय पत्र

सरकारी या गैरसरकारी कार्यालयों के प्रशासन से सम्बन्धित पत्र शासकीय पत्र कहलाते हैं। लेकिन अब शासकीय या सरकारी पत्र केवल सरकारी कार्यालयों से संबंधित पत्राचार के अर्थ में रूढ़ हो गये हैं । व्यक्तिगत कार्यालयों का प्रशासन-सम्बन्धी पत्र भी सरकारी पत्र की तरह ही लिखा जाता जाता है। साथ ही दूसरे कार्यालय से आने वाले पत्र भी एक दूसरे रजिस्टर में अंकित किये जाते हैं। कार्यालय में हर एक विषय से संबद्ध फाइलें होती हैं जिन पर उनका संकेतांक अंकित रहता है । पत्रों पर पत्रांक के साथ संकेतांक एवं संबद्ध वर्ष का उल्लेख किया जाता है । इसके बाद दिनांक लिखा जाता है । ये शासकीय पत्र एक निश्चित पद्धति के अनुसार लिखे जाते हैं जिसमें सरलता, शुद्धता, स्पष्टता, संक्षिप्तता, शिष्टता आदि का ध्यान रखा जाता है । इन पत्रों में व्यक्तिगत सम्बन्धों की चर्चा नहीं की जाती है।

वस्तुतः शासकीय पत्र लिखतते समय क्रमशः निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

(1) कागज के शीर्ष पर पत्रांक और दिनांक देना चाहिए। कभी-कभी प्रेषिती के पता के बाद भी पत्रांक और दिनांक लिखा    जाता है ।

(2) पत्र के बाएँ हाथ प्रेषक का पद और कार्यालयीय पता अंकित करना चाहिए ।

(3) इसके नीचे प्रेषिती का पद और पता लिखा जाता है।

(4) इसके बाद पत्र का विषय अत्यन्त संक्षेप में लिख दिया जाता है।

(5) सम्बोधन के लिए श्महोदयश् लिखने के बाद उसके नीचे से पत्र का मुख्य प्रतिपाद्य लिखा जाता है।

(6) अन्त में समापनसूचक शब्द श्भवदीयश् लिखकर प्रेषक हस्ताक्षर करता है।

(7) पृष्ठांकन-प्रतिलिपि निम्नांकित को—

(1) . . . . को सूचनार्थ

(2) . . . . को आवश्यक कार्रवाई हेतु ।

प्रेषक के हस्ताक्षर……………………

पद……………………

सरकारी पत्र का नमूना

पत्रांक 433 (1)/13, (ख)/74-75 दिनांक 3-1-75

प्रेषक,

सचिव, शिक्षा विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार,

लखनऊ।

सेवा में,

शिक्षा निदेशक ( उच्च शिक्षा ),

उ० प्रदेश, इलाहाबाद ।

विषय–अनुमोदित अध्यापकों के स्थायीकरण के विषय में ।

महोदय,

मुझे यह आपसे कहने का निर्देश मिला है कि राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा अनुमोदित होने के बाद विभिन्न राजकीय कालेजों में अस्थायी रूप से अध्यापन करते हुए जिन प्राध्यापकों को तीन वर्ष से अधिक हो गये हों, उनके स्थायीकरण के सम्बन्ध में अविलम्ब कार्रवाई करें । जिन लेक्चररों अथवा प्राध्यापकों की गोपनीय आख्या प्रतिकूल है, उनके स्थायीकरण की कार्रवाई अभी स्थगित रखी जाय।

भवदीय,

अ ब स

शिक्षा सचिव

पृष्ठांकन सं0433 (1) 13 (ख)/74-75 दिनांक 3-1-75

प्रतिलिपि राजकीय कालेजों के सभी प्राचार्यों को इस आशय से प्रेषित कि वे अपने अधीनस्थ कार्यरत एवं लोकसेवा आयोग द्वारा अनुमोदित अध्यापकों की सूची शिक्षा निदेशालय को अविलंब भेजें उन्हीं अध्यापकों की सूची भेजें जिन्हें कार्य करते हुए तीन वर्ष से अधिक हो गये हैं, परन्तु अभी तक उनके स्थायीकरण के आदेश नहीं हुए हैं।

अ ब स

शिक्षा सचिव

सरकारी पत्र अनेक रूपों में विभक्त हो सकते हैं-उदाहरणार्थ

(1) शासनादेश,

(2) अर्थशासकीय पत्र,

(3) गैर सरकारी पत्र,

(4) परिपत्र ,

(5) अनुस्मरण-पत्र

(6) कार्यालयीय ज्ञापन,

(7) कार्यालयीय आदेश,

(8) पृष्ठांकन,

(9) अधिसूचना,

(10) प्रेस-विज्ञप्ति,

(1) शासनादेश

सचिवालय द्वारा जारी किये गये पत्र शासनादेश कहे जाते हैं जिसके द्वारा शासन के निर्णय से अधीनस्थ कार्यालयों को सूचना दी जाती है । ऐसे सभी पत्र उत्तम पुरुष में लिखे जाते हैं जिसकी शुरुआत इस प्रकार की जाती है- ‘श्मुझे यह कहने का आदेश हुआ है कि।‘

शासनादेश का नमूना

शा० सं० 3453/शि०/(ख) दिनांक 15 फरवरी 1974

प्रेषक,

सचिव, शिक्षा विभाग,

उ० प्र० सरकार, लखनऊ ।

सेवा में,

शिक्षा निदेशक,

उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद ।

महोदय,

मुझे यह कहने का आदेश हुआ है कि शिक्षा निदेशालय और सभी राजकीय कालेजों के कार्यालय इस सचिवालय से हिन्दी में ही पत्राचार करें । जो अधिकारी हिन्दी से भिन्न भाषा में पत्राचार करेंगे उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

भवदीय, अब स

भवदीय,

अ ब स

शिक्षा सचिव

पृष्ठांकन सं० 3453/शि०/(ख) दिनांक 15 फरवरी 1974

प्रतिलिपि राजकीय कालेजों के सभी प्राचार्यों को सूचनार्थ प्रेषित ।

अ ब स

शिक्षा सचिव

(2) अर्धशासकीय पत्र

अर्धशासकीय पत्र प्रेषिती के व्यक्तिगत नाम से भेजे जाते हैं । जब कोई अधिकारी अर्धशासकीय पत्र प्रेषिती के व्यक्तिगत नाम से भेजे जाते हैं । जब कोई अधिकारी किसी दूसरे अधिकारी का ध्यान किसी विशेष बात की ओर आकृष्ट करना चाहता है तो वह अर्धशासकीय पत्र लिखता है । ऐसे पत्र में सबसे ऊपर पत्रांक एवं दिनांक अंकित रहता है । संबोधन शब्द के रूप में ‘महोदय‘ का प्रयोग नहीं होता है, बल्कि प्रिय डा० शर्मा जीश् आदि रूप में लिखा जाता है। प्रेषक का नाम और पता पत्र के शीर्ष पर रहता है और प्रेषिती का नाम-पता पत्र के अंत में बायीं ओर लिखा जाता है । समापन सूचक शब्द के रूप में ‘भवनिष्ठ‘ अथवा ‘आपका सद्भावी‘ लिखा जाता है जिसके नीचे प्रेषक का हस्ताक्षर होता है, लेकिन हस्ताक्षर के नीचे पद का उल्लेख नहीं होता है।

अर्धशासकीय पत्र का नमूना

अ० शा० पत्रांक 201/(शि०)/74 दिनांक 5-10-74

डा० भारतभूषण स्वरूप रायजादा  राजकीय कालेज,

प्रधानाचार्य रानीखेत (अलमोड़ा)

प्रिय डॉ० शर्माजी,

इस कार्यालय के पत्रांक 341/(शि०)/74 दिनांक 30 जुलाई 1974 की ओर मैं आपका ध्यान आकष्ट करना चाहता है जिसमें मैंने निवेदन किया था कि हिन्दी विभाग में प्रति सप्ताह 32 घंटी एक ही लेक्चरर को पढ़ाना पड़ता है। अध्यापन का यह कार्यभार निर्धारित सीमा से बहुत ज्यादा है। इससे छात्रों के साथ न्याय नहीं हो पाता है यदि पाँच या छह घंटी (पीरिएड) एक लेक्चरर प्रति दिन पढ़ाता है तो स्पष्ट है कि वह बी० ए० के छात्रों के साथ न्याय नहीं कर सकता । साथ ही उक्त हिन्दी अध्यापक के प्रति यह अन्याय है। अतः आपसे मेरा अनुरोध है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर मुझे अनुगृहीत करें।

परम आदर सहित ।

प्रति,

डॉ० रमेश चन्द्र शर्मा,

शिक्षा निदेशक (उ० शिक्षा),

शिक्षा निदेशालय, उ० प्र०

इलाहाबाद ।

(3) गैरसरकारी पत्र

गैरसरकारी पत्र का प्रयोग उस समय किया जाता है जब सचिवालय के एक विभाग को दूसरे विभाग से पूछताछ करनी होती है अथवा निर्देश लेना या देना होता है । पत्र के शीर्ष पर पत्रांक और दिनांक लिखा जाता है । सम्बोधन के स्थान पर सम्बद्ध विभाग का नाम लिख दिया जाता है । समापन शब्द ‘भवदीय‘ का प्रयोग नहीं होता हैय उसके स्थान पर प्रेषक का हस्ताक्षर, पद और विभाग का नाम लिख दिया जाता है।

गैरसरकारी पत्र का नमूना-

गैरसरकारी पत्रांक 401/सा० प्र०/ दिनांक 5 फरवरी, 1975

शिक्षा (ख) अनुभाग

कृपया इस विभाग के अनुस्मारक पत्र सं0 335/17 दिनांक 1 जनवरी, 1975 का अवलोकन करें । उ० प्र० सरकार के अधीन कालेजों में तदर्थ रूप में नियुक्त लेक्चररों की सूची शीघ्र भेजें ।

राम प्रसाद

सहायक सचिव,

प्रशासन विभाग

(4) परिपत्र

परिपत्र उसे कहते हैं जिसमें कोई आदेश या सूचना बहुत से कर्मचारियों या अधिकारियों में समान रूप से प्रसारित की जाती है। इसकी रूपरेखा शासनादेश या ज्ञापन के समान होती है। परिपत्र का नमूना-

पत्रांक 453/73 दिनांक 30 अप्रैल, 1975

प्रेषक,

सचिव, शिक्षा विभाग

उ० प्र० सरकार, लखनऊ।

सेवा में,

1. शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) उ० प्र० इलाहाबाद।

2. उ० प्र० सरकार के अधीन सभी कालेजों के प्रधानाचार्य ।

विषय-कालेजों में नये विषय खोलने के संबंध में ।

महोदय,

मुझे यह बताने का आदेश हुआ है कि आप अपने कालेज में जिन नये विषय/विषयों का समावेश करना चाहते हैं उनके नाम शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) के कार्यालय में शीघ्र ही भेज दें। यह भी सचित करना है कि जिस विषयध्विषयों का समावेश होना है क्या उसके लिए अलग से कक्ष बनवाने पड़ेंगे अथवा वर्तमान भवन से ही नये विषय के अध्यापन का काम चल जायगा ।

भवदीय,

अ ब स

सचिव

(5) अनुस्मरण- पत्र

अनुस्मरण पत्र भी सामान्य शासकीय पत्र की भाँति लिखा जाता है । जब किसी पत्र का उत्तर आने में अत्यधिक विलम्ब हो जाता है तो संबद्ध अधिकारी को पुनः स्मरण दिलाने के लिए जो पत्र लिखा जाता है उसे अनुस्मरण-पत्र अथवा अनुस्मारक कहते हैं ।

अनुस्मरण पत्र का नमूना-

पत्रांक 273/130 दिनांक 1 मार्च, 1975

प्रेषक,

अधीक्षण अभियंता,

सार्वजनिक निर्माण विभाग,

लखनऊ।

सेवा में,

अधिशासी अभियंता,

सार्वजनिक निर्माण विभाग,

लखनऊ।

अनुस्मरण – पत्र

विषय–्1974 का व्यय विवरण ।

महोदय,

इस कार्यालय के पत्रांक 273/50 दिनांक 17 दिसम्बर 1974 का अवलोकन करें और उक्त पत्र से संबंधित विवरण शीघ्र भेजें ।

भवदीय,

अ ब स

अधीक्षण अभियंता

(6) कार्यालय ज्ञापन

कार्यालय ज्ञापन का प्रयोग केन्द्रीय और राज्य सरकारों के बीच किया जाता है। साथ ही इसका उपयोग सचिवालय के विभिन्न समान स्तर के अन्तर्विभागों के बीच भी होता है । यो कार्यालयज्ञापन का दूसरा नाम ‘श्कार्यालय-स्मृति-पत्र‘ भी है । इससे अनुस्मरण-पत्र का भ्रम भी हो जाता है। इसलिए यदि इन दोनों नामों की तुलना में ‘ज्ञापन‘ शब्द अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है । संबोधनशब्द श्महोदय, एवं समापनशब्द ‘भवदीय‘ आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है। पत्र के शीर्ष पर पत्र संख्या एवं दिनांक लिखना चाहिए । इसके दाहिनी ओर प्रेषक पद और पता लिखा जाता है । इसके बाद ‘विषय‘ लिखकर नये अनुच्छेद से कथ्य का उल्लेख किया जाता है । कथ्य अन्य पुरुष में लिखा जाता है। अंत में दायीं ओर प्रेषक का हस्ताक्षर और पद का उल्लेख रहता है। इसके बायीं ओर प्रेषिती का पद और पता अंकित रहता है।

कार्यालयज्ञापन का नमूना-

पत्र सं0 351/63 दिनांक 2 फरवरी, 1975

भारत सरकार,

शिक्षा मंत्रालय,

नयी-दिल्ली।

ज्ञापन विषय-हिन्दी में आलेखन व टिप्पणी का ज्ञान । यह निश्चय हुआ था कि 1965 से भारत सरकार के सभी काम-काज हिन्दी में होंगे, लेकिन केन्द्रीय सचिवालय के सचिवों की ओर से शिकायत की गयी है कि अधिकांश कर्मचारी हिंदी आलेखन और टिप्पण लिखने की विधि नहीं जानते हैं । इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षा मंत्रालय ने हिन्दी में आलेखन एवं टिप्पण की विधि का ज्ञान कराने के लिए सांध्य-कक्षाओं की व्यवस्था की है । इस व्यवस्था से लाभ उठाने के इच्छुक कर्मचारियों के नाम शिक्षामंत्रालय के अनुभाग (स) को भेज दिये जायें।

राममूरत सिंह

सचिव,शिक्षा विभाग

सेवा में,

समस्त अनुभाग अधिकारी,

(7) कार्यालय-आदेश

कार्यालय-आदेश का उपयोग किसी कार्यालय के एक या एक से अधिक कर्माचारियों से सम्बन्धित पदोन्नति, नियुक्ति, अर्जित-अवकाश की स्वीकृति आदि से संबंधित सूचना के लिए किया जाता है । इसमें संबोधनसूचक एवं समापनसूचक शब्दों का प्रयोग नहीं होता है । पत्र के शीर्ष पर संख्या एवं दिनांक अंकित रहता है । दायीं ओर आदेश देने वाले अधिकारी का कार्यालयीय पता रहता है तथा आदेश के अंत में हस्ताक्षर और पद का उल्लेख किया जाता है।

कार्यालय-आदेश का नमूना-

सं0211/3/73 दिनांक 3-12-73

उत्तर प्रदेश सरकार

सामान्य प्रशासन विभाग

लखनऊ।

कार्यालय-आदेश

निम्नांकित व्यक्तियों को दिनांक 1-1-74 से उनके नाम के आगे अंकित पद पर 400-15-475-25-600 के वेतनमान में प्रोन्नत किया जाता है।

(क) श्री रामलाल प्रसाद-उपरिवर्ग लिपिक

(ख) श्री जयकिशन लाल-उपरिवर्ग लिपिक

अ ब स

उपसचिव

(8) पृष्ठांकन

पृष्ठांकन का प्रयोग उस समय किया जाता है जब किसी पत्र या उसकी प्रतिलिपि को अन्य अधिकारियों को भी सूचनार्थ अथवा आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजना होता है । इसमें मूलपत्र की संख्य एवं दिनांक को अंकित किया जाता है । संबोधन एवं समापन शब्द नहीं लिखा जाता ।

पृष्ठांकन का नमूना-

पृष्ठांकन सं0 475/45/15 दिनांक 24-12-74

प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित-

(1) शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा-), उ०प्र०, इलाहाबाद,

(2) राजकीय कालेजों के समस्त प्राचार्य ।

(9) अधिसूचना

अधिसूचना का प्रयोग राजपत्रित अधिकारियों की नियुक्ति स्थानान्तरण, शासनादेश आदि को सूचनार्थ एवं गजट में प्रकाशित करने के लिए किया जाता है ।

अधिसूचना का नमूना-

सं०/ नियुक्ति/430/(ख)/72-73 दिनांक-12-7-72

शिक्षा विभाग

उ० प्रदेश सरकार, लखनऊ

अधिसूचन/ध्नियुक्ति

कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से डॉ० कन्हैया लाल शर्मा को राजकीय कालेज, रानीखेत में रु० 400-40-900-50-1300 के वेतनमान पर लेक्चरर, हिन्दी विभाग के पद पर तदर्थ रूप से नियुक्त किया जाता है।

आज्ञा से,

अ० ब० सिंह

सचिव

पृष्ठांकन/नियुक्ति/430/(ख)/72-76 दिनांक 12-7-72

प्रतिलिपि निम्नांकित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित-

(1) लोक सेवा आयोग, उ० प्र०, इलाहाबाद ।

(2) महालेखाकार, उ० प्र०, इलाहाबाद ।

(3) प्राचार्य, राजकीय कालेज, रानीखेत ।

(4) सरकारी बजट में प्रकाशनार्थ ।

(5) संबंधित अधिकारी को। .

आज्ञा से,

राजीव सिंह

सचिव

(10) प्रेस विज्ञप्ति

जब किसी महत्वपूर्ण सरकारी निर्णय को सामान्य जनता तक पहुँचाना होता है तो शासन द्वारा उस निर्णय से युक्त एक प्रेस विज्ञप्ति सूचनाधिकारी के पास समाचार पत्रों में प्रकाशनार्थ भेज दी जाती है। प्रेस विज्ञप्ति, प्रेसकम्युनिक और प्रेसनोट में आपस में अन्तर होता है । ‘प्रेस कम्युनिक‘ का प्रकाशन बिना किसी संशोधन के ज्यों का त्यों किया जाता है । ‘प्रेसनोट‘ की भाषा को समाचार पत्र का संपादक बदलकर मूल भाव की रक्षा करते हुए प्रकाशित कर सकता है । प्रेसविज्ञप्ति में समय का बन्धन होता है। सरकार के निर्दिष्ट समय से पूर्व प्रेसविज्ञप्ति का प्रकाशन नहीं किया जा सकता ।

प्रेसविज्ञप्ति का नमूना–

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 28-1-78

मंगलवार, 31 जनवरी, 1978 ई० को प्रातः 10 बजे के पूर्व प्रसारित न किया जाय ।

शासनादेश 750/1/ (क)/78 दिनांक 23-1-78 के अनुसार सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि 1 मार्च, 1978 ई० से राज्य कर्मचारियों को मूल वेतन का 23प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा।

अ ब स

मुख्य सचिव

उ० प्र० सरकार