वाग्जाल का संधि क्या है | व्यंजन संधि के उदाहरण सहित परिभाषा वाक् + जाल किसका संधि विच्छेद है

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व्यंजन संधि के उदाहरण सहित परिभाषा वाक् + जाल किसका संधि विच्छेद है वाग्जाल का संधि क्या है ?

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
UPPCS (Pre. – 2013)
ऽ वाग्जाल वाक् + जाल (व्यंजन संधि)
UPPCS (Pre. – 2012)
ऽ तल्लीन तत् + लीन (व्यंजन संधि)
ऽ सदैव सदा + एव (वृद्धि संधि)
राजस्व निरीक्षक परीक्षा-2014
ऽ द्वावपि द्वौ + अपि (अयादि संधि)
ऽ अत्यधिक अति + अधिक (यण संधि)
ऽ निरन्तर निः + अन्तर (विसर्ग संधि)
ऽ इत्यदि इति + आदि (यण संधि)
ऽ मनोहर मनः + हर (विसर्ग संधि)
ऽ पुरस्कार पुरः + कार (विसर्ग संधि)
ऽ सदाचार सत् + आचार (व्यंजन संधि)
ऽ निर्गुण निः + गुण (विसर्ग संधि)
ऽ दिग्गज दिक् + गज (व्यंजन संधि)
ऽ जगदीश जगत् + ईश (व्यंजन संधि)
ऽ महीश महा + ईश (स्वर संधि)
U.P.  N.T. Exam.- 2006
ऽ ‘परमात्मा‘ का सही संधि विच्छेद है – परम + आत्मा
ऽ ‘पराधीन‘ विकल्पों में यह शुद्ध है – पर + अधीन
ऽ ‘उच्चारण‘ का सही संधि विच्छेद है – उत् + चारण
ऽ ‘महाशय‘ शब्द का सही संधि विच्छेद है – महा + आशय
ऽ ‘पावन‘ शब्द का सही संधि विच्छेद है – पौ + अन
ऽ ‘उल्लास‘ शब्द का सही संधि विच्छेद होगा – उत् + लास
ऽ ‘यण‘ संधि का उदाहरण है । -यद्यपि
ऽ ‘वृद्धि स्वर‘ संधि का उदाहरण है । -महौषध
ऽ ‘अतएव‘ शब्द का सही संधि विच्छेद है -अतः $ एव
U.P.S.D.I. Exam. 2006
ऽ ‘मृत्यु + उपरांत‘ में संधि है – मृत्यूपरांत
ऽ ‘अनधिकृत‘ शब्द का संधि-विग्रह होगा- – अन् + अधिकृत्
ऽ ‘कपि + ईश‘ का सही संधि-संयोजन कीजिए – कपीश
ऽ विसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन के संयोग से जो विकार उत्पन्न का होता है, उसे किस संधि के नाम से जानते हैं? -विसर्ग संधि
ऽ ‘परोपकार‘ शब्द का संधि-विच्छेद होगा -पर + उपकार
ऽ ‘मनः + रमा‘ में संधि करने से जो शब्द बनेगा, उसका संबंध किस संधि से होगा? -विसर्ग संधि
ऽ ‘चन्द्रोदय‘ में कौन-सी संधि है? -गुण संधि
ऽ ‘वृद्धि स्वर संधि‘ किस शब्द में है? -महौषध
ऽ ‘सदाशय‘ का सही संधि-विच्छेद होगा -सत् + आशय
B.P.S.C. (Main) – 2002
ऽ महोदय महा + उदय
ऽ तन्मय तत् + मय
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam – 2001
ऽ संविधान सम् + विधान ऽउन्नति उत् + नति
ऽ अनन्त अन् + अन्त ऽप्रतिच्छवि प्रति + छवि
ऽ प्रणाम प्र + मान ऽप्रत्यक्ष प्रति + अक्ष
ऽ स्वेच्छा स्व + इच्छा ऽसरोज सरः + ज
ऽ मनोहर मनः + हर ऽजगदीश जगत् + ईश
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam- 2002
ऽ संस्कृति सम् + कृति

ऽयशोदा यशः + दा
ऽ अन्तरात्मा अन्तः + आत्मा

ऽअन्तन्तोगत्वा अन्ततः + गत्वा
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam-2003
ऽ मनोविज्ञान- मनः + विज्ञान (विसर्ग संधि)
ऽ यदि इ, ई, उ, ऊ, और ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो इनका परिवर्तन क्रमशः य, व और र में हो तो उसमें कौन सी संधि होगी- यण स्वर संधि।
U.P. T.G.T. (Cancel) (Hindi) Exam- 2004
ऽ भगवदगीता भगवत् + गीता
ऽ मनोरम मनः + रम (विसर्ग संधि)
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam- 2004
ऽ अंनत अन + अंत
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam-2005
ऽ इत्यादि इति + आदि
ऽ उज्ज्वल उत् + ज्वल
ऽ स्वागत सु + आगत (यण संधि)
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam-2009
ऽ अन्यान्य अन्य + अन्य (दीर्घ स्वर संधि)
ऽ गंगोदक गंगा + उदक (गुण संधि)
ऽ इत्यादि इति + आदि (यण संधि)
ऽ तेजोमय तेजः + मय (विसर्ग संधि)
ऽ हरिश्चन्द्र हरिः + चन्द्र (विसर्ग संधि)
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam- 2010
ऽ दुष्प्रकृति दुः + प्रकृति
ऽ दैत्यारिः स्वर संधि
ऽ प्रत्यारोपण प्रति + आरोपण
ऽ यदि ‘ए‘, ‘ऐ‘ ‘ओ‘ ‘औ‘, स्वरों का मेल दूसरे स्वरों से हो तो ‘ए‘ का ‘अय्ा्‘ ऐ का ‘आय‘ ओ का ‘अ‘ तथा ‘औ‘ ‘आत्‘ हो जाता है, तो इसे क्या कहते हैं? अयादि संधि
U.P. T.G.T. (Hindi) Exam- 2013
ऽ ‘जगन्नाथ‘ में कौन संधि है? – व्यंजन संधि
ऽ ‘उद्योग‘ में संधि होगा – उत् + योग
ऽ ‘प्रत्येक‘ का संधि विच्छेद – प्रति + एक
ऽ यदि ‘ए‘, ‘ऐ‘ ‘ओ‘ ‘औ‘, स्वरों का मेल दूसरे स्वरों से हो तो ‘ए‘ का ‘अय्ा्‘ ऐ का ‘आय‘ ओ का ‘अव्‘ तथा ‘औ‘ ‘आव्‘ हो जाता है, तो इसे क्या कहते हैं- अयादि संधि
U.P. P.G.T. (Hindi) Exam
ऽ पवन पो + अन (2010)
ऽ व्याप्त यण संधि (2009)
ऽ पवन पो + अन (2003)
U.P. P.G.T. (Hindi) Exam-2004
ऽ यदि ए, ओ, ऐ, औ के आगे कोई भी स्वर हो तो इसके स्थान में क्रमशः ‘अय‘, ‘आय‘, ‘अव्‘ आव हो जाता है, तो यह कौन-सी स्वर संधि कहलाती है? -अयादि स्वर संधि
ऽ तल्लीन तत् + लीन
ऽ नवोढ़ा नव + ऊढ़ा
ऽ यण संधि स्वर संधि से संबंधित है
U.P. P.G.T. (Hindi) Exam-2013
ऽ उज्ज्वल – उत् + ज्वल (व्यंजन संधि)
ऽ दुर्जन – दुः + जन (विसर्ग संधि)
Raiway-1997
ऽ पवन पो + अन (अयादि संधि)
ऽ श्रवण श्री + अन (अयादि संधि)
ऽ नयन ने + अन (अयादि संधि)
ऽ नायक नै़ अक (अयादि संधि)
ऽ पावक पौ + अक (अयादि संधि)
ऽ उज्ज्वल उत् + ज्वल (व्यंजन संधि)
ऽ वृद्धि संधि से संबंधित है सदैव, जलौध,
परमौदार्य
ऽ दीर्घ संधि दैत्यारि
ऽ अयादि संधि पवित्र
ऽ इत्यादि इति + आदि
ऽ निरर्थक निः + अर्थक
ऽ धरेश धरा + ईश
ऽ निराशा निः +आशा
ऽ आशीर्वाद आशीः + वाद
ऽ सन्मति सत् + मति
Railway-1998
ऽ परोपकार गुण संधि
ऽ मन्वन्तर स्वर संधि
ऽ निश्चल निः + चल
ऽ गिरीश गिरि + ईश
ऽ घनानन्द घन + आनंद
ऽ चिन्मय चित् + मय
Raiway -1999
ऽ सप्तर्षि सप्त + ऋषि
ऽ स्वागत यण संधि
Railway-2000
ऽ प्रत्युपकार प्रति + उपकार
ऽ गायक गै़ + अक
ऽ अभिषेक अभि + सेक
Railway -2001
ऽ यद्यपि यण स्वर संधि
ऽ महोदधि स्वर संधि
L.I.C Exam – 1997
ऽ इत्यादि इति + आदि
ऽ महोष्ण महा + उष्ण
ऽ महेश महा + ईश
ऽ अन्वय अनु + अय
U.P. Election Comision Exam-2001
ऽ पवित्र पो + इत्र
ऽ मनोयोग मनः + योग
ऽ प्रत्येक प्रति + एक
ऽ गिरीश गिरि + ईश…
Bank Exam. 2002
ऽ नायक नयादि संधि
ऽ चंद्रोदय गुण संधि
ऽ यशोदा विसर्ग संधि
ऽ उद्धरण उत् + हरण
ऽ तेजोमय तेजः + मय
ऽ स्वर संधि के भेद हैं-5
ऽ स्वर संधि से संबंधित- रत्नाकर
ऽ ‘व्यर्थ‘ शब्द में किन वर्गों की संधि हुई है? – इ + अ
U.P.S.I. Exam. 2002
ऽ संधि की दृष्टि से शुद्ध हैं- तथैव, तथापि, तदाकार
ऽ घुड़दौड़ – घोड़ा + दौड़
ऽ ‘अभ्युदय‘ शब्द में कौन सी संधि है-यण स्वर संधि
ऽ राकेश – राका + ईश (गुण संधि)
N.V.S./K.V.S. (Hindi) Exam- – 2003
ऽ उच्चारण उत् + चारण
ऽ रमेश रमा + ईश (गुण संधि)
B.Ed. : 2007 (Joint) Kanpur University
ऽ मनोनुकूल विसर्ग संधि
ऽ दुश्शासन (दुःशासन) विसर्ग संधि,
B.Ed. : 2008 (Joint)  Agra University
ऽ महर्षिः स्वर संधि ऽ स्वागत यण संधि
ऽ जगदीश जगत् + ईश ऽ महोत्सव महा + उत्सव
ऽ यशोदा यशः + दा
B.Ed. : 2010 (Joint) Lucknow University
ऽ पावक पौ + अक

ऽ जगदीश जगत् + ईश
B.Ed. : 2011 (Joint) Ruhelkhand University
ऽ आग्नेयास्त्र दीर्घ संधि

ऽ अति + इत अतीत (दीर्घ संधि
ऽ गजेंन्द्र गुण संधि

ऽ नवोढ़ा गुण संधि
B.Ed. : 2012 (Joint) Awadh University
ऽ लोक + एषणा लोकैषणा (वृद्धि संधि)
ऽ अभ्यर्थी यण संधि
ऽ पर्यवेक्षण यण् सधि
ऽ चयन अयादि संधि
B.Ed. : 2013 (Joint) Gorakhpur University
ऽ नौ + इक नाविक (अयादि संधि)
ऽ संशोधन व्यंजन संधि
B.Ed.: 2014 (Joint) Jhansi University
ऽ वन + औषध वनौषध

ऽ महा + ओज महौज
ऽ धीर + उदात्त धीरोदात्त

ऽ मानव + इतर मानवेतर
B.Ed. : 1996 (G.K.P.U., B.H.U., A.U.,K.U.)
ऽ कविश्वर दीर्घ संधि

ऽ संसार व्यंजन संधि
ऽ तल्लीन व्यंजन संधि

ऽ इत्यादि यण संधि
ऽ पुनर्जन्म पुनः +जन्म

ऽ पितृऋण पितृ + ऋण
ऽ इत्यादि इति + आदि

ऽ युधिष्ठिर युधि + स्थिर
ऽ जगदीश जगत् + ईश

ऽ कनकटा कान + कटा
ऽ रामायण राम + अयन
B.Ed. : 2004 (G.K A.U., B.H.U., K.U)
ऽ सुरेन्द्र सुर + इन्द्र ऽ सदाचार सत् + आचार
ऽ महेन्द्र महा + इन्द्र ऽ देव्यर्पण देव + अर्पण
ऽ गायक गै + अक ऽ संशय सम् + शय
ऽ निर्भय निः + भय ऽ शरच्चन्द्र शरत् + चन्द्र
ऽ उल्लेख उत् + लेख ऽ निर्बल निः + बल
ऽ संतोष सम् + तोष ऽ उज्ज्वल उत् + ज्वल
ऽ विश्वामित्र विश्व + अमित्र ऽ संगम सम् + गम
B.Ed. : 2005 (Jhansi, K.University)
ऽ षड्ानन व्यंजन संधि

ऽ धर्मात्मा स्वर संधि
ऽ महीश दीर्घ संधि

ऽ निश्छल विसर्ग संधि
ऽ दुरूपयोग विसर्ग संधि

ऽ स्वागत यण संधि
ऽ भानूदय दीर्घ संधि

ऽ सूर्योदय गुण संधि
ऽ हरिश्चन्द्र विसर्ग संधि

ऽ उच्चारण व्यंजन संधि
ऽ अभिन्न अ + भिन्न

ऽ महेन्द्र महा + इन्द्र
ऽ अत्याचार अति + आचार

ऽ दिगम्बर दिक् + अम्बर
ऽ पावक पौ + अक

ऽ स्वच्छ सु + अच्छ
B.Ed. : 2006 (B.H.U., K.U., P.U., G.K.P.k~ University, Ruhelkhand University)
ऽ हरीश हरि + ईश
ऽ सदानंद सत् + आनंद
ऽ सच्चिदानंद सत् + चित ़आनंद
ऽ रमेश रमा + ईश ऽ यशोदा यशः + दा
ऽ नयन ने + अन ऽ भवन, भो + अन
ऽ पवित्र पो + इत्र ऽ उन्नति उत् + नति
ऽ देवार्चन स्वर संधि ऽ श्रदधानंद स्वर संधि
ऽ गिरींद्र स्वर संधि
ऽ नवोढ़ा गुण स्वर संधि
ऽ लोकैषणा वृद्धि स्वर संधि
ऽ स्वेच्छा गुण संधि
ऽ उन्नति व्यंजन संधि