फतेहपुर सीकरी को किसने राजधानी बनाया , अकबर ने कब फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाने का निर्णय किया

By   May 25, 2021

fatehpur sikri was the capital under reign of अकबर ने कब फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाने का निर्णय किया फतेहपुर सीकरी को किसने राजधानी बनाया ? fatehpur sikri was built by which ruler in hindi ?

उत्तर : अकबर ने आगरा के पास फतेहपुर सीकरी नगर का निर्माण 1569 ई. में शुरू करवाया गया जो 1571 ई. में बनकर पूर्ण हुआ, इसे अकबर ने अपनी राजधानी बनाया। वहां अनेक भवनों का निर्माण करवाया, जिसे फर्ग्युसन ने किसी महान व्यक्ति के दिमाग की उपज बताया है। लगभग सभी भवनों में बेहतरीन लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग व परम्परागत शहतीर व कंगूरानुमा स्तम्भों वाली निर्माण पद्धति का प्रयोग किया गया है। फतेहपुर सीकरी की इमारतों की प्रमुख विशेषता श्चापाकार एवं धरणिक शैलियाश् का समन्वय हुआ है। फतेहपुर सीकरी के भवनों को धार्मिक व लौकिक आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं। धार्मिक भवनों में जामा मस्जिद व सलीम चिश्ती का मकबरा (वर्गाकार मेहराब का प्रथम प्रयोग) है जो कि श्रद्धा, भावना तथा सन्तुलित सजावट का उत्तम समन्वय प्रदर्शित करते हैं।
लौकिक भवनों में विशाल बुलन्द दरवाजा गुजरात विजय का स्मारक है। इसमें प्रवेश द्वार पर विशाल मध्यवर्ती मेहराब है और यह अर्द्धगुम्बदीय ईरानी शैली में निर्मित है। श्पंचमहलश् या श्हवामहलश् पाँच मंजिली इमारत है जो कि ऊपर की ओर क्रमिक रूप से पिरामिड़ाकार होती गई है। यह भवन नालन्दा के बौद्ध विहारों से प्रेरित है। इसके अलावा दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जोधाबाई का महल, बीरबल महल, तुर्की सुल्ताना महल, मरियम महल आदि अन्य महत्वपूर्ण भवन यहां स्थित है। दीवाने आम रू दीवाने आम एक आयताकार प्रांगण था। यहां एक स्तम्भ से बरामदे की छते जुड़ी हुई है। अकबर दीवाने आम में बैठकर न्याय करता था।
दीवाने खास रू यह अकबर का व्यक्तिगत भवन था। भवन के मध्य एक स्तम्भ पर वृत्ताकार मंच बना हुआ है, जो 36 गूंथे हुए तोड़ों पर टिका है। यह मंच पत्थर के पुल द्वारा भवन की गैलरी से जुड़ा है। मंच का स्तम्भ हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई तथा बौद्ध कला का प्रतीक है।
जोधाबाई का महल रू यह फतेहपुरी सीकरी का सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ महल है। इसका निर्माण गुजरात के हिन्दू कारीगरों द्वारा होने के कारण इस पर गुजराती शैली का व्यापक प्रभाव है। महल में उत्कीर्ण अंलकरण दक्षिण के मंदिरों की वास्तुकला से प्रभावित है।
तुर्की सुल्ताना का महल रू यह एक मंजिला इमारत है जिसका निर्माण पंजाब के कारीगरों ने किया। पर्सी ब्राउन ने इसे श्मुगल स्थापत्य कला का रत्नश् कहा है।
पंचमहल रू पंचमहल पिरामिड आकार में बौद्ध शैली में निर्मित पांच मंजिला इमारत है। ऊपर की मंजिले क्रमशः छोटी होती गई हैं। सबसे नीचे की मंजिल में 64 स्तम्भ व सबसे ऊपर की मंजिल में मात्र 4 स्तम्भ हैं। पांचवी मंजिल पर बना गुम्बन इस्लामी कला का प्रतीक है। बीरबल का महल रू यह दो मंजिला महला अकबर के नवरत्नों में एक महेश (बीरबल) के लिए बनाया गया। इसमें हिन्द एवं फारसी शैली का समन्वय हुआ है।
मरियम का महल रू मरियम का महल जोधाबाई के महल के बगल में है। मरियम जहाँगीर की माँ व अकबर की प्रमख राजपूत रानी थी। इसमें बहुत से ईरानी चित्र थे जिन्हें बाद में औरंगजेब ने पुतवा दिये।
जामा मस्जिद रू स्थापत्य की दृष्टि से फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद अकबर की इमारतों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। शेख सलीम चिश्ती की स्मति में 1581 में निर्मित करवाया गया। इसे श्फतेहपुर सीकरी का गौरवश् या श्फतेहपर की शानश् कहा जाता है। संगमरमर से निर्मित इस मस्जिद को फर्ग्युसन ने श्पत्थर में रूमानी कथाश् कहा है।
शेख सलीम चिश्ती का मकबरा रू अकबर के काल में यह मकबरा लाल पत्थर से बना था किन्तु जहांगीर ने इसे सफेद संगमरमर में परिवर्तित करा दिया। मकबरे के अन्दर पत्थर की जालियां अत्यन्त आकर्षक व कलात्मक हैं।
फतेहपुर सीकरी की अन्य इमारतों में टकसाल, ज्योतिष भवन, सराय, मुआफिज खाना, हिरण मीनार, अनूप तालाब आदि उल्लेखनीय हैं। स्मिथ ने फतेहपुर सीकरी को ‘पत्थर में ढ़ाला गया रोमान्स‘ कहा है। फर्ग्युसन ने कहा कि ‘फतेहपुर सीकरी उस महान व्यक्ति (अकबर) की परछाई है जिसने इसको बनवाया था।‘ अबुल फजल अकबा स्थापत्य कला की रूचि की प्रशंसा करते हुए कहता है कि ‘उसने आलीशान इमारतों की योजना बनाई तथा अपने मस्तिष्क एवं हृदय की रचना को पत्थर एवं मिट्टी की पोशाक पहनाई।‘ ‘सम्राट स्वयं सुन्दर भवनों की योजना बनाकर अपने मस्तिष्क एवं हृदय के विचारों को पाषाण एवं मिट्टी के आवरण से सुसज्जित करता था।‘
प्रश्न: ‘शाहजहां के शासनकाल को वास्तुकला की दृष्टि से ‘स्वर्ण काल‘ कहा जाता है। कथन के संदर्भ में शाहजहां कालीन स्थापत्य की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर: शाहजहाँ के काल में स्थापत्य कला में अपूर्व विशिष्टता आई। एक ओर जहां संगमरमर का प्रयोग व्यापक रूप से इस वहीं दूसरी तरफ फूलों वाली आकृतियों में बहुमूल्य पत्थरों एवं रत्नों की श्वेत संगमरमर में जड़ावट (पित्रा-दरा प्रयोग, काले संगमरमर से कुरान की आयतें व ज्यामितीय अंकन का प्रयोग हुआ। शाहजहां के काल में गुम्बदों की संरचना और ज्यादा प्रभावी हुई जिसे ‘अमरूदी गुम्बद‘ कहते हैं। इस पर निर्मित कमलनुमा संरचना इसके सौन्दर्य में वृद्धि करता है। सुन्दर, अलंकृत व नक्काशीदार स्तम्भ भी शिल्पकला के शानदार उदाहरण हैं। विशेषकर ‘दांतेदार मेहराब‘ इस काल के स्थापत्य का प्रमुख उदाहरण है। चारों कोनों पर मीनारों का निर्माण, बाग व झरनों की प्रचुरता, ज्यामितीय संरचना इस युग के भवनों की अन्य प्रमुखता है।
अकबर की तुलना में सजीवता, मौलिकता, दृढ़ता आदि गुणों की इस युग के भवनों में कमी है, किन्तु ये अतिव्ययपूर्ण प्रदर्शन एवं समृद्ध व कौशल सजावट से परिपूर्ण हैं। साथ ही धर्म निरपेक्षता की भावना का भी अभाव है। ज्यादातर भवन पूर्ण इस्लामिक पद्धति से निर्मित हैं। एक ओर जहां अकबरकालीन भवनों में शक्ति के रूप में मुगल स्थापत्य का प्रारम्भिक काल था वहीं शाहजहां का काल मुगल स्थापत्य के चरमोत्कर्ष का काल था। इतिहासकार आशिर्वादी लाल श्रीवास्तव ने ‘शाहजहां के शासनकाल को वास्तुकला की दृष्टि से ‘स्वर्ण काल‘ कहा है।
इस युग के मुख्य भवनों में संगमरमर से निर्मित ताजमहल, दिल्ली का लाल किला, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जामा मस्जिद, आगरा का किला, मोती मस्जिद आगरा आदि प्रमुख हैं। शाहजहाँ ने अकबर द्वारा निर्मित आगरा के किले के कई भवनों को तोड़कर उन्हें पुनः लाल बलुए पत्थर की जगह संगमरमर से निर्मित करवाया। मोती मस्जिद शुद्ध रूप से संगमरमर निर्मित है। जामी मस्जिद त्रिगुम्बदीय है जिसमें मध्यवर्ती गुम्बद विशाल है। दिल्ली का लाल किला बलुआ पत्थर से निर्मित विशाल सरंचना है, जिसमें पश्चिम की ओर लाहोरी व पूर्व की ओर दिल्ली दरवाजा है।
शाहजहाँ एक महान निर्माता था। उसका राज्य काल भारतीय वास्तुकला के इतिहास में स्वर्णयुग के नाम से प्रसिद्ध है। शाहजहाँ का सफेद संगमरमर से विशेष लगाव था। अतः उसके काल में अधिकांश इमारतें सफेद संगमरमर से बनाई गई। पसीब्राउन ने कहा है कि ‘‘जिस प्रकार आगस्टस ने रोम को ईंटों का बना हुआ पाया व संगमरमर का बना छोड़ गया था, उसी प्रकार शाहजहाँ ने मुगल भवनों को लाल पत्थर से बना हुआ पाया और संगमरमर का बना कर छोड़ गया।‘‘ शाहजहाँ ने आगरा के किले में अकबर द्वारा निर्मित लाल पत्थर की इमारतें तुड़वाकर उन्हें संगमरमर की बनवाई। शाहजहाँ द्वारा आगरे के किले में दीवने आम, दीवाने खास, मोती मस्जिद, खास महल व झरोखा दर्शन, मुसम्मन बुर्ज, मस्जिद जहाँनामा बनाई गई।
दिल्ली की इमारतें
शाहजहांनाबाद नगर
1638 ई. में शाहजहाँ ने दिल्ली में यमुना के किनारे अपनी नई राजधानी शाहजहाँनाबाद का निमार्ण प्रारंभ किया तथा 1648 ई. में इसके पूरे होने पर राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की। नई राजधानी में ही एक किला बनाया जो लाल बलुआ पत्थर से निर्मित होने के कारण ‘लाल किला‘ कहलाता है। करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले लाल किल का निर्माण ‘हमीद अहमद‘ नामक शिल्पकार की देखरेख में हुआ। लाल किले का पश्चिमी द्वारा ‘लाहौरी दरवाजा‘ तथा दक्षिणी द्वार ‘दिल्ली दरवाजा‘ के नाम से जाना जाता है। लाल किले की प्रमुख इमारतें निम्नलिखित हैं-
दीवने आम: यहां विश्व प्रसिद्ध तख्ते-ताउस रखा जाता था, शाहजहाँ ने तख्ते ताउस ‘बेबादल खाँ‘ की देखरख बनवाया था। जिस पर बैठकर शाहजहाँ न्याय करता था। दीवाने आम स्थित रंगमहल की जाली में न्याय की तराजू यूरोपीय प्रभाव दिखाई देता है। दीवाने आम के कुछ चित्रों का विषय ‘फ्लोरंस नाइटिंगेल‘ से संबधित है।
दीवाने खास: इसकी छत चांदी की बनी है। उस पर सोने व अन्य बहुमूल्य पत्थरों की सजावट की गई हैं। दीवाने खा की दीवार पर अमीर-ए-खुसरों की ये पंक्तियां लिखी हुई हैं – ‘‘गर फिरदौस बर रू जमीं अस्तं, हमीं अस्तो, हमी अस्त औ हमी अस्त।‘‘ अर्थात् दुनियां में कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है और यहीं है।‘‘ लाल किले के अन्य स्मारक में रंग महल (सम्राट का हरम), मोती मस्जिद (औरंगजेब द्वारा निर्मित), हीरा महल तथा मुमताज महल आदि प्रमुख ।
ताजमहल: (इसका वर्णन पीछे किया जा चुका है।)