खुदाई खिदमतगार संगठन की स्थापना किसने की थी , khudai khidmatgar was founded by in hindi

जाने खुदाई खिदमतगार संगठन की स्थापना किसने की थी , khudai khidmatgar was founded by in hindi ?

प्रश्न: अब्दुल गफ्फार खां (सीमांत गांधी)
उत्तर: उत्तर-पश्चिम सीमांत के पेशावर जिले में जन्में अब्दुल गफ्फार खां ने रॉलेट एक्ट का विरोध किया और खिलाफत आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया। विशिष्ट बात है कि 1930-47 ई. के दौरान कांग्रेस द्वारा चलाए गए सभी राजनीतिक आंदोलनों में इनकी भूमिका रहीं। 1929 में इन्होंने ‘खुदाई खिदमदगार‘ (ईश्वर के सेवक) की स्थापना की एवं पठानों को एकजुट किया और उनमें राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार किया। वे मुस्लिम लीग की कट्टरवादी विचारधारा से कभी सहमत नहीं हुए और धर्मनिरपेक्षवाद के प्रति कटिबद्ध रहे। ये भारत विभाजन के कट्टर विरोधी थे। विभाजन के उपरांत इन्होंने ‘पखतूनिस्तान‘ बनाने का सक्रिय आंदोलन चलाया। पाकिस्तानी प्रशासकों ने उन्हें कई बार जेल में बंद रखा। सामान्यतः वे सीमांत गांधी, बादशाह खान, फख-ए-पाकिस्तान के नाम से जाने जाते थे। इन्हें 1987 में भारत सरकार ने ‘भारत रत्न‘ की उपाधि से सम्मानित किया था।

प्रश्न: चार्ल्स फ्रीयर एंडूज (दीन बंधु एंडूज)
उत्तर: ‘दीनबंधु‘ के नाम से प्रसिद्ध एंड्रयूज एक अंग्रेज थे, जो भारत में आकर बस गये थे। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण कार्य किये तथा भारतीयों के सहायतार्थ दक्षिण अफ्रका गये। ये अंग्रेज इसाई धर्म प्रचारक और सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली में प्राध्यापक थे। रवीन्द्र नाथ टैगोर, गोखले और गांधी जी से इनका निकट संबंध था एवं दक्षिण अफ्रीका में ‘फीनिक्स आश्रम‘ में गांधी जी के साथ रहे थे। इन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों की दशा सुधाराने हेतु प्रयास किया। ये मजदूर संघ की गतिविधियों से भी संबंधित रहे एवं 1925 व 1927 में दो बार ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने 1925 में वायकोम सत्याग्रह में भाग लिया और 1933 में हरिजनों की मांगों की रूपरेखा तैयार करने में अंबेडकर के साथ मिलकर कार्य किया। महात्मा गांधी ने इन्हें दीनबंधु की उपाधि से सम्मानित किया था।
प्रश्न: ऐनी बेसेंट
उत्तर: ऐनी बेसेंट (1847-1933 ई.) आयरिश अंग्रेज महिला थीं और थियोसोफिकल सोसाइटी का कार्य करने 1895 में भारत आई थीं। 1907 में ये इस संस्था की अध्यक्ष बनी। 1910-33 तक वे सोसायटी की सर्वेसर्वा रही। 1898 में इन्होंने सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की वाराणसी में स्थापना की। 1914 में इन्होंने ‘कॉमनवील‘ और ‘न्यू इंडिया‘ पत्रों का प्रकाशन आरंभ कर अपने विचारों से लोगों को अवगत करवाया। 1916 में इन्होंने होमरूल आंदोलन चलाया। 1917 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेश में प्रथम महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। 1917 में ही इन्होंने ‘बालचर संघ‘ और ‘भारतीय महिला संघ‘ की स्थापना की। 1898 में इन्होंने बनारस सेंट्रल हिन्द कॉलेज की स्थापना की। 1918 में इन्होंने अडयार में ‘राष्ट्रीय विश्वविद्यालय‘ की स्थापना की। इन्होंने भारत की स्वतंत्रता और भारतीय जनमत को जागृत करने के लिए प्रशंसनीय कार्य किए। 1933 में बेसेंट की अड़ियार में मुत्यु हो गई।
प्रश्न: भारत की थियोसोफिकल सोसाइटी
उत्तर: रूसी मैडम ब्लावस्टकी तथा अमेरिकी हैनरी आलकॉट के द्वारा थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना अड़ियार (मद्रास) में 1882 में की। इस समिति का मुख्य उद्देश्य धर्म को समाज सेवा का आधार बनाना व धार्मिक भ्रातत्व भाव का मारप्रसार करना था। सोसायटी पुनः जन्म एवं कर्म के सिद्धांत को स्वीकार करती थी, यह अपनी प्रेरणा का मख्य मोन सांख्य दर्शन एवं वेदांत को मानती थी। इन्होंने हिन्दू एवं बौद्ध धर्म को पुनः जीवित करने का प्रयास किया। इसने भारतीयों में राष्ट्रीय गौरव की भावना को विकसित किया। 1882 में मद्रास के निकट अड्यार में थियोसोफिकल सोसाइटी का मुख्यालय बनाने के बाद भारत में थियोसोफिकल आन्दोलन का विकास हुआ, जिसे बाद में एनी बेसेंट ने आगे बढ़ाया।