उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भारत में कहां कहां पाए जाते हैं अर्ध सदाबहार वन किसे कहते हैं परिभाषा उदाहरण

By   July 6, 2021

अर्ध सदाबहार वन किसे कहते हैं परिभाषा उदाहरण उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भारत में कहां कहां पाए जाते हैं ?

भारत के वन

ऽ ऐसे वृक्ष, झाड़ियां एवं घास जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या सहायता के उगती हैं, प्राकृतिक वनस्पति कहलाती हैं।
ऽ भारत विविध प्रकार के प्राकृतिक वनस्पतियों वाला देश है। यहां उष्णकटिबंधीय वनों से लेकर टुंड्रा प्रदेश तक की वनस्पतियां पायी जाती हैं।
ऽ अंतर्राष्ट्रीय समझौते के अनुसार प्रत्येक देश के 33% क्षेत्र पर वन होने चाहिए। विश्व में औसत वन क्षेत्र 26.6% है।
ऽ भारत में कच्छ वनस्पति (Mangroves) इसके भौगोलिक क्षेत्रफल का 0.14% है। कच्छ वनस्पति डेल्टा मैदानों में पाई जाती है।
ऽ देश में सर्वाधिक वन क्षेत्र मध्य प्रदेश में हैं जिसके बाद अरूणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र और ओडिशा है।
ऽ अरूणाचल प्रदेश में बहुत घने जंगलों का सबसे बड़ा क्षेत्र है और आंध्र प्रदेश में सर्वाधिक झाड़ियां हैं।
ऽ अपने भौगोलिक क्षेत्रफल के प्रतिशत के पदों में मिजोरम सबसे ऊपर (91.27%) है, उसके बाद लक्षदीप (82.75%), नागालैण्ड (81.21%), अंडमान व निकोबार द्वीप समूह (80.75%), अरूणाचल प्रदेश (80.43%), मणिपुर (77.40%) मेघालय (77.23%) और त्रिपुरा (76.95%)।
ऽ भारत का वृक्षावरण 92,769 वर्ग किमी अनुमानित किया गया है जो देश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.82% है। वृक्षावरण महाराष्ट्र में सर्वाधिक (9,466 वर्ग किमी), इसके बाद गुजरात (8,390 वर्ग किमी) राजस्थान (8,274 वर्ग किमी) और उत्तर प्रदेश (7,381 वर्ग किमी) का स्थान है।
वन के प्रकार
एक समान विशेषताओं के आधार पर भारतीय वनों को निम्नलिखित वर्गों में बांटा जा सकता है:
(i) उष्णकटिबंधीय सदाबहार व अर्धसदाबहार वन
(ii) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
(iii) उष्णकटिबंधीय कंटीले वन
(iv) पर्वतीय वन
(v) तटीय व दलदली वन
उष्ण कटिबंधीय सदाबहार व अर्धसदाबहार वन
ऽ ये वन ऐसे क्षेत्रों में मिलते हैं जहां सालाना तापमान 22° से. ऊपर रहता है और 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है। इसके अंतर्गत पश्चिमी घाट, शिलांग पठार, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और लक्षदीप आते हैं।
ऽ भूमध्य सागरीय वनों की तरह इनकी लकड़ियां कठोर होती हैं एवं वृक्षों की अनेक प्रजातियां मिलती हैं। इन वृक्षों की औसत ऊंचाई 60 मीटर से अधिक होती है।
ऽ महोगनी, आबनूस, जारुल, बांस, बेंत, सिनकोना, रबर, आदि इन वनों में पाये जाने वाले वृक्ष हैं। अंडमान निकोबार का 95ः भाग इन्हीं वनों से ढका है।
ऽ अर्ध सदाबहार वन: ये सदाबहार व पर्णपाती वनों के मिश्रण हैं। इनकी मुख्य प्रजातियां सफेद सीदर, होलॉक और सैल हैं। गढ़वाल व कुमायूं के ओक के वनों को पाइन या चीढ़ से प्रतिस्थापित कर दिया गया है जिनकी रेल लाइनों हेतु जरूरत थी।
उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन
आर्द्र पर्णपाती वन
ऽ इन वनों का विस्तार 100-200 सेंटीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में है।
ऽ इसका मुख्य क्षेत्र पश्चिमी घाट का पूर्वी ढाल, उत्तर पूर्व पठारी भाग, शिवालिक श्रेणी से संलग्न भाबर व तराई क्षेत्र हैं।
ऽ ये विशिष्ट मानसूनी वन हैं। यहां के प्रमुख पेड़ सागवान, सखुआ, शीशम, आम, महुआ, बांस, खैर, त्रिफला व चंदन है। ये सभी आर्थिक दृष्टिकोण से मूल्यवान हैं।
ऽ सागवान, सखुआ व शीशम का उपयोग फर्नीचर बनाने में होता है। सखुआ या साल का प्रयोग रेलवे स्लीपर बनाने में होता है।
शुष्क पर्णपाती वन
ऽ 70 से 100 सेंटीमीटर वर्षा क्षेत्र में ये वनस्पतियां पायी जाती हैं।
ऽ यहां ऊंचे पेड़ों का अभाव मिलता है तथा शुष्क सीमान्त क्षेत्र में ये वनस्पतियां कंटीले वनों और झाड़ियों में बदल जाती हैं।
ऽ अत्यधिक चराई यहां की मुख्य समस्या है।
उष्णकटिबंधीय कंटीले वन
ऽ 50 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इन वनों का विस्तार पाया जाता है।
ऽ ये वन गुजरात से लेकर राजस्थान, हरियाणा व पंजाब के कुछ भागों में मिलते हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के इंदौर से आन्ध्र प्रदेश के कुर्नूल तक ये पठार के मध्य भाग में अर्द्धचन्द्राकार पेटी में मिलते हैं।
ऽ बबूल, खैर, खजूर, नागफनी, कैक्टस आदि यहां के वृक्ष हैं।
पर्वतीय वन
ऽ पर्वतीय भागों में ऊंचाई के साथ वनस्पतियों के स्वरूप में क्रमिक परिवर्तन दिखाई पड़ते हैं क्योंकि तापमान व वर्षा में परिवर्तन आते है।
ऽ 1500 मीटर की ऊंचाई तक पर्णपाती वन जबकि 1500 से 3500 मीटर की ऊंचाई तक कोणधारी वन मिलते हैं। कोणधारी वनों की लकड़ियां मुलायम होती है। यहां देवदार, स्यूस, सिल्वर, फर, चीड़ आदि वन मिलते हैं।
ऽ पूर्वी हिमालय के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में ओक, मैग्नेलिया, लॉरेल आदि चैड़ी पत्ती वाले सदाबहार वन मिलते हैं।
ऽ अल्पाइन वनस्पतियां 2800 से 4800 मीटर की ऊंचाई तक मिलती हैं। यहां प्रारंभ में चिनार व अखरोट के वृक्ष एवं अल्पाइन चारागाह मिलते हैं, जबकि अधिक ऊंचाई पर कोई वनस्पति नहीं मिलती।
तटीय व दलदली वन
भारत में ऐसे वन 3.9 मिलियन हेक्टेयर आर्द्रभूमि पर फैले हुए हैं। आर्द्रभूमि को आठ वर्गों में वर्गीकृत किया गया है:
(i) दक्षिण में दक्कन के पठार के जलाशयों के साथ दक्षिण-पश्चिम तट के लैगून और अन्य आर्द्रभूमि।
(ii) राजस्थान, गुजरात और कच्छ की खाड़ी का क्षारीय क्षेत्र ।
(iii) गुजरात से पूर्व की ओर राजस्थान (केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान) और मध्य प्रदेश के ताजे पानी के जलाशय व झीलें।
(iv) भारत के पूर्वी तट की डेल्टा आर्द्रभूमि और लैगून (चिल्का झील)।
(v) गंगा के मैदान के ताजे पानी के दलदल।
(vi) ब्रह्मपुत्र के बाढ़ क्षेत्र उत्तर-पूर्वी भारत पहाड़ियों के दलदल और हिमालय की तलहटी।
(vii) कश्मीर व लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्र की झीलें व नदियां ।
(viii) अंडमान व निकोबार द्वीप के सदाबहार वन और अन्य आर्द्रभूमियां ।
भारत सदाबहान वन 6,740 वर्ग किमी पर फैले हुए हैं जो विश्व के कुल सदाबहार वनों का 7 प्रतिशत है। ये वन अंडमान निकोबार और पश्चिम बांगल के सुदरवन, अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र महानदी, गोदावरी और कृष्णा नदी के डेल्टा हैं।
नोट: पश्चिम बंगाल में ही देश के लगभग आधे सदाबहार वन हैं द्य भारत सरकार ने गहन संरक्षण व प्रबंधन के लिए 28 ऐसे वनां की पहचान की है।