प्रेरण द्वारा आवेशन क्या है , कैसे होता है charging by induction in hindi

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charging by induction in hindi प्रेरण द्वारा आवेशन : जब अनावेशित वस्तु से स्पर्श कराये बिना ही अनावेशित वस्तु को आवेशित करने की विधि को प्रेरण द्वारा आवेशन कहते है , प्रेरण द्वारा आवेशन विधि में अनावेशित वस्तु पर आवेशित वस्तु का विपरीत आवेश उत्पन्न होता है।

इस प्रेरण द्वारा आवेशन को निम्न उदाहरण द्वारा स्पष्ट रूप रूप से समझा जा सकता है :
एक अनावेशित गेंद को कुचालक स्टैंड पर सेट करते है जैसा चित्र में दर्शाया गया है।
charging-by-conduction-contact

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जब एक ऋणावेशित छड़ को इस अनावेशित गेंद के पास ले जाते है (स्पर्श किये बिना) अनावेशित गेंद में उपस्थित इलेक्ट्रॉन छड़ पर उपस्थित ऋणावेश से प्रतिकर्षित होते है और दूसरी तरफ विस्थापित हो जाते है , गेंद का जो हिस्सा ऋणावेशित छड़ के पास रहता है वहा धनावेश आ जाता है क्यूँकि प्रतिकर्षण के कारण ऋणावेश दूसरी तरफ (दायी तरफ) विस्थापित या इकट्ठा हो जाता है।
यदि अब चालक तार की सहायता से गेंद के दायें हिस्से को भू-सम्पर्कित कर दे तो दायी तरफ इकठ्ठा (-) आवेश चालक तार के माध्यम से धरती में चला जाता है तथा गोले पर अब बायीं तरफ वाला धनावेश शेष रह जाता है अब अगर ऋणावेशित छड़ को गेंद के पास से हटा भी लिया जाए तो भी गोले पर धनावेश उपस्थित रहेगा क्यूँकि यह आवेश प्रेरण द्वारा (छड़ को बिना स्पर्श किये) उत्पन्न हुआ है अतः इस आवेश को प्रेरण आवेश व इस प्रक्रिया को प्रेरण द्वारा आवेशन कहते है।
नोट : यदि दो गोलों पर समान मात्रा में Q धनात्मक व ऋणात्मक आवेश दिया जाए तो ऋणात्मक Q आवेश वाला गोले का द्रव्यमान धनात्मक Q आवेश वाले गोले से अधिक होगा , क्यूँकि ऋणावेशित गोले ने इलेक्ट्रॉन ग्रहण किये है अतः इसके द्रव्यमान में उन इलेक्ट्रोनो का द्रव्यमान भी जुड़ जायेगा जो उसने ग्रहण किये है इसी प्रकार धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉन त्यागे है अतः इसके द्रव्यमान से उन इलेक्ट्रोनो का भार घट जायेगा जो उसने त्यागे है।
नोट : एक आवेशित वस्तु , अनावेशित वस्तु को आकर्षित कर सकती है यह प्रेरण द्वारा संभव हो सकता है क्यूंकि जब एक अनावेशित वस्तु के पास आवेशित वस्तु लायी जाती है तो प्रेरण द्वारा निकट वाले स्थान पर विपरीत प्रकृति का आवेश उत्पन्न हो जाता है।